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पाकिस्तानी PM इमरान खान की नापाक चाल, कश्मीर पर अपनी नीति में फिर किया बदलाव

अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार के बाद पाकिस्तान ने कश्मीर के लिए अपनी नीति में एक बार फिर से बदलाव किया है. आतंकी गतिविधियों के लिए दुनियाभर में कुख्यात पाकिस्तान तालिबान के शासन के बाद कश्मीर में अपने फायदे की ओर देख रहा है.

इमरान खान और जम्मू कश्मीर के सुरक्षा बल इमरान खान और जम्मू कश्मीर के सुरक्षा बल
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कश्मीर के लिए पाकिस्तान ने फिर बदली नीति
  • हाल ही में आईएसआई चीफ ने की थी कई देशों संग बैठक

अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार के बाद पाकिस्तान ने कश्मीर के लिए अपनी नीति में एक बार फिर से बदलाव किया है. आतंकी गतिविधियों के लिए दुनियाभर में कुख्यात पाकिस्तान और उसके प्रधानमंत्री इमरान खान तालिबान के शासन के बाद कश्मीर में अपने फायदे की ओर देख रहे हैं.

हाल ही में पाकिस्तानी आईएसआई चीफ फैज हमीद ने अफगानिस्तान के मुद्दे पर रूस, चीन, ईरान, ताजिकिस्तान समेत कई देशों के खुफिया विभाग के प्रमुखों के साथ एक अहम बैठक की थी और नई अंतरिम तालिबान सरकार को लेकर ब्रीफ किया था. इन सबके बीच, प्रमुख अधिकारियों का मानना है कि जल्द ही पाकिस्तान एक बार फिर से कश्मीर पर ध्यान केंद्रित करेगा और इसके संकेत जमीन पर मिलने लगे हैं. 

हुर्रियत प्रमुख के रूप में मसरत आलम की नियुक्ति

मसरत आलम को हाल ही में ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (एपीएचसी) का प्रमुख बनाया गया, जबकि विरोधी उसका विरोध भी कर रहे थे. खुफिया एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि शब्बीर शाह, जो सलाखों के पीछे है, को एपीएचसी जी गुट के उपाध्यक्ष के रूप में नामित किया गया.

इस बीच यह एपीएचसी के नरमपंथी धड़े के लिए संकेत है कि पाकिस्तान को केवल कट्टरपंथियों की जरूरत है, जो एक मजबूत भारत विरोधी रुख अपना सकें. सूत्रों ने कहा कि गुरुवार को इस बारे में एक बैठक हुई थी, लेकिन निर्णय में कोई बदलाव नहीं हुआ.

आलम साल 2017 से ही एनआईए द्वारा की जा रही टेरर फंडिंग केस में तिहाड़ जेल में बंद है. आलम पर तीन दर्जन से ज्यादा एफआईआर, 20 डिटेंशन के तहत प्यूबिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) दर्ज हैं. उसने साल 2010 से ही कश्मीर घाटी में अशांति पैदा करने के लिए कई बार पथराव करने वालों की भीड़ जुटाई.

गिलानी की अंत्येष्टि और कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करना

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी, एनएसए मोईद यूसुफ और मानवाधिकार मंत्री शिरीन मजारी ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और भारत के खिलाफ 131 पेज का डोजियर जारी किया और दावा किया कि ये 'आईएसआईएस आतंकी शिविर' पांच शहरों में संचालित होते हैं.

पाक ने भारत पर 'कश्मीरियों के स्वतंत्रता संग्राम को बदनाम करने' के लिए कई शहरों में 'आईएसआईएस के आतंकी शिविरों की मेजबानी करने और चलाने' का झूठा आरोप लगाया है. कुरैशी ने कहा कि कश्मीरी अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी की मौत के बाद भारत की कथित कार्रवाइयों और उनके परिवार के साथ उनके व्यवहार को देखते हुए डोजियर तैयार किया गया था. गिलानी ने 1 सितंबर को अंतिम सांस ली थी और जम्मू कश्मीर पुलिस ने बाद में एक वीडियो जारी किया जिसमें इस्लामिक रीति-रिवाजों के अनुसार उन्हें दफनाया गया था.

आतंकी हमलों और ड्रोन अटैक्स में बढ़ोतरी

कश्मीर घाटी में पिछले कुछ समय में आतंकी गतिविधियों में इजाफा हुआ है. बीते दिन ही पुराने श्रीनगर इलाके में सब-इंस्पेक्टर अरशीद अहमद को आतंकी ने पीठ पीछे से गोलियां बरसा कर शहीद कर दिया.

आतंकी संगठन इस समय पॉलिटिकल वर्कर्स और पुलिसकर्मियों पर फोकस कर रहे हैं. पिस्तौल की जगह एके-47 ने ले ली है. वहीं, इसके अलावा, ड्रोन से हमलों का भी चलन हाल के समय में बढ़ा है और कई ड्रोन्स को बीएसएफ के जवानों  ने अपने कब्जे में लिया है.

वहीं, जम्मू-कश्मीर पुलिस का कहना है कि श्रीनगर में आतंकवादियों की संख्या नौ से घटकर तीन हो गई है, जिसमें छह आतंकवादी मारे गए हैं. इंटेलिजेंस ग्रिड का कहना है कि यह संख्या दो दर्जन तक हो सकती है.

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हाल ही में एक बैठक हुई थी, जिसमें डीजीपी दिलबाग सिंह ने सुरक्षा की स्थिति पर जानकारी दी थी. उधर, सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि अफगानिस्तान में तालिबान का फिर से उदय और आईएसआई के साथ उनका मेलजोल वाकई में चिंतित करने वाला है.

 

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