देश में NEET-UG पेपर लीक मामले की खूब चर्चा है. इसमें रोज नए खुलासे हो रहे हैं. बुधवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में एक अहम फैसला सुनाया. दरअसल, सीबीआई ने हिरासत खत्म होने पर आरोपियों को कोर्ट में पेश किया था. कोर्ट ने तुरंत बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने सुनवाई के बाद मामले के 5 आरोपियों को 2 जून तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. लेकिन, छठे आरोपी को लेकर कोर्ट में भारी बहस हुई. इसके बाद जज ने उस एक आरोपी पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. ऐसे में इस केस में आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की उम्मीद बढ़ गई है.
पहले बात करते हैं उन पांच लोगों की जिन्हें कोर्ट ने सीधे जेल का रास्ता दिखा दिया. इनके नाम मंगीलाल बिवाल, विकास बिवाल, दिनेश बिवाल, यश यादव और धनंजय लोखंडे हैं. इन सभी की पुलिस रिमांड खत्म हो चुकी थी. सीबीआई ने कोर्ट से कहा कि अब इन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया जाए. अदालत ने सीबीआई की बात मान ली और पांचों को 2 जून तक के लिए सलाखों के पीछे भेज दिया.
लेकिन असली पेंच अटका छठे आरोपी शुभम खैरनार पर. सीबीआई इस आरोपी को इतनी आसानी से छोड़ने के मूड में बिल्कुल नहीं है. जांच एजेंसी ने कोर्ट से मांग की कि शुभम की सीबीआई कस्टडी कुछ दिनों के लिए और बढ़ा दी जाए. इस पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपी शुभम खैरनार की CBI कस्टडी 5 दिन बढ़ा दी. ऐजेंसी का मानना है कि शुभम इस पूरे पर्चा लीक कांड की वो अहम कड़ी है, जो इस बड़ी साजिश के कई बड़े राज खोल सकता है.
पेपर लीक की साजिश में अब भी कई सवाल बाकी
अब आपके मन में सवाल आएगा कि आखिर सीबीआई शुभम के पीछे इस कदर क्यों पड़ी है? कोर्ट में सीबीआई ने खुद इसके बड़े कारण बताए. एजेंसी ने कहा कि अभी हमें इस बात का पता लगाना है कि इस धांधली में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. आखिर किन-किन लोगों ने ये पेपर खरीदे थे? इसके अलावा, पैसों के बड़े लेन-देन की जांच करनी भी अभी बाकी है. सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि इस पूरी महा-साजिश का पर्दाफाश करने के लिए शुभम को महाराष्ट्र ले जाना बहुत जरूरी है. वहां के सबूतों, गवाहों और इस केस से जुड़े दूसरे सह-आरोपियों से उसका आमना-सामना करवाया जाना है.
दूसरी तरफ, शुभम के वकील ने सीबीआई की इन दलीलों का कोर्ट में डटकर विरोध किया. वकील का कहना था कि जब शुभम के सारे मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पहले ही जब्त किए जा चुके हैं, और वो जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग भी कर रहा है, तो फिर उसे और दिनों तक कस्टडी में रखने का क्या तुक है? दोनों पक्षों की यह बहस सुनने के बाद अदालत ने फिलहाल शुभम की हिरासत बढ़ाने वाली सीबीआई की अर्जी पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है. इसी सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कोर्ट से मनीषा मंधारे और शिवराज मोटेगांवकर के हस्ताक्षर के नमूने लेने की अनुमति भी मांगी है. अब हर किसी की नजर कोर्ट के अगले आदेश पर टिकी है कि वह इस छठे आरोपी को लेकर क्या फैसला सुनाता है.