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आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक संघर्ष तेज करें ब्रिक्स देश: ओम बिरला

ओम बिरला ने कहा कि आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है. जनप्रतिनिधि होने के नाते सांसद इस खतरे के प्रति मूकदर्शक नहीं बने रह सकते. उन्हें आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुट होना चाहिए.

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ब्रिक्स देशों का अंतर संसदीय सम्मेलन
  • लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने दिया संबोधन
  • 'आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा'

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ब्रिक्स देशों के अंतर संसदीय सम्मेलन में संबोधन दिया. इस दौरान ओम बिरला ने कोरोना वायरस के कारण हुई मौतों पर दुख जताया. साथ ही स्वस्थ समाज, सतत् विकास के लिए वैश्विक सहयोग का आह्वान किया. इस सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और साउथ अफ्रीका की संसदों के अध्यक्ष हिस्सा ले रहे हैं.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को ब्रिक्स संसदीय फोरम की बैठक को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया. 'वैश्विक स्थिरता, जनसाधारण की सुरक्षा और प्रगतिशील विकास की दृष्टि से ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच भागीदारीः संसदीय आयाम' विषय पर आयोजित बैठक में बिरला ने ब्रिक्स के सदस्य देशों को आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक संघर्ष में तेजी लाने की बात कही.

बैठक में बिरला ने कहा कि आतंकवाद आज मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है. जनप्रतिनिधि होने के नाते सांसद इस खतरे के प्रति मूकदर्शक नहीं बने रह सकते. उन्हें आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुट होना चाहिए. उन्होंने इस पर बल दिया कि आतंकवाद से जुड़ी सभी गतिविधियों के लिए मिलने वाली धनराशि पर तत्काल रूप से रोक लगनी चाहिए.

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बिरला ने कहा कि आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के पनपने के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों पर ध्यान दिए जाने और उनका यथाशीघ्र समाधान किए जाने की आवश्यकता है. साथ ही ब्रिक्स देशों की संसदों को आतंकवाद को समाप्त करने संबंधी संधियों और समझौतों के समर्थन में अपने सामूहिक संकल्प को बल प्रदान करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मंचों का उपयोग करना चाहिए.

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण लाखों निर्दोष लोगों की दुःखद मृत्यु हुई है, गंभीर आर्थिक चुनौतियां पैदा हुई हैं और सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. यह ऐसा समय है जब वैश्विक एकता और सहयोग की सबसे अधिक आवश्यकता है. 

उन्होंने कहा कि हमें एक न्यायसंगत और भेदभाव-रहित विश्व जहां गरीबी, भुखमरी और बीमारी के लिए कोई स्थान न हो और जहां प्रत्येक मनुष्य को जन्म से ही समान अवसर प्राप्त हों, के लिए साझे प्रयास करने चाहिए. सदस्य देशों को यह भी सुनिश्चित करना है कि इस वैश्विक महामारी के कारण सतत् विकास लक्ष्य एजेंडा, 2030 को प्राप्त करने के मार्ग में कोई संकट पैदा न हो.

भारत में कमजोर वर्ग को सशक्त करने के प्रयास 

कोविड-19 के इस अप्रत्याशित संकट का सामना करने में भारत के अनुभवों और कार्यनीतियों को साझा करते हुए लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने यह कहा कि हमारी सरकार समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने, कृषि और कृषि से जुड़े व्यवसायों, एमएसएमई और अन्य उद्योगों को फिर से खड़ा करने की चुनौतियों का सामना करने के लिए 260 बिलियन डॉलर का आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज दे रही है.

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उन्होंने यह कहा कि 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' जैसी योजनाएं निर्धन लोगों, किसानों, शहरी कामकाजी वर्ग और मध्यम वर्ग का सशक्तिकरण करने में काफी सहायक होंगी. उन्होंने कहा कि भारत ने आधार, बैंक खाता और मोबाइल कनेक्शन के जरिए कमजोर वर्गों को नकद धनराशि का अंतरण किया. इसके अलावा आर्थिक संकट का सामना कर रहे लोगों के लिए रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास के लिए ‘गरीब कल्याण रोजगार योजना’ लागू की. इसके अलावा भारतीय संसद ने नागरिकों और कोरोना योद्धाओं-चिकित्सा और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानून भी बनाया.

 

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