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NEET पेपर लीक का मल्टी-करोड़ नेटवर्क! CBI जांच में सामने आए मास्टरमाइंड, एक्सपर्ट और बिचौलियों के नाम

CBI की जांच में NEET-UG 2026 पेपर लीक का बड़ा नेटवर्क सामने आया है, जिसमें NTA से जुड़े एक्सपर्ट, कोचिंग संचालक और बिचौलिए शामिल बताए जा रहे हैं. एजेंसी ने केमिस्ट्री, बायोलॉजी और फिजिक्स पेपर लीक से जुड़े कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुणे, लातूर, दिल्ली और जयपुर समेत कई शहरों में छापेमारी हुई है. CBI अब पैसे के लेन-देन और पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की जांच कर रही है.

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CBI को पहला बड़ा ब्रेकथ्रू 15 मई को मिला, जब उसने पी.वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार किया. (File Photo- PTI)
CBI को पहला बड़ा ब्रेकथ्रू 15 मई को मिला, जब उसने पी.वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार किया. (File Photo- PTI)

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के कथित पेपर लीक मामले में CBI की जांच लगातार बड़े खुलासे कर रही है. जांच एजेंसी के अनुसार यह कोई साधारण पेपर लीक नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क था, जिसमें परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े एक्सपर्ट, कोचिंग संचालक, बिचौलिए और कई राज्यों में फैला एक मल्टी-करोड़ रैकेट शामिल था. 

CBI ने 15 मई से 22 मई के बीच की कार्रवाई में केमिस्ट्री, बायोलॉजी और फिजिक्स पेपर लीक से जुड़े कई अहम आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की है. एजेंसी का दावा है कि छात्रों को स्पेशल कोचिंग क्लास के नाम पर वही सवाल पढ़ाए गए, जो बाद में असली NEET परीक्षा में आए.

केमिस्ट्री पेपर लीक का ‘किंगपिन’

CBI को पहला बड़ा ब्रेकथ्रू 15 मई को मिला, जब उसने पी.वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार किया. एजेंसी ने कुलकर्णी को केमिस्ट्री पेपर लीक का किंगपिन बताया है. जांच में सामने आया कि कुलकर्णी NTA की ओर से परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ा एक केमिस्ट्री लेक्चरर था और उसे प्रश्नपत्रों तक पहुंच हासिल थी.

CBI के मुताबिक अप्रैल के अंतिम हफ्ते में कुलकर्णी ने सह-आरोपी मनीषा वाघमारे के जरिए छात्रों को इकट्ठा किया और पुणे स्थित अपने घर पर विशेष कोचिंग क्लास आयोजित की. इन क्लासों में कथित तौर पर छात्रों को सवाल, विकल्प और सही जवाब डिक्टेट कराए गए, जिन्हें छात्रों ने नोटबुक में लिखा. बाद में इन नोट्स का मिलान NEET-UG 2026 परीक्षा के असली पेपर से किया गया, जिसमें कई सवाल हूबहू मिले.

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एजेंसी का दावा है कि छात्रों से इन क्लासों में शामिल होने के लिए लाखों रुपये वसूले गए और कई बिचौलियों की पहचान की गई है.

बायोलॉजी पेपर लीक की दूसरी ‘मास्टरमाइंड’

16 मई को CBI ने पुणे की वरिष्ठ बॉटनी शिक्षिका मनीषा गुरुनाथ मंढारे को गिरफ्तार किया. एजेंसी ने उन्हें बायोलॉजी पेपर लीक की मास्टरमाइंड बताया. जांच के अनुसार मंढारे को NTA ने एक्सपर्ट नियुक्त किया था और उसे बॉटनी तथा जूलॉजी प्रश्नपत्रों तक सीधी पहुंच थी.

CBI का आरोप है कि मंढारे ने मनीषा वाघमारे के जरिए छात्रों को बुलाया और अपने घर पर क्लास ली, जहां उसने बॉटनी और जूलॉजी के सवाल छात्रों को बताए. छात्रों से सवाल नोट करवाए गए और किताबों में महत्वपूर्ण हिस्से मार्क कराए गए. बाद में इन सवालों का मिलान असली NEET पेपर से किया गया, जिसमें अधिकांश सवाल समान पाए गए.

कोचिंग संस्थान संचालक की एंट्री

18 मई को जांच का दायरा और बढ़ा, जब CBI ने लातूर स्थित RCC कॉचिंग इंस्टीट्यूट के मालिक प्रोफेसर शिवराज मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया. एजेंसी ने बताया कि मोटेगांवकर पी.वी. कुलकर्णी का करीबी था. CBI की छापेमारी में उसके संस्थान और घर से एक केमिस्ट्री प्रश्न बैंक बरामद हुआ, जिसमें मौजूद सवाल NEET परीक्षा में आए सवालों से मेल खाते थे. जांच एजेंसी के अनुसार छात्रों से लाखों रुपये लेकर उन्हें ऐसी स्पेशल क्लासों में भेजा जाता था, जहां संभावित सवाल पढ़ाए जाते थे.

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फिजिक्स पेपर लीक का स्रोत भी सामने आया

22 मई को CBI ने पुणे के सेठ हीरालाल सराफ प्रशाला में कार्यरत शिक्षिका मनीषा संजय हवलदार को गिरफ्तार किया. एजेंसी का दावा है कि वही फिजिक्स पेपर लीक की मुख्य स्रोत थी. जांच में सामने आया कि मनीषा हवलदार को भी NTA ने परीक्षा एक्सपर्ट के रूप में नियुक्त किया था और उसे फिजिक्स प्रश्नपत्रों तक पहुंच थी. आरोप है कि अप्रैल महीने में उसने कुछ फिजिक्स सवाल सह-आरोपी मनीषा मंढारे के साथ साझा किए थे. बाद में इन सवालों का मिलान NEET पेपर से किया गया और समानता पाई गई.

कई राज्यों तक फैला नेटवर्क

CBI ने यह मामला 12 मई को शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत पर दर्ज किया था. इसके बाद एजेंसी ने देशभर में कई राज्यों में छापेमारी और पूछताछ शुरू की. 15 मई तक जहां इस मामले में 7 गिरफ्तारियां हुई थीं, वहीं 22 मई तक यह संख्या बढ़कर 11 हो गई. गिरफ्तारियां दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे, लातूर और अहिल्यानगर से की गई हैं.

छापेमारी के दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक रिकॉर्ड और कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं. इनकी फॉरेंसिक जांच जारी है. अब CBI की जांच इस बात पर केंद्रित है कि इस पूरे रैकेट में पैसे का लेन-देन कैसे हुआ, किन छात्रों को फायदा पहुंचाया गया और क्या परीक्षा व्यवस्था के भीतर और भी लोग इस नेटवर्क में शामिल थे.

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