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हुर्रियत दफ्तर में टेस्ट, हथियारों की ट्रेनिंग... जम्मू कश्मीर से PAK पढ़ने जाने वाले युवाओं का ऐसा हो रहा ब्रेनवॉश

जम्मू कश्मीर के युवा जो उच्च शिक्षा के लिए पाकिस्तान जाते थे, उनको प्रवेश परीक्षा के नाम पर वहां के हुर्रियत कार्यालय में प्रतिभा खोज परीक्षा में शामिल कराया जाता था. इसके बाद उनका ब्रेनवॉश कर हथियारों का प्रशिक्षण दिया जाता था.

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ब्रेनवॉश कर आतंकी बनाए जा रहे थे युवा (प्रतीकात्मक तस्वीर) ब्रेनवॉश कर आतंकी बनाए जा रहे थे युवा (प्रतीकात्मक तस्वीर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • स्लीपर सेल के रूप में होता था इस्तेमाल
  • वैध दस्तावेजों पर पाकिस्तान जाते थे युवा

जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के नए प्लान का खुलासा हुआ है. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने आतंक को स्थानीय आंदोलन के तौर पर प्रस्तुत करने के लिए नई टेक्निक अपनाई है. भारतीय एजेंसियों ने पड़ोसी देश के इस प्लान को डिकोड कर दिया है.

पिछले कुछ समय में सुरक्षाबलों ने घाटी में 17 कश्मीरी आतंकियों को मार गिराया है. ये सभी वैध यात्रा दस्तावेज पर पाकिस्तान गए थे और वापस आकर आतंकी के तौर पर सक्रिय हो गए जिन्हें घाटी में आतंक विरोधी अभियानों में मार गिराया गया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक जम्मू कश्मीर पुलिस की स्टेट इनवेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने एक हुर्रियत नेता और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है. इसमें कहा गया है कि ये पाकिस्तान के कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटें बेचने में संलिप्त थे और युवाओं का आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करते थे. अधिकारियों ने इसकी वजह बताते हुए कहा है कि इन युवाओं का पाकिस्तान में ब्रेनवॉश किया गया और हथियारों का भी प्रशिक्षण देने के साथ ही इनका मनी लॉन्ड्रिंग के लिए भी इस्तेमाल किया गया.

उच्च शिक्षा के लिए पाकिस्तान गए सैकड़ों छात्र

जम्मू कश्मीर के सैकड़ों छात्र हाल के कुछ साल में उच्च शिक्षा के लिए पाकिस्तान गए. इनमें से कई का ब्रेनवॉश किया गया और हथियारों का प्रशिक्षण देकर स्लीपर सेल में भर्ती किया गया था. ये युवा सीमा पार से आतंकी गतिविधियों का संचालन कर रहे आकाओं के साथ संवेदनशील जानकारियां साझा कर रहे थे. अधिकारियों के मुताबिक अलगाववादी युवकों को पाकिस्तान जाने के लिए यात्रा दस्तावेज का इंतजाम कराने और अन्य सुविधाओं के लिए हुर्रियत नेताओं से सिफारिशी पत्र भी लिखवाते थे.

हुर्रियत कार्यालय में होती थी परीक्षा

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, अधिकारियों ने ये भी कहा है कि युवाओं को पाकिस्तान स्थित हुर्रियत के कार्यालय में राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा (एनटीएस) में बैठाया जाता था. ऐसा इसलिए किया जा रहा था ताकि युवाओं को ये विश्वास हो जाए कि वे प्रवेश परीक्षा दे रहे हैं जिससे पाकिस्तान के प्रोफेशनल कॉलेजों में उनको प्रवेश मिल सकेगा. इस तरह की परीक्षा कश्मीरी अलगाववादियों और उनके रिश्तेदारों की मदद से आयोजित की जाती थी जो 1990 के दशक में हथियारों का प्रशिक्षण लेने पाकिस्तान गए और पीओके में ही बस गए.

टेस्ट के बाद दिया जाता था आतंकी प्रशिक्षण

हुर्रियत के कार्यालय में टेस्ट के बाद युवाओं का ब्रेनवॉश किए जाने की प्रक्रिया शुरू होती थी. ब्रेनवॉश करने के बाद उन्हें हथियारों के प्रशिक्षण के लिए ले जाया जाता और फिर घुसपैठ करने वाले आतंकियों के साथ पढ़ाई के मकसद से पाकिस्तान गए युवकों को भी जम्मू कश्मीर में धकेल दिया जाता था. अधिकारियों के मुताबिक कम से कम 17 ऐसे युवक नियंत्रण रेखा पर या किसी मुठभेड़ में मारे गए हैं जो वैध यात्रा दस्तावेज पर पाकिस्तान गए थे. माना ये जा रहा था कि ये युवक पाकिस्तान में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं.

पाकिस्तान से लौटे युवाओं पर सुरक्षा अधिकारियों की नजर

सुरक्षाबलों के अधिकारी अब अलर्ट मोड में हैं. सुरक्षा अधिकारी अब ऐसे युवाओं पर नजर रख रहे हैं जो कम अवधि के वीजा पर पाकिस्तान गए और वापसी के बाद एक तरह से गायब हो गए. अधिकारियों का मानना है कि सीमा पार से एक्टिव आतंकी समूहों के लिए ऐसे युवा हो सकता है कि स्लीपर सेल के रूप में कार्य कर रहे हों. गायब युवाओं में अधिकतर मध्यमवर्गीय परिवारों से हैं. अधिकारियों ने आशंका जताई कि ये युवा जम्मू कश्मीर में आतंक का नया चेहरा हो सकते हैं. अधिकारियों के मुताबिक हो सकता है कि ये युवा सीमा पार से गोला-बारूद आने की प्रतीक्षा कर रहे हों.

युवाओं को दी गई विस्फोटक बनाने की ट्रेनिंग

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों का मानना ​​​​है कि नए आतंकियों को छह हफ्ते का प्रशिक्षण दिया. खुफिया इनपुट के मुताबिक कुछ युवाओं को एक हफ्ते में ही आसानी से उपलब्ध विस्फोटक मैटेरियल का उपयोग करके विस्फोटक बनाने का मॉड्यूल दिया गया था. आतंकी संगठन नई भर्तियों में भी पूरी एहतियात बरत रहे हैं.

पाकिस्तान की डिग्री पर नहीं मिलेगा रोजगार

गौरतलब है कि हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने एक बयान जारी कर छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए पाकिस्तान की यात्रा नहीं करने की सलाह दी थी. इस संयुक्त बयान में ये भी कहा गया था कि पाकिस्तान की कोई भी डिग्री भारत में उच्च शिक्षा या रोजगार के लिए मान्य नहीं होगी.

 

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