प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुरुवार को दो रक्षा कार्यालय परिसरों का उद्घाटन किया. ये रक्षा कार्यालय परिसर दिल्ली के कस्तूरबा गांधी मार्ग और अफ्रीका एवेन्यू में हैं. नए दफ्तरों को बनाने की जरूरत क्यों पड़ी, पीएम मोदी ने इसपर भी बात की. साथ ही सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर निशाना साधने वाले लोगों को घेरा भी. पीएम मोदी ने बताया कि ये नए दफ्तर 11 एकड़ भूमि में बने हैं. पहले के दफ्तरों के मुकाबले 5 गुना कम भूमि में ये बनकर तैयार हो गए.
पीएम मोदी ने कार्यक्रम में सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की वेबसाइट को भी लॉन्च किया. अपने संबोधन में पीएम मोदी ने इसे नए भारत की तरफ बढ़ता कदम बताया. मोदी ने कहा कि ये नए ऑफिस रक्षा मंत्रालय को ज्यादा मजबूत करेंगे. मोदी बोले कि मौजूदा दफ्तर काफी पुराने थे, जिनकी सिर्फ हल्की-फुलकी मरम्मत हो जाती थी.
मोदी ने आगे कहा, 'जो लोग सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के पीछे डंडा लेकर पड़े थे, वे इन प्रोजेक्ट पर बिल्कुल चुप रहते थे, जबकि ये भी सेंट्रल विस्टा का ही हिस्सा हैं.' मोदी ने आगे कहा कि जो काम आजादी के तुरंत बाद होना चाहिए था, वह 2014 के बाद शुरू हुआ था.
मोदी बोले कि भारत की राजधानी ऐसी होनी चाहिए जिससे केंद्र में लोक, जनता हो. सेंट्रल विस्टा के मूल में यही भावना है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में काम समय सीमा से पहले हो रहा. वरना सरकारी कामों में लंबा वक्त लगता है. माना जाता है कि 6-7 महीने की देरी होती है तो कोई बात नहीं.
राजनाथ सिंह बोले - जर्जर हो चुके थे पुराने ऑफिस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहले मंत्री हरदीप पुरी और राजनाथ सिंह ने वहां संबोधन दिया. उन्होंने बताया कि मौजूदा ऑफिस जिस जगह हैं वह एक शताब्दी से पुराने हैं, जिनका बदला जाना जरूरी था. राजनाथ सिंह ने बताया कि ये बिल्डिंग्स जर्जर हो गई थीं, इसलिए नए ऑफिस जरूरी थे.
उद्घाटन कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, आवास और शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी, रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट, आवास और शहरी कार्य राज्य मंत्री कौशल किशोर, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल विपिन रावत (सीडीएस) और सशस्त्र बलों के प्रमुख शामिल रहे.
नए रक्षा कार्यालय परिसरों में सेना, नौसेना और वायु सेना सहित रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के लगभग 7,000 अधिकारी काम कर सकते हैं. PMO की तरफ से बताया गया था कि ये भवन आधुनिक होने के साथ-साथ सुरक्षित भी हैं. भवन संचालन के प्रबंधन के लिए एक एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र की स्थापना की गई है, जो दोनों भवनों की सुरक्षा और निगरानी करेगा.
नई तकनीक से 24-30 महीने जल्दी खत्म हो पाया काम
नए रक्षा कार्यालय परिसर काफी एडवांस हैं. इन इमारतों की एक खासयित यह भी है कि इनके निर्माण में नई और टिकाऊ निर्माण तकनीक, एलजीएसएफ (लाइट गेज स्टील फ्रेम) का इस्तेमाल हुआ है. इस तकनीक की वजह से पारंपरिक आरसीसी निर्माण की तुलना में निर्माण समय 24-30 महीने कम हो गया.