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नशे की लत में डूबा पंजाब! 3 साल में नशीली दवाओं की ओवरडोज से 280 लोगों की मौत 

पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में तसकरों ने नशीली दवाओं की आपूर्ति लगातार बढ़ती जा रही है. पिछले पखवाड़े में नकली नशीली दवाओं की ओवरडोज से 14 लोगों की मौत हो गई है, जबकि तीन सालों में 280 लोगों की मौत हो गई है. इसके अलावा चुनाव के दौरान पुलिस ने पठानकोट, गुरदासपुर समेत चार सीमावर्ती जिलों में 13 अवैध शराब तस्करों को गिरफ्तार किया और 17 एफआईआर दर्ज कीं हैं.

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पंजाब में 3 साल में नशीली दवाओं की ओवरडोज से 280 मौतें.
पंजाब में 3 साल में नशीली दवाओं की ओवरडोज से 280 मौतें.

पंजाब में बढ़ती नशीली दवाओं की समस्या के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी (आप) सरकार घिरती जा रही है. पुलिस के तमाम दावों के बावजूद तस्कर लगातार अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं. तस्करों ने राज्य के सीमावर्ती इलाकों में तसकरों ने नशीली दवाओं की आपूर्ति बढ़ा दी है. साथ ही बढ़ी दवाओं की कीमत ने जानलेवा नकली दवाओं की मांग बढ़ गई है. भ्रष्ट पुलिसवालों के साथ मिलकर ड्रग तस्कर अपना नेटवर्क लगातार बढ़ा रहे हैं. दवाओं की ढुलाई के लिए ड्रोन के अलावा समुद्री रास्ते का भी इस्तेमाल कर रहैं. साल 2023 में 107 ड्रोन गिराए गए हैं. वहीं, नकली नशीली दवाओं के ओवरडोज से तीन साल में 280 से मौतें हुई हैं, जबकि पिछले पखवाड़ें में 14 लोगों की मौत हुई है.

पंजाब में नशे पर रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी सरकार लोकसभा चुनाव नतीजों के तुरंत बाद हरकत में आ गई, जिससे पता चला कि नशीली दवाओं की समस्या का समाधान न करना एक गंभीर चूक थी. भगवंत मान ने दावा किया है कि ड्रग्स गुजरात से आ रहा था, जिसकी जांच की जा रही है.

सीएम ने दिए ट्रांसफर के ऑर्डर

पिछले दिनों सीएम भगवंत मान ने पुलिस विभाग में 10,000 तबादलों का अदेश देते हुए दावा किया कि कई निचले स्तर पर पुलिसकर्मी नशे के खतरे को बढ़ाने में लगे हुए हैं.

उन्होंने कहा कि कई SHO, MHC और कांस्टेबल कई वर्षों से एक ही पुलिस स्टेशन में तैनात हैं और उनके (तस्करों के साथ) संबंध और मित्रताएं हैं। वे आरोपियों को बचाने के लिए प्रक्रियाओं में हेरफेर करते हैं। मैंने डीजीपी से तुरंत बड़े पैमाने पर तबादलों का आदेश देने को कहा है.

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पुलिस विभाग में है नाराजगी

पुलिस विभाग में एक बड़ा फेरबदल चल रहा है, जिससे पुलिसकर्मी नाराज हैं. जेल के पूर्व डीजीपी शशिकांत ने इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा कि सरकारी कार्रवाई का उल्टा असर हो सकता है, क्योंकि केवल पुलिस अधिकारियों को स्थानांतरित करने से नशीली दवाओं की समस्या का समाधान नहीं होगा. हालांकि, इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता है कि पुलिस बल में काली भेड़ें हैं, लेकिन सभी पुलिसकर्मी भ्रष्ट नहीं थे. जेलों में भी इसी तरह की कार्रवाई की आवश्यकता थी जो ड्रग्स का अड्डा बन गई हैं. सरकार को आदेश देने से पहले दागी पुलिसकर्मियों की पहचान ट्रांसफर करने चाहिए थे.

डीआइजी बॉर्डर रेंज राकेश कौशल ने तबादला प्रक्रिया की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि तबादलों को नशा तस्करी से जोड़ना गलत है. ट्रांसफर का आदेश देने का निर्णय 2020 में लिया गया था, जिसमें देरी हुई और अब इसे लागू किया जा रहा है. स्थानांतरण प्रशासनिक प्रकृति के हैं और इनका नशीली दवाओं की तस्करी में पुलिस की कथित संलिप्तता से कोई लेना-देना नहीं है.

इस बीच, डीजीपी पंजाब गौरव यादव ने कहा है कि पुलिस ने पिछले दो वर्षों में ड्रग तस्करों की 200 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है. एसटीएफ और खुफिया विंग ने सड़क स्तर पर 9,000 तस्करों की पहचान करने के अलावा उनकी सूची भी तैयार की है.

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750 ड्रग के हॉटस्पॉट

पंजाब पुलिस दावों करती रहती है कि उसने नशीली दवाओं की तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है. पुलिस के दावों के बावजूद अपराधी अपनी तस्करी के नेटवर्क का लगातार विस्तार कर रहे हैं. नशीली दवाओं की ढुलाई के लिए विभिन्न प्रकार के ड्रोनों का इस्तेमाल करने के अलावा, तस्कर अब समुद्री मार्गों से भी दवाओं की तस्करी कर रहे हैं.

बीएसएफ और पंजाब पुलिस ने 2023 में 107 ड्रोन गिराए या बरामद किए, जिनका इस्तेमाल ड्रग्स के परिवहन के लिए किया गया था. साथ ही पिछले सात सालों में नकीली दवाओं की बरामदगी 5 गुना बढ़ गई है जो कि पंजाब में नशीली दवाओं की बढ़ती आपूर्ति को दिखाती है. साल 2017 में 179 किलोग्राम थी वह 2018 में बढ़कर 424 किलोग्राम हो गई. साल 2019 में 460 किलोग्राम हो गई तो 2020 में बढ़कर 760 किलोग्राम, 2021 में 571 किलोग्राम, 2022 में 594 किलोग्राम और 2023 में 1,346 किलोग्राम हो गई.

पिछले पखवाडें में 14 लोगों की मौत

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रतिबंधित दवाओं की बढ़ती लागत और बढ़ती बरामदगी के कारण इसकी मांग बढ़ गई है. साथ ही पिछले तीन सालों में नकली दवाओं से 280 लोगों की जान चली गई है और पिछले पखवाड़े में 14 लोगों की मौत हो गई. 

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पंजाब में नशीली दवाओं के ओवरडोज से होने वाली मौतें बड़ी चिंता का विषय बन गई हैं. पंजाब पुलिस द्वारा पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में प्रस्तुत एक हलफनामे में कहा गया है कि नशीली दवाओं के अत्यधिक सेवन से 2022-23 के दौरान 159 लोगों की जान चली गई, इसके बाद 2021-22 में 71 मौतें और 2020-21 में 36 मौतें हुईं.

बठिंडा और तरन-तारन हुए सबसे ज्यादा प्रभावित

बठिंडा और तरन-तारन सबसे ज्यादा सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं. शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में नशीली दवाओं के सेवन से अधिक लोग मरे. बठिंडा में नशीली दवाओं के ओवरडोज से 38 लोगों की मौत हो गई हैं. इसके बाद तरनतारन में नशीली दवाओं के ओवरडोज़ से 30 संदिग्ध मौतें हुईं हैं. फ़िरोज़पुर में नशीली दवाओं के अत्यधिक सेवन से 19 मौतें हुईं, इसके बाद अमृतसर जिले में कुल 17 नशीली दवाओं के आदी लोगों की जान चली गई. शहरी इलाकों में लुधियाना में नशीली दवाओं के अत्यधिक सेवन से 14 मौतें हुईं. अमृतसर में 6, बटाला में 10, होशियारपुर में 14, कपूरथला में 5, लुधियाना (ग्रामीण) में 5, खन्ना में 9, फतेहगढ़ साहिब में 5, एसएएस नगर में 8, संगरूर और बरनाला में पांच-पांच मौतें हुईं.

शराब तस्करों के खिलाफ 17 FIR दर्ज

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नशीली दवाओं के आदी लोग नशा पाने के लिए विभिन्न प्रकार के फार्मास्युटिकल रसायनों और ओपिओइड का इस्तेमाल करते हैं. मिलवटी नशीले पदार्थों में सबसे ज्यादा हीरोइन में मिलावट मिली है. वहीं नशा करने वालों को भी नशे की लत पाने के लिए मिलावटी और नकली दवाओं का उपयोग करते हुए पकड़ा गया है. इसके अलावा चुनाव के दौरान पुलिस ने पठानकोट, गुरदासपुर समेत चार सीमावर्ती जिलों में 13 अवैध शराब तस्करों को गिरफ्तार किया और 17 एफआईआर दर्ज कीं हैं.

पुलिस ने हाल ही में कुल 287 लीटर अवैध शराब और 16,850 किलोग्राम लहन बरामद किया है. ओपियोइड और शराब के दुरुपयोग के अलावा, पंजाब में नशेड़ी ब्यूप्रेनोर्फिन जैसी नशामुक्ति दवाओं के भी आदी हैं.  राज्य में अनुमानित 8.74 लोग नशे के आदी थे, जिनमें से केवल 2.62 लाख सरकारी और 6.12 लाख निजी तौर पर संचालित नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती थे.

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