अविश्वास प्रस्ताव पर तीन दिन से जारी बहस में जिस घड़ी का इंतजार, वो आ गया है. पीएम मोदी ने अविश्वास प्रस्ताव पर अपना भाषण शुरू करते हुए कहा कि देश की जनता ने हमारी सरकार के प्रति बार बार जो विश्वास जताया है, मैं आज देश के कोटी-कोटी नागरिकों का आभार व्यक्त करने के लिए उपस्थित हुआ हूं. कहते हैं भगवान बहुत दयालु हैं और भगवान की मर्जी होती है कि वो किसी न किसी के माध्यम से अपनी इच्छा की पूर्ति करता है, किसी न किसी को माध्यम बनाता है. मैं इसे भगवान का आशिर्वाद मानता हू्ं कि ईश्वर ने विपक्ष को सुझाया और वो प्रस्ताव लेकर आए.
पीएम मोदी ने कहा कि 2018 में भी ये ईश्वर का ही आदेश था, जब विपक्ष के साथी अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए. उस समय भी मैंने कहा था कि अविश्वास प्रस्ताव हमारी सरकार का फ्लोर टेस्ट नहीं, बल्कि ये उन्हीं का फ्लोर टेस्ट है. हुआ भी वही. जब मतदान हुआ तो विपक्ष के पास जितने वोट थे, उतने वोट भी वो जमा नहीं कर पाए थे. इतना ही नहीं, जब हम सब जनता के पास गए तो जनता ने भी पूरी तकात के साथ इनके लिए नो कॉन्फिडेंस घोषित कर दिया और चुनाव में एनडीए को भी ज्यादा सीटें मिलीं और भाजपा को भी ज्यादा सीटें मिलीं. यानी एक तरह से विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव हमारे लिए शुभ होता है.
उन्होंने कहा कि मैं देख रहा हूं कि आपने (विपक्ष) तय कर लिया है कि एनडीए और बीजेपी 2024 के चुनाव में पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़कर भव्य विजय के साथ जनता के आशिर्वाद से वापस आएगी. विपक्ष के प्रस्ताव पर यहां तीन दिनों तक अलग-अलग विषयों पर काफी चर्चा हुई. अच्छा होता इस सत्र की शुरुआत के बाद से ही विपक्ष ने गंभीरता के साथ सदन की कार्यवाही में हिस्सा लिया होता. बीते दिनों हमारे दोनों सदन ने कई महत्वपूर्ण बिल यहां पारित किए हैं. ये ऐसे बिल थे, जो हमारे फिशरमैन के हक के लिए थे. इसका सबसे ज्यादा फायदा केरल के लोगों को होता. तो ऐसे बिल पर तो अच्छे ढंग से हिस्सा लेते, लेकिन राजनीति उन पर ऐसे हावी हो चुकी है, उनको फिशरमैन की चिंता नहीं है.
'इधर से सेंचुरी हो रही है उधर से नो-बॉल हो रहा है'
विपक्ष पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा कि विपक्ष के कुछ दलों के लिए उनके आचरण और उनके व्यवहार से उन्होंने सिद्ध कर दिया कि देश के ज्यादा उनके लिए दल है, देश से बड़ा दल है और देश से ज्यादा प्राथमिकता दल है. आपको गरीब की भूख की चिंता नहीं है, सत्ता की भूख आपके दिमाग पर सवार है. आपको देश के युवाओं की परावह नहीं है. आपको अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता है. आप (विपक्ष) झूठे हैं. इस अविश्वास प्रस्ताव पर आपने कैसी चर्चा की? आपके दरबारी भी बहुत दुखी हैं. ये हाल है आपका. मजा इस डिबेट का ये है कि फील्डिंग विपक्ष ने ऑर्गनाइज की, लेकिन चौके-छक्के इधर से लगे. विपक्ष नो कॉन्फिडेंस मोशन पर नो-बॉल करता जा रहा है. इधर से सेंचुरी हो रही है उधर से नो-बॉल हो रहा है.
पीएम ने कहा कि आप (विपक्ष) तैयारी करके क्यों नहीं आते? थोड़ी मेहनत कीजिए. मैंने आपको पांच साल का समय भी दिया. 2018 में कहा था कि 2023 में आना. पांच साल में भी नहीं कर पाए आप. क्या हाल है आपका. विपक्ष के हमारे साथियों को दिखास की, छपास की बहुत इच्छा रहती है, बहुत स्वाभाविक है. लेकिन आप ये मत भूलिए कि देश भी आपको भूल रहा है. आपके एक-एक शब्दों को देश गौर से सुन रहा है. लेकिन हर बार देश को आपने निराशा के सिवा कुछ नहीं दिया. विपक्ष के रवैया पर भी मैं कहूंगा, जिनके खुद के बही-खाते बिगड़े हुए हैं, वो भी हमसे हमारा हिसाब लिए फिरते हैं.
पीएम ने अधीर रंजन पर ली चुटकी
उन्होंने कहा कि इस अविश्वास प्रस्ताव में कुछ चीजें तो ऐसी विचित्र नजर आईं, जो न पहले कभी देखा है और न कल्पना की है. सबसे बड़े विपक्षी दलों के नेता को बोलने की सूची में नाम ही नहीं था. पिछले उदाहरण देखिए आप. 1999 वाजपेयी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया. शरद पवार साहब उस समय नेतृत्व कर रहे थे. उन्होंने डिबेट का नेतृत्व किया. 2023 में अटल जी की सरकार थी. सोनिया जी विपक्ष की नेता थीं. 2018 में खड़गे जी थे विपक्ष के नेता, उन्होंने विषय को आगे बढ़ाया. लेकिन इस बार अधीर बाबू का क्या हाल हो गया. उनकी पार्टी ने उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया. ये तो कल अमित भाई ने बहुत जिम्मेदारी के साथ कहा कि अच्छा नहीं लग रहा और आपकी (लोकसभा अध्यक्ष) उदारता थी कि उनका समय समाप्त हो गया था तो भी आपने उन्हें आज समय दिया. लेकिन गुड का गोबर कैसे करना है, उसमें ये माहिर हैं.
पीएम मोदी ने कहा कि मैं नहीं जानता हूं कि आखिर आपकी मजबूरी क्या है? क्यों अधीर बाबू को दरकिनार कर दिया गया. पता नहीं कलकत्ता से कोई फोन आया होगा. कांग्रेस बार-बार उनका अपमान करती है. कभी चुनावों के नाम पर उन्हें अस्थाई रूप से फ्लोर लीडर से हटा देते हैं. हम अधीर बाबू के प्रति अपनी पूरी संवेदना व्यक्त करते हैं.
'21वीं सदी के कालखंड का प्रभाव 1 हजार साल तक रहेगा'
उन्होंने कहा कि किसी भी देश के इतिहास में एक समय ऐसा आता है जब वो पुरानी बंदिशों को तोड़कर एक नई ऊर्चा के साथ, नए उमंग-सपनों और नए संक्लप के साथ आगे बढ़ने के लिए कदम उठा लेता है. 21वीं सदी का ये वो कालखंड है, जो भारत के लिए हर सपने सिद्ध करने का अवसर हमारे चरण में लाएगा. ये टाइम पीरियड बहुत अहम है. ये कालखंड को घड़ेगा, उसका प्रभाव हमारे देश पर आने वाले 1 हजार साल तक रहने वाला है. 140 करोड़ देशवासियों का पुरुषार्थ इस कालखंड में अपने पराक्रम से, अपनी शक्ति से जो करेगा, वो आने वाले 1 हजार साल की मजबूत नींव रखने वाला है. इसलिए इस कालखंड में हम सबका बहुत बड़ा दायित्व और जिम्मेदारी है. ऐसे समय में हम सबका एक ही फोकस होना चाहिए, देश का विकास, देश के लोगों के सपनों को पूरा करने का संकल्प और उसे सिद्धी तक ले जाने के लिए जी-जान से जुट जाना. यही समय की मांग है.
'युवाओं के सपनों को अवसर देना सभी की जिम्मेदारी'
पीएम मोदी ने कहा कि 2014 में 30 साल के बाद देश की जनता ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई और 2019 में भी उस ट्रैक रिकॉर्ड को देखकर उनके सपनों को संजोने का सामर्थ्य कहां है, उनके संकल्पों को सिद्ध करने की ताकत कहां पड़ी है, देश भली-भांति जान गया और इसलिए 2019 में फिर एक बार हम सबको सेवा करने का मौका दिया और अधिक मजबूत के साथ दिया. इस सदन में बैठे हुए प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वो भारत के युवाओं के सपनों को, उनकी महत्वकांक्षा के मुताबिक वो जो काम काम करना चाहता था, उनको वो अवसर दें. सरकार में रहते हुए हमने भी उस दायित्व को निभाने का काम किया है.
'कुछ चाहते हैं हमारी साख को दाग लग जाए'
उन्होंने कहा कि हमने भारत के युवाओं को घोटालों से रहित सरकार दी है. हमने भारत के युवाओं को, आर्ट के प्रोफेशनल्स को खुले आसमान में उड़ने के लिए हौंसला दिया है, जो आसान नहीं था. हमने दुनिया में भारत की बिगड़ी हुई साख को भी संभाला और उसे फिर एक बार नई ऊंचाइयों पर लेकर गए हैं. अभी भी कुछ लोग कोशिश कर रहे हैं कि दुनिया में हमारी साख को दाग लग गए, लेकिन दुनिया देश को जान चुकी है, दुनिया के भविष्य में भारत किस तरह से योगदान दे सकता है, ये विश्व का विश्वास बढ़ता चला जा रहा है.
'विपक्ष का व्यवहार शुतुरमुर्ग जैसा हो गया है'
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की तरक्की की सच्चाई दुनिया को दूर से दिख रही है, विपक्ष को यहां रहते हुए नहीं दिख रही. क्योंकि अविश्वास और घमंड इन रगों में रच बस गया है. विपक्ष का व्यवहार शुतुरमुर्ग जैसा हो गया है. इसके लिए देश कुछ नहीं कर सकता. मोदी ने कहा कि जब भी घर में कुछ अच्छा होता है तो काला टीका लगाया जाता है. आज देश की जो वाह वाही हो रही है, आपने संसद में काले कपड़े पहनकर देश को काला टीका लगाने का काम किया है.
मोदी तेरी कब्र खुदेगी...विपक्ष का फेवरेट नारा
मोदी ने कहा विपक्षी पार्टियां उनको दिन-रात कोसती हैं. उनका फेवरेट डायलॉग है कि मोदी तेरी कब्र खुदेगी. लेकिन मैं इनके अपशब्दों को अपना टॉनिक बना लेता हूं.
मोदी ने तीन उदाहरण से बताया विपक्ष का 'सीक्रेट वरदान'
मोदी ने आगे कहा कि मेरा मानना है कि विपक्ष को एक वरदान मिला है, कि ये लोग जिसका बुरा चाहेंगे उसका भला होगा. एक उदाहरण तो मैं हूं. मेरे खिलाफ क्या क्या किया गया लेकिन मैं बड़ा ही होता गया.
विपक्ष ने कहा था कि बैंकिंग सेक्टर बर्बाद हो जाएगा. विदेश से विद्वान लाकर ऐसा बुलवाया गया. लेकिन जब इन्होंने बैंकों का बुरा चाहा तब पब्लिक सेक्टर बैंक का नेट प्रॉफिट दो गुना से ज्यादा हो गया.
विपक्ष ने फोन बैंकिंग घोटाले की बात की थी. इसके कारण देश को NPA के गंभीर संकट में डुबो दिया था. लेकिन उन्होंने जो NPA का अंबार लगाया था, उसे पार करके हम आगे निकल चुके हैं.
दूसरा उदाहरण हमारे डिफेंस के हेलिकॉप्टर बनाने वाले सरकारी कंपनी HAL से जुड़ी है. इसके लिए भली-बुरी बातें कही गईं. दुनिया में इसकी छवि बिगाड़ने कीकोशिश हुई. कहा गया कि HAL बर्बाद-तबाह हो गया है. इतना ही नहीं जैसे आजकल खेतों में जाकर वीडियो शूट होता है (राहुल पर तंज), वैसा ही उस समय HAL फैक्ट्री के दरवाजे पर मजदूरों की सभा कर वीडियो शूट किया गया था. कामगारों को भड़काया गया कि आपका अब कोई भविष्य नहीं है. इसका बुरा चाहा लेकिन आज HAL आज नई बुलंदी छू रहा है. HAL ने अपना अब तक का सबसे ज्यादा रेवेन्यू रजिस्टर किया है.
तीसरा उदाहरण LIC का है. कहा गया कि LIC डूब रहा है. गरीब का पैसा कहां जाएगा. लेकिन आज LIC लगातार मजबूत हो रही है. शेयर मार्केट में रुचि रखने वालों को ये गुरुमंत्र है कि जिस सरकारी कंपनी को विपक्ष गाली दे, उसमें दांव लगा दीजिए सब अच्छा होगा.
मोदी ने आगे कहा कि तीसरे टर्म (2024 लोकसभा चुनाव) में भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाएंगे.
'जब आप 2028 में अविश्वास प्रस्ताव लाएंगे...'
मोदी ने आगे तंज कसते हुए कि देश का विश्वास है कि 2028 में जब आप अविश्वास प्रस्ताव लेकर आएंगे तो देश तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा.
विपक्ष को भारत की सेना नहीं दुश्मन के दावों पर भरोसा'
मोदी ने कहा कि हमारी सरकार जो भी योजना लाई उसका कांग्रेस और सहयोगी पार्टियों ने मजाक उड़ाया. मोदी बोले कि कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों को भारत और उसके सामर्थ्य पर कभी भरोसा नहीं रहा. जैसे पाकिस्तान सीमा पर हमले करता था. आतंकवादी भेजता था और सब करके मुकर जाता था. कांग्रेस को पाकिस्तान से ऐसा प्रेम था कि उसकी बात पर भरोसा हो जाता था. कांग्रेस को कश्मीर के आम लोगों पर नहीं हुर्रियत पर विश्वास था. भारत ने आतंकवाद पर सर्जिकल और एयर स्ट्राइक लेकिन इनको भारत की सेना नहीं दुश्मन के दावों पर भरोसा था. आज कोई भी भारत के लिए अपशब्द बोलता है तो इनको उसपर तुरंत विश्वास हो जाता है. इनको भारत को बदनाम करने में मजा आता है. कांग्रेस को भारत की कोरोना वैक्सीन पर भी विश्वास नहीं था. मोदी ने आगे कहा कि अब देश की जनता को कांग्रेस में अविश्वास है, उसपर भरोसा नहीं है.
संसद में नारेबाजी शुरू, पीएम ने INDIA पर कसा तंज
मोदी के भाषण के बीच विपक्ष ने नारेबाजी शुरू की. कहा गया कि वे लोग चाहते हैं कि मोदी मणिपुर पर बयान दें.
इस बीच मोदी बोले कि मैं विपक्ष के साथियों के प्रति संवेदना व्यक्त करना चाहता हूं. आपने अभी बेंगलुरु में करीब दो दशक पुराने UPA का क्रियाक्रम, अंतिम संस्कार किया है. लेकिन साथ में जश्न भी मना रहे थे. यह खंडहर पर नया प्लास्टर लगाने जैसा था. दशकों पुरानी खटारा गाड़ी को इलेक्ट्रिक व्हीकल दिखाने की कोशिश हुई. कांग्रेस के सहयोगी दल और अटूट के साथी तमिलनाडु सरकार में एक मंत्री दो दिन पहले ही ये कहते हैं कि 'INDIA' उनके लिए कोई मायने नहीं रखता. उनके मुताबिक तमिलनाडु तो भारत में है ही नहीं. आज मैं गर्व के साथ कहना चाहता हूं कि तमिलनाडु वो प्रदेश है जहां हमेश देशभक्ति की धारा निकली हैं. जिस राज्य ने हमें राजा दिए, जिस राज्य ने हमें अब्दुल कलाम दिए, आज उस तमिलनाडु से ये सब सुनाई दे रहे हैं. जब आपके गठबंधन के अंदर ही ऐसे लोग हों, जो अपने देश के अस्तित्व को नकारते हों तो आपकी गाड़ी कहां जाकर रुकेगी, जरा आत्मचिंतन करने का मौका मिले तो जरूर कीजिएगा.
'कांग्रेस ने अपने नाम से योजनाएं चलाईं'
पीएम ने आगे कहा कि नाम को लेकर उनका ये चश्मा आज का नहीं है. ये दशकों पुराना चश्मा है. इन्हें लगता है कि नाम बदलकर देश पर राज कर लेंगे. गरीब को चारों तरफ उनका नाम तो नजर आता है, लेकिन उनका काम कहीं नजर नहीं आता है. अस्पतालों में नाम उनके हैं, इलाज नहीं है. सड़क हो, पार्क हो, गरीब कल्याण योजना, खेल पुरस्कारों पर, एयरपोर्ट-म्यूजियम पर उनका नाम. अपने नाम से योजना चलाईं, फिर उन योजनाओं में हजारों करोड़ों को भ्रष्टाचार हुए.
'कांग्रेस की पहचान से जुड़ी कोई चीज अपनी नहीं'
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पहचान से जुड़ी कोई चीज उनकी अपनी नहीं है. चुनाव चिह्न से लेकर विचारों तक, सबकुछ कांग्रेस अपना होने का दावा करते ही, वो किसी और से लिया हुआ है. अपनी कमियों को ढकने के लिए चुनाव चिह्न और विचारों को भी चुरा लिया. फिर भी जो बदलाव हुए हैं उसमें पार्टी का घमंड ही दिखता है. ये भी दिखता है कि 2014 से वो किस तरह के डिनायल के मोड में हैं. पार्टी के संस्थापक कौन, एओ ह्यूम, जो एक विदेशी थी, जिन्होंने पार्टी बनाई. 1920 में भारत के स्वतंत्रता संग्राम को एक नई ऊर्चा मिली और नया ध्वज मिला. रातोरात कांग्रेस ने उस ध्वज को चुरा लिया और अपना प्रतीक बना लिया.
'कांग्रेस को दरबारवाद पसंद है'
पीएम मोदी ने कहा कि ये देश में परिवारवाद की राजनीति का सबसे बड़ा प्रतिबिंब है. हमारे संविधान निर्माताओं ने हमेशा परिवारवादी राजनीति का विरोध किया. सभी ने परिवारवाद की खुलकर आलोचना की. क्योंकि परिवारवाद का नुकसान देश के सामान्य नागरिक को उठाना पड़ता है. कांग्रेस को परिवारवाद पसंद है. कांग्रेस को दरबारवाद पसंद है. जो परिवार से बाहर है, उनके लिए भी यही है कि जबतक आप इस महफिल में दरबारी नहीं बनोगे तो आपका भी कोई भविष्य नहीं है. यही इनकी कार्यशैली रही है. कांग्रेस ने जी-जान लगाकर भीमराव अंबेडकर को दो बार हरवाया. ये लोग बाबा भीमराव अंबेडकर के कपड़ों का मजाक उड़ाते थे. दरबारवाद के कारण देश के महान लोगों के अधिकारों को इन्होंने हमेशा-हमेशा के लिए तबाह कर दिया.
'ये INDIA नहीं घमंडिया गठबंधन, हर कोई दूल्हा बनना चाहता है...'
पीएम ने कहा कि ये इंडिया गठबंधन नहीं, घमंडिया गठबंधन. इसकी बारात में हर कोई दूल्हा बनना चाहता है. हर कोई पीएम बनना चाहता है. इस गठबंधन ने ये भी नहीं सोचा कि किस राज्य में आपका किससे कैसा कनेक्शन है.
बंगाल में आप TMC और कम्यूनिस्ट पार्टी के खिलाफ हैं. दिल्ली में साथ हो गए. केरल के वायनाड में जिन लोगों ने कांग्रेस के दफ्तर में तोड़फोड़ की, उसके साथ दिल्ली में इन्होंने हाथ मिला लिया. बाहर से लेबल तो बदल लेंगे लेकिन पुराने पापों का क्या होगा. आप जनता से ये पाप नहीं छिपा सकते. अभी हालात ऐसे हैं तो हाथों में हाथ हैं, जहां हालात बदले तो छुरियां निकल जाएंगी.
राहुल गांधी के लंका जलाने वाले बयान पर पलटवार
पीएम मोदी ने राहुल गांधी द्वारा बुधवार को दिए गए लंका जलाने वाले बयान पर कहा कि कुछ बुरा बोलने के इरादे से भी जब कोशिश होती है तो कुछ न कुछ सच भी निकल जाता है. लंका हनुमान ने नहीं जलाई, घमंड ने जलाई. ये बिल्कुल सच है. जनता भी भगवान राम के रूपी है. इसलिए ये 400 से 40 हो गए हैं. सच्चाई तो ये है देश की जनता ने दो-दो बार 30 साल के बाद पूर्ण बहुमत की सरकार दी. लेकिन गरीब का बेटा यहां कैसे बैठ गया. ये चुभन अभी भी आपको सोने नहीं देती है. 2024 में भी देश की जनता आपको सोने नहीं देगी. कभी इनके जन्मदिन पर हवाई जहाज में केक काटे जाते थे. आज उस हवाई जहाज में गरीब के लिए वैक्सीन जाता है. ये फर्क है. एक जमाना था, कभी ड्राइक्लीन के लिए कपड़े हवाई जहाज से आते थे. आज गरीब हवाई चप्पल वाला हवाई जहाज में सफर करता है. '
'पीएम मोदी ने राहुल को बताया फेल प्रोजेक्ट...'
मोदी ने आगे कहा कि कल यहां दिल से बात करने की बात कही. उनके दिमाग के हाल को देश ने देखा था. अब उनके दिल का हाल भी देख लिया. इनका मोदी प्रेम भी जबरदस्त है. इनके सपने में भी मोदी आता है. अगर मोदी भाषण करते वक्त पानी पिए तो सीना तानकर कहेंगे कि देखिए मोदी को पानी पिला दिया. अगर में कड़ी धूप में जनता दर्शन को जाऊं तो कहेंगे देखिए मोदी को पसीना ला दिया. एक पंक्ति है डूबने वाले को तिनके का सहारा बहुत. दिन बहल जाए इतना इशारा ही बहुत. इतने पर भी गिर जाए बिजली तो कोई बतला दे डूबता फिर क्या करे. कांग्रेस बरसों से एक ही फेल प्रोजेक्ट को बार बार लॉन्च करती है. लेकिन वह फेल हो जाता है. इसका नतीजा ये हुआ कि जनता के प्रति उनकी नफरत सातवें आसमान पर है. उनके पीआर वाले प्रचार करते हैं कि मोहब्बत की दुकान का. लेकिन देश की जनता कह रही है कि ये लूट की दुकान और बाजार है. इसमें नफरत, घोटाले और तुष्टिकरण है. इस दुकान ने इमरजेंसी, बंटवारा, सिखों पर अत्याचार बेचा, इतिहास बेचा है. शर्म करो नफरत की दुकान वालों तुमने सेना का स्वाभिमान बेचा है.
मोदी ने आगे कहा कि जिन लोगों ने गमले में मूली नहीं उगाई वो खेतों को देखकर तो हैरान होंगे ही.
मणिपुर के हालातों पर बोले पीएम मोदी
मोदी के भाषण के बीच विपक्षी नेताओं ने सदन से वॉकआउट किया. उनका कहना था कि मोदी मणिपुर पर नहीं बोल रहे हैं. इसके बाद मोदी ने कहा कि लोकतंत्र में जिनका भरोसा नहीं होता है वो सुनाने को तैयार होते हैं लेकिन सुनने को तैयार नहीं होते. वे झूठ फैलाकर भाग जाते हैं. इसके बाद मोदी ने मणिपुर पर बात की. वह बोले कि अगर विपक्ष ने गृह मंत्री की चर्चा पर सहमति जताई होती तो लंबी चर्चा हो सकती थी. विपक्षी पार्टियां अविश्वास प्रस्ताव पर सभी विषयों पर बोले, हमारा भी दायित्व बनता है कि देश के विश्वास को प्रकट करें और सब चीजों के बारे में बताएं. अगर सिर्फ मणिपुर पर चर्चा की बात थी गृहमंत्री ने पत्र लिखकर कहा था लेकिन विपक्ष का इरादा चर्चा का नहीं था. इनके पेट में दर्द था लेकिन फोड़ सिर रहे थे.
मोदी ने आगे कहा कि मणिपुर की स्थिति पर गृह मंत्री ने विस्तार से बताया था. लेकिन विपक्ष को राजनीति के सिवाय कुछ नहीं करना है. मणिपुर में एक अदालत का फैसला आया. उसके पक्ष-विपक्ष में परिस्थिति बनी और हिंसा का दौर शुरू हुआ. कई लोगों ने अपनों को खोया, महिलाओं के साथ अपराध हुआ. दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार काम कर रही है. देश भरोसा रखे, मणिपुर में शांति का सूरज जरूर उगेगा. मणिपुर के लोगों से भी कहना चाहता हूं कि देश आपके साथ है, हम आपके साथ हैं.
पीएम मोदी ने किया कच्चतीवु का जिक्र
मोदी ने कहा कि विपक्ष के नेताओं को बताना चाहिए कि कच्चतीवु क्या है. DMK वाले, उनके सीएम मुझे पत्र लिखकर कहते हैं कि कच्चतीवु वापस ले आएं. तमिलनाडु से आगे, श्रीलंका से पहले एक टापू किसने दूसरे देश को दिया था. क्या वो भारत माता, मां भारती का अंग नहीं था. ये इंदिरा गांधी के नेतृत्व में हुआ था. कांग्रेस का इतिहास मां भारती को छिन्न भिन्न करने का था.
पीएम मोदी ने किया तीन घटनाओं का जिक्र
विपक्षी दलों ने कहा था कि मोदी ने नॉर्थ ईस्ट को देश का हिस्सा नहीं माना. इसपर पलटवार करते हुए मोदी ने तीन घटनाओं का जिक्र किया. मोदी ने कहा कि पांच मार्च 1966, कांग्रेस ने मिजोरम में असहाय नागरिकों पर अपनी वायुसेना से हमला करवाया था. क्या मिजोरम के लोग भारत के नागरिक नहीं थे, निर्दोष नागरिकों पर कांग्रेस ने हमला करवाया था. आज भी पांच मार्च को पूरा मिजोरम शोक मनाता है. कांग्रेस ने इस सच को छिपाया, कभी घाव भरने की कोशिश नहीं की. इस वक्त इंदिरा गांधी पीएम थीं. अकाल तख्त पर हमला सबको याद है, लेकिन ऐसे हमले पहले ही शुरू हो गए थे.
दूसरी घटना 1962 की है. वह खौफनाक प्रसारण याद है. देश पर चीन का हमला हो रहा था. लोगों को मदद की आस थी. ऐसी विकट घड़ी में पंडित नेहरू ने कहा था कि My Heart goes out to the People of Assam. नेहरू ने वहां के लोगों को भाग्य पर जीने के लिए छोड़ दिया था.
जो लोग अपने आप को लोहिया का वारिस करते हैं. लोहिया ने नेहरू पर आरोप लगाते हुए कहा था कि नेहरू जान बूझकर नॉर्थ ईस्ट का विकास नहीं कर रहे. उस जगह को हर तरह के विकास से वंचित रखा गया है. मोदी ने आगे कहा कि जहां पर एक-दो लोकसभा सीट होती थीं उनकी तरफ कांग्रेस का ध्यान नहीं रहा.
2028 में फिर कोशिश कीजिएगा- पीएम मोदी
मोदी बोले कि विपक्ष के साथियों की एक बात के लिए तारीफ करना चाहता हूं. वैसे वो सदन के नेता को नेता नहीं मानते. लेकिन मैं उनकी एक बात के लिए उनकी तारीफ करूंगा. सदन के नेता के नाते मैंने उनको एक काम दिया था.
मैंने कहा था कि 2023 में अविश्वास प्रस्ताव लेके आओ. वो लोग लेकर आए. मेरी बात मानी उन्होंने. लेकिन मुझे दुख इस बात का है कि उनको पांच साल मिले. थोड़ा अच्छा करते. थोड़ी तैयारी करते. ना मुद्दे खोज पाए. देश को इन्होंने निराश किया है. 2028 में फिर कोशिश कीजिएगा. जब 2028 में प्रस्ताव लेके आएं तो तैयारी करके आना. ऐसे घिसी-पिटी बातें लेकर मत आना, देश को लगे कि कम से कम आप विपक्ष के योग्य हो, आपने वो योग्यता भी खो दी.