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मद्रास HC ने सरकार से मांगी कोरोना से होने वाली मौतों की सटीक रिपोर्ट

शुक्रवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से 28 जून तक राज्य में होने वाली कोविड से होने वाली मौतों पर एक प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है.

मद्रास हाई कोर्ट (फाइल फोटो) मद्रास हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मद्रास हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगी रिपोर्ट
  • कहा- सटीक रिपोर्ट से हो सकेगी जरुरतमंदों की मदद

मद्रास हाई कोर्ट ने राज्य से कोरोना से होने वाली मौतों पर रिपोर्ट मांगी है. कोर्ट का कहना है कि सटीक रिपोर्ट के जरिए उन लोगों की मदद की जा सकेगी जो राहत की उम्मीद कर रहे हैं. जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से 28 जून तक राज्य में होने वाली कोविड की मौतों पर एक प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है.

यहां हाई कोर्ट, एक शिकायत पर सुनवाई कर रहा था कि अस्पतालों में कई कोविड पॉजिटिव रोगियों की मौत को फेफड़े या हृदय रोग के चलते होने का कारण बताया गया है, न कि कोरोना और इसके कारण कई कोरोना पीड़ितों को आर्थिक राहत नहीं मिल पाई है.

मामले की सुनवाई कर रही अदालत ने कहा कि देश भर में कई शिकायतें हैं कि COVID-19 से होने वाली मौतों को ठीक से दर्ज नहीं किया जा रहा है. अदालत ने कहा कि केवल सटीक रिपोर्टिंग ही इस मामले में लोगों को राहत प्रदान करने में मदद करेगी. कोर्ट ने यह भी कहा कि हार्ट अटैक या अन्य कारणों को मौत का कारण नहीं होना चाहिए, लेकिन आग्रह किया है कि हार्ट अटैक का कारण अंतर्निहित स्थिति जो कि कोविड 19 है, का भी मौत के कारण में उल्लेख किया जाए. 

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अदालत ने कहा कि डॉक्टरों और इस संबंध में प्रशिक्षित व्यक्तियों से जुड़े क्षेत्र में जाने की कोशिश किए बिना, यह माना जा सकता है कि किसी व्यक्ति को होने वाली बड़ी बीमारी के परिणामस्वरूप अंततः दिल का दौरा पड़ सकता है और इसके चलते मृत्यु भी हो सकती है. कोर्ट ने कहा कि हालांकि ऐसे मामले में मौत का कारण उचित रूप से सिर्फ दिल का दौरा नहीं माना जा सकता है, लेकिन हार्ट अटैक होने के पीछे की वजह हो वास्तविक कारण माना जाना चाहिए.

अदालत ने कहा कि इससे न केवल पीड़ित परिवार को राहत मिलने में मदद मिलेगी बल्कि यह महामारी पर भविष्य के अध्ययन के लिए भी एक संदर्भ होगा. सटीक रिपोर्टिंग से भविष्य में इस प्रकार की महामारी से निपटने के लिए किए जा रहे अध्ययनों में मदद मिलेगी. वहीं अदालत का यह भी कहना है कि कुछ मामलों में चिंता यह है कि जिस व्यक्ति की मृत्यु कोविड-19 के कारण हुई है, लेकिन जब तक उसके मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत का कारण कोरोना नहीं लिखा होगा उसके परिवार को राहत नहीं मिल सकती है.
 

 

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