scorecardresearch
 

भारत और पाक के बीच वो कौन-सा विवाद है, जिसके लिए दिल्ली आ रहा 5 सदस्यों का दल

सिंधु जल समझौते के तहत भारत को पाकिस्तान के हिस्से वाली नदियों के जल का इस्तेमाल सिंचाई, परिवहन और बिजली उत्‍पादन में करने की अनुमति है.

Advertisement
X
फाइल फोटो
फाइल फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सिंधु जल विवाद पर बात करने आ रहा है पाक डेलीगेशन
  • 1960 में हुआ था भारत-पाक समझौता

पाकिस्तान से पांच सदस्यीय डेलीगेशन सिंधु जल विवाद को लेकर बातचीत करने के लिए भारत आ रहा है. यह बातचीत 30-31 मई को नई दिल्ली में हो सकती है. ये डेलीगेशन वाघा बॉर्डर के रास्ते से भारत आएगा. 
पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त सैयद मोहम्मद मेहर अली शाह ने बताया पाक अखबार 'डॉन' को बताया कि इस बैठक में  वार्षिक रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी. इसके अलावा पाकल डल और लोअर कलनई बांध की यात्रा नही की जाएगी, लेकिन अन्य परियोजनाओं पर चर्चा की जाएगी.

जल विवाद भी है बड़ा मुद्दा 

भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद के विभिन्न मुद्दों में पानी एक बड़ा मुद्दा है. यह मुद्दा इतना महत्वपूर्ण है कि दोनों देशों के बीच युद्ध हो जाने के बाद भी सिंधु समझौता तोड़ा नहीं गया. हालांकि 2008 मुंबई हमले और 2019 में जब धारा 370 हटाई गई तो इस समझौते को तोड़ने की मांग भी की गई, लेकिन इसको तोड़ना आसान नहीं है. 

11 लाख किमी में फैला है सिंधु का इलाका 

सिंधु नदी का इलाका करीब 11.2 लाख किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है. ये इलाका पाकिस्तान में 47 फीसदी, भारत में 39 फीसदी, चीन में 8 फीसदी और अफगानिस्तान में 6 फीसदी है. एक आंकड़े के मुताबिक करीब 30 करोड़ लोग सिंधु नदी के आसपास के इलाकों में रहते हैं. 

सिंधु जल समझौते की प्रमुख बातें 

Advertisement

1. साल 1960 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान ने कराची में सिंधु जल समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. 
2. इसमें सिंधु की सहायक नदियों को पूर्वी और पश्चिमी नदियों में बांटा गया. सतलज, ब्यास और रावी नदियों को पूर्वी और झेलम, चेनाब और सिंधु को पश्चिमी नदी बताया गया.
3. पूर्वी नदियों का पानी, कुछ अपवादों को छोड़े दें तो भारत बिना रोकटोक के इस्तेमाल कर सकता है. पश्चिमी नदियों का पानी पाकिस्तान के लिए होगा, लेकिन समझौते के भीतर इन नदियों के पानी का कुछ सीमित इस्तेमाल का अधिकार भारत को दिया गया. 
4. इस समझौते में एक स्थायी सिंधु आयोग की स्थापना हुई. इसमें दोनों देशों के कमिश्नरों के मिलने का प्रस्ताव था. ये कमिश्नर हर कुछ वक्त में एक दूसरे से मिलेंगे.
5. अगर कोई देश किसी प्रोजेक्ट पर काम करता है और दूसरे देश को उस पर आपत्ति है तो दूसरा देश उसका जवाब देगा. इसके बाद दोनों पक्षों की बैठकें होंगी. अगर आयोग समस्या का निकाल पाता है तो सरकारें सुलझाने की कोशिश करेंगी.
6.इसके अलावा समझौते में विवादों का हल ढूंढने के लिए विशेषज्ञ की मदद लेने या कोर्ट ऑफ आर्ब्रिट्रेशन में जाने का भी रास्ता है.

तुलबुल परियोजना का विरोध 

Advertisement

भारत ने 1987 में पाकिस्तान के विरोध के बाद झेलम नदी पर तुलबुल परियोजना का काम रोक दिया था. इसे लेकर पाकिस्तान कई बार बाधाएं अटका चुका है. यह विवाद अंतरराष्ट्रीय पंचाट में विश्व बैंक के पास जा चुका है. हालांकि भारत के ऐतराज के बाद विश्व बैंक ने कदम पीछे खींच लिए थे. 

क्या है संधु समझौते पर विवाद? 

सिंधु घाटी समझौते के तहत भारत को पाकिस्तान के हिस्से वाली नदियों के जल का इस्तेमाल सिंचाई, परिवहन और बिजली उत्‍पादन में करने की अनुमति है. भारत इस समझौते के मुताबिक, सिंधु नदी के पानी का केवल 20 फीसदी ही इस्तेमाल करता है. हालांकि इसके विवाद की मुख्य वजह यही है कि यह संधि जब हुई थी, उस समय पाकिस्तान के साथ भारत का कोई युद्ध नहीं हुआ था और अब वो सीमापार से लगातार आतंकियों की भारत में घुसपैठ करा रहा है. 
 

 

Advertisement
Advertisement