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ओडिशा के स्कूल में पढ़ाती थीं द्रौपदी मुर्मू, बर्थडे पर छात्रों को देती थीं चॉकलेट, आज भी याद करता है केयरटेकर 

रायरंगपुर के श्री अरबिंदो इंटेग्रेटेल एजुकेशन एंड रिसर्च में 1992 से केयरटेकर के रूप में काम कर रहे दिलीप गिरी एकमात्र मौजूदा स्टाफ हैं, जिन्होंने मुर्मू के साथ काम किया था. उन्होंने आजतक से बात करते हुए द्रौपदी मुर्मू के साथ अपनी यादें साझा कीं.

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द्रौपदी मुर्मू (फाइल फोटो) द्रौपदी मुर्मू (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • द्रौपदी मुर्मू ने तीन साल तक स्कूल में पढ़ाया
  • स्कूल के केयरटेकर ने साझा की यादें

एनडीए की ओर से झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया है. वो आज राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल करेंगी. उन्होंने कुछ समय ओडिशा का रायरंगपुर में एक स्कूल में पढ़ाया भी था. उस स्कूल के कर्मचारियों ने उन्हें याद करते हुए बताया कि वह उन्होंने यहां करीब तीन साल तक शिक्षिका के रूप में काम किया था. 

रायरंगपुर के श्री अरबिंदो इंटेग्रेटेल एजुकेशन एंड रिसर्च में 1992 से केयरटेकर के रूप में काम कर रहे दिलीप गिरी एकमात्र मौजूदा स्टाफ हैं, जिन्होंने मुर्मू के साथ काम किया था. उन्होंने आजतक से बात करते हुए द्रौपदी मुर्मू के साथ अपनी यादें साझा कीं. गिरी ने आजतक को बताया, "वह सभी के साथ सौहार्दपूर्ण थीं. चाहे वह टीचिंग स्टाफ हो या मेरे जैसे नॉन टीचिंग स्टाफ. मैं 1992 से एक केयरटेकर के रूप में काम कर रहा हूं." 

फाइल फोटो

1994 से 1997 तक पढ़ाया

द्रौपदी मुर्मू ने 1994 से 1997 के बीच इस स्कूल में एक शिक्षिका के रूप में काम किया. 1997 में उन्होंने अधिसूचित क्षेत्र परिषद में एक निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. एक शिक्षिका के रूप में उन्होंने प्राथमिक विद्यालय में अलग-अलग विषयों को पढ़ाया. 

फाइल फोटो

छात्रों को देती थीं चॉकलेट

गिरी ने द्रौपदी मुर्मू को याद किया, जो छात्रों को उनके जन्मदिन पर चॉकलेट देती थी और उन्हें भी एक बार दी थी. गिरी ने कहा, "वह छात्रों के लिए बहुत प्यारी थीं. छात्रों को उनके जन्मदिन पर चॉकलेट देती थीं. उन्होंने मुझे भी मेरे जन्मदिन 16 फरवरी को चॉकलेट भी दी थी." स्कूल के नॉन टीचिंग स्टाफ ने आगे कहा कि मुर्मू की बेटी भी इसी स्कूल में थी, लेकिन उन्होंने कभी उसके लिए कोई विशेष व्यवहार नहीं किया. गिरी ने बताया कि मुर्मू का व्यवहार सभी छात्रों के साथ एक जैसा था. वो अपनी बेटी और अन्य छात्रों के बीच अंतर नहीं करती थी. 

 

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