
देश ने बुधवार (15 अगस्त) को अपना 78वां स्वतंत्रता दिवस मनाया. लेकिन हमारे समाज में एक सवाल आज भी गूंज रहा है कि क्या सुरक्षा के मुद्दे पर महिलाएं आजाद हो पाईं? कारण, देश 1947 में आजाद हो गया. अमेरिका में जहां संविधान बनने के 133 साल बाद महिलाओं को वोट का अधिकार मिला, वहीं भारत में संविधान बनने के साथ ही महिलाओं के पास सरकार चुनने और समानता का अधिकार तो मिला, लेकिन सुरक्षा का अधिकार पाने में आजादी के 78 साल बाद भी इंतजार बाकी है.
आजादी के साथ कहीं भी आने जाने, काम करने, रहने, घूमने की दस्तक हर महिला इसलिए चाहती है क्योंकि देश में हर 16 मिनट में कहीं ना कहीं किसी महिला के साथ रेप हो जाता है. सुरक्षा वाली आजादी देश की महिलाओं, बच्चियों, बेटियों को इसलिए चाहिए क्योंकि हर घंटे में देश में कहीं ना कहीं 51 मामले महिलाओं से अपराध के सामने आ जाते हैं. तीन साल के भीतर देश में प्रति घंटे महिलाओं से अपराध के 9 मामले बढ़ चुके हैं. जो पहले 2020 में 42 था, वो 2022 में 51 हो गया. जबकि महिलाओं से अपराध में सजा दिलाने की दर केवल 23 प्रतिशत ही है.
एक रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में 58 फीसदी महिलाओं ने कहा कि वो असुरक्षित महसूस करती हैं. 52 फीसदी महिलाएं कहती हैं कि उन्हें रात में अकेले चलने में डर लगता है. 46 फीसदी महिलाएं देश में काम करने के दौरान या काम पर जाने के दौरान सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती हैं. 29% महिलाओं को सार्वजनिक जगहों पर छेड़छाड़ सहनी पड़ी और 75% ने इसकी कभी कहीं डर की वजह से शिकायत तक नहीं की.

सवाल पूछ रहा कोलकाता का पीड़ित परिवार
भारत में राज्य बदलते हैं. सरकार बदलती है. लेकिन बेटियों के लिए इंसाफ मांगती लौ जस की तस रहती है. क्योंकि जितनी देर न्याय मांगती मोमबत्ती जलती है, उससे भी कम देर में देश में महिलाओं से कई जगह अपराध हो जाता है. इस बार इंसाफ मांगता मोम बंगाल के लिए पिघल रहा है. जहां डॉक्टर बेटी का परिवार पूछता है, बेटी को पढ़ाने लिखाने डॉक्टर बनाने के बाद भी सुरक्षा की आजादी क्यों नहीं मिल पाई? देश में करोड़ों परिवार आज पूछते हैं कि वो सुरक्षित जगह बता दीजिए जहां बेटियों को डर ना लगे. जिन्हें आधी आबादी बताकर सियासत बड़ा महत्व देती है, वो पूछती हैं कि अपराध सहने के बाद न्याय की लड़ाई इतनी कठिन क्यों बना दी जाती है?
जिस पश्चिम बंगाल में हर घंटे तीन महिलाओं के साथ अपराध होता है, वहां हालत ये है कि पहले 8 अगस्त की देर रात महिला डॉक्टर को उसी के मेडिकल कॉलेज के सेमिनार रूम में रेप करके मार दिया गया. आरोप लगा कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने शुरुआत में पूरा मामला दबाना चाहा. आरोप लगा कि मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल संदीप घोष को बचाया जा रहा है. फिर आरोप लगा कि जांच के पहले पांच दिन में कोलकाता पुलिस मामले को दबाती रही. इसके बाद आरोप लगा कि सीबीआई के पास जांच जाने के बाद क्राइम सीन और सबूत मिटाने के लिए भीड़ ने आरजी कर अस्पताल में हमला कर दिया.

पुलिस के कार्यशैली पर उठे सवाल
पहले दावा हुआ कि क्राइम सीन के पास ही निर्माण काम कराया जा रहा है ताकि सबूतों से खिलवाड़ हो. पुलिस हालांकि इस दावे को खारिज करती है. लेकिन पुलिस पर ही सवाल उठाते प्रदर्शनकारी डॉक्टर सवाल पूछ रहे हैं कि अगर कोलकाता पुलिस सच्ची है तो उस भीड़ को क्यों नहीं रोक पाई जो 15 अगस्त से ठीक पहले आधी रात मेडिकल कॉलेज में तोड़फोड़ करने ही नहीं बल्कि प्रदर्शन को दबाने और क्या पता सबूत मिटाने आई थी.
अगर सबूत ही नहीं रहा तो अपराधी कहां से पकड़े जाएंगे. और जो पकड़े भी जाएंगे वो फिर छूट जाएंगे. और जब अपराधी बिना सजा के छूट जाएंगे तो फिर कहां से रोका जाएगा महिलाओं के साथ होता अपराध? 2022 के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े कहते हैं कि पश्चिम बंगाल में महिलओं से अपराध के 34 हजार 738 केस सामने आए. बंगाल इस मामले में देश में चौथे नंबर का राज्य है. रेप के पश्चिम बंगाल में 1111 मामले सामने आए. देश में 11वें नंबर का राज्य है. महिलाओं से अपहरण के 6 हजार 596 केस के साथ पश्चिम बंगाल देश में पांचवें पायदान पर है. लेकिन अब दस्तक देता सवाल है कि क्या पश्चिम बंगाल केस को दबाने के लिए, न्याय की लड़ाई में बाधा पहुंचाने के लिए पहले नंबर पर होता जा रहा है?
ममता के बंगाल में महिला सुरक्षा पर सवाल
मां काली को पूजने वाला पश्चिम बंगाल, सती प्रथा को खत्म कराने वाले राजा राम मोहन राय का पश्चिम बंगाल, विधवा विवाह को मंजूरी दिलाने वाले ईश्वर चंद्र विद्यासागर का पश्चिम बंगाल, महिला सम्मान के परम उपासक रहे राम कृष्ण परमहंस का पश्चिम बंगाल, महिला उत्थान की नींव साहित्य से रखते रवींद्र नाथ टैगोर का पश्चिम बंगाल, वंदे मातरम यानी देश को मां के रूप में पूजने वाला राष्ट्रगीत लिखने वाले बंकिम चंद्र चटर्जी का पश्चिम बंगाल... ऐसे में जहां मौजूदा वक्त में देश की इकलौती महिला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जनता ने पूरी बहुमत वाली सरकार बना रखी है. लेकिन उसी बंगाल में अब महिला सुरक्षा की सुर, लय, ताल सब बिगड़ गई है.

आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हमले की टाइमलाइन
- बुधवार रात पौने नौ बजे सीबीआई की टीम आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जांच करके बाहर निकली.
- रात दस बजे के करीब प्रदर्शनकारी डॉक्टर एक रैली निकालने वाले थे.
- रात 11 बजे यही वो वक्त था जब मे़डिकल कॉलेज के पास भीड़ इकट्ठा होने लगी.
- रात सवा ग्यारह बजे भीड़ ने मेडिकल कॉलेज के बाहर पुलिस बैरीकेड को तोड़ दिया.
- रात 11 बजकर 16 मिनट पर हमलावर भीड़ ने प्रदर्शनकारी छात्रों को दौड़ा लिया और उन्हें धरना स्थळ से भगा दिया.
- रात 11 बजकर बीस मिनट पर प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने ब्वॉयज हॉस्टल में छिपकर अपनी जान बचाई.
- रात 11 बजकर 22 मिनट पर भीड़ मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी व़ॉर्ड में घुसकर जाती है, चारों तरफ तोड़फोड़ करने लगी.
- फिर रात 12 बजे के करीब भीड़ हमला करके भाग गई
- इसके एक घंटे बाद रात एक बजे अतिरिक्त पुलिस बल आया. हालात को अपने कंट्रोल में लिया और फिर रात डेढ़ बजे पुलिस कमिश्नर भी मेडिकल कॉलेज पहुंचे. और सीधे तुरंत गुस्से में ये बताने में जुट गए कि उन्होंने कैसे अपना कलेजा चीरकर इस पूरे केस में ईमानदारी से काम किया.
क्या बंगाल पुलिस मामले सुलझाने में है फेल?
तीन साल के आंकड़ें देखें तो महिलाओं से अपराध के आरोपियों को सजा दिलाने की दर घट रही है. 2020 में जहां कनविक्शन रेट 29.8 फीसदी रहा. वो 2022 में घटकर 23.3 फीसदी पहुंच चुका है. ऐसे में भले कोलकाता में अब जांच सीबीआई के पास पहुंच गई है. लेकिन सुरक्षा और सजा दिलाने में पश्चिम बंगाल के संदर्भ में तो फिलहाल आशंकाएं डराती हैं. क्योंकि जहां पुलिस वाले अपनी आउट पोस्ट तक की सुरक्षा भीड़ से नहीं कर पाए वो क्या ही महिलओं को सुरक्षा देंगे और क्या ही किसी और मामले में सजा दिलाएंगे.
पश्चिम बंगाल की पुलिस क्या फेल है या फिर भरोसे लायक नहीं रहती. क्योंकि बड़े मामले देखें तो ऐसा ही महसूस होता है. अगस्त 2024 को अभी डॉक्टर रेप-मर्डर केस में कलकत्ता हाईकोर्ट ने CBI जांच के आदेश दिए. अप्रैल 2024 को कलकत्ता हाईकोर्ट ने संदेशखाली केस में CBI जांच के आदेश दिए. जून 2023 को बंगाल में पंचायत चुनाव से पहले हिंसा मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक मामले पर CBI जांच के आदेश दिए. मई 2022 को कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल के स्कूलों में शिक्षक भर्ती घोटाले की CBI जांच के आदेश दिए. अगस्त 2021 को पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने रेप और हत्या जैसी घटनाओं की जांच CBI को सौंप दी.
बता दें कि सीबीआई को जांच इसलिए सौंपी जाती है ताकि पुलिस पर सत्ता के संरक्षण में केस को रफादफा करने की गुंजाइश ना रहे. लेकिन जांच सीबीआई को जाने के बाद भी पुलिस बंगाल की सुरक्षा देने तक में फेल है. क्योंकि सवाल है कि जब भीड़ ने अस्पताल में हमला किया और प्रदर्शकारी छात्रों को ही निशाना बनाया तो पुलिस क्या कर रही थी? पुलिस के हाथ किसने बांध रखे थे ? क्या सरकार ने? जिसे महिला सुरक्षा से ज्यादा सरकार की इमेज की चिंता है?