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पुणे पोर्श हादसा: जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने निबंध लिखने की सजा क्यों दी? पुलिस कर रही जांच

पुणे पोर्श हादसा केस में अब पुलिस ने अलग-अलग एंगल्स से जांच शुरू कर दी है. पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि 19 मई को किशोर न्याय बोर्ड ने नाबालिग आरोपी को घर जाकर निबंध लिखने की सजा क्यों दी थी.

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Pune Porsche Accident (File Photo)
Pune Porsche Accident (File Photo)

पुणे पोर्श हादसे में पुलिस ने सभी संभावित पहलुओं की जांच शुरु कर दी है. पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि 19 मई को किशोर न्याय बोर्ड ने नाबालिग आरोपी को घर जाकर निबंध लिखने की सजा क्यों दी थी. यह भी पता किया जा रहा है कि क्या बोर्ड पर किसी तरह का कोई दबाव था या बोर्ड का कोई सदस्य किसी के प्रभाव में काम कर रहा था.

दरअसल, यह सब बातें इसलिए भी सामने आ रही हैं क्योंकि एनसीपी विधायक सुनील तिंगरे ने पत्र लिखकर डॉ. अजय तवारे को ससून अस्पताल का अधीक्षक बनाने की सिफारिश की थी. अपराध शाखा डॉ. अजय तवारे के फोन के फेसटाइम कॉल और व्हाट्स ऐप कॉल की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्हें किन लोगों ने फोन किया था. यह बात भी सामने आ रही है कि नाबालिग को मेडिकल के लिए ले जाने से पहले सुबह एक विधायक का फोन आया था.

क्या है मामला?

घटना 19 मई की है. पुणे के कल्याणी नगर में 17 साल का नाबालिग लड़का रात करीब 3 बजे अपनी स्पोटर्स कार पोर्श दौड़ा रहा था. उसने बाइक सवार दो सॉफ्टवेयर इंजीनियरों (लड़का-लड़की) को टक्कर मार दी. हादसे में बाइक सवार दोनों अनीश अवधिया और उसकी साथी अश्विनी कोष्टा की मौत हो गई. ये दोनों 24 साल के थे और आईटी सेक्टर में काम करते थे. भीड़ ने नाबालिग को पकड़ लिया और जमकर पीटा. कार में उसके कुछ दोस्त भी सवार थे.

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रियल एस्टेट डेवलपर का बेटा है आरोपी 

आरोपी 12वीं क्लास के रिजल्ट का जश्न मनाने के लिए दो पबों में अपने दोस्तों के साथ शराब पीने के बाद निकले थे. बाद में आरोपी नाबालिग को पुलिस के हवाले कर दिया गया. आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल और दादा सुरेंद्र अग्रवाल पुणे के नामी रियल एस्टेट डेवलपर हैं. चूंकि मामला हाईप्रोफाइल था, इसलिए शुरुआत से पीड़ितों के परिवार ने सिस्टम पर सवाल उठाए. 

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