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पाकिस्तान की जेल से 20 भारतीय मछुआरों की रिहाई, वाघा बॉर्डर पर छोड़ा जाएगा

पाकिस्तान के कराची स्थित मलिर जेल से 20 भारतीय मछुआरों को रविवार को रिहा किया जाएगा. ये मछुआरे 24 जनवरी को वाघा-अटारी बॉर्डर पहुंचेंगे. रिहा लोगों को भारतीय अधिकारियों के सुपुर्द किया जाएगा.

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रिहा मछुआरों को वाघा-अटारी बॉर्डर पर छोड़ा जाएगा. (फाइल फोटो) रिहा मछुआरों को वाघा-अटारी बॉर्डर पर छोड़ा जाएगा. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 23 जनवरी को होगी मछुआरों की रिहाई
  • 24 जनवरी को वाघा बॉर्डर पहुंचेंगे

पाकिस्तान की मलिर कराची जिला जेल से 20 भारतीय मछुआरों की रिहाई होने जा रही है. 23 जनवरी को जेल से रिहा मछुआरों को अगले दिन 24 जनवरी को वाघा-अटारी बॉर्डर पर भारतीय अधिकारियों को सौंपने के लिए ला जाएगा.

मछुआरों को पाकिस्तान की समुद्री सीमा का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. उनके खिलाफ विदेशी कानून और मत्स्याखेट कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था.  इनमें से कुछ मछुआरों की सजा कुछ माह पहले पूरी हो चुकी है.

 इन मछुआरों की पहचान सुनील, राजो, बाचीलाल, बाबू, विवेक, जयसिंह, दिनेश, कांबलापा भाव्येश, हरि, मनु, करसन, भगत, भावेश, नरेश, काना, गोपाल, अहमद, भीमा, भारत और धीरो के रूप में  की गई है. 

भारत ने नए साल पर पाकिस्तान से 356 भारतीय मछुआरों और 2 आम नागरिक कैदियों की रिहाई की मांग की, जिनकी नागरिकता की पहले ही पुष्टि हो गई थी. भारत ने दोनों देशों के बीच मछुआरों और आम नागरिक कैदियों की सूची के आदान-प्रदान के चलते आग्रह किया. दोनों देशों के बीच साल 2008 में हुए एक समझौते के तहत हर वर्ष 1 जनवरी और 1 जुलाई को ऐसा किया जाता है.

दरअसल, अरब सागर में भारत और पाकिस्तान के जल क्षेत्र की स्पष्ट विभाजक रेखा नहीं है जिसकी वजह से कई बार भारतीय मछुआरे भूलवश पाकिस्तानी जल क्षेत्र में चले जाते हैं. गिरफ्तार मछुआरे कई बार सजा पूरी होने के बाद भी महीनों तक जेल में कैद रहते हैं.
 

 

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