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कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से झटका, पिछड़ा वर्ग का आरक्षण बढ़ाने के फैसले पर लगी रोक

कर्नाटक में इसी साल अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने हैं. पंचमसाली लिंगायत समुदाय लंबे समय से आरक्षण में बढ़ोतरी की मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहा था. सरकार ने इनकी मांगों को मानकर आरक्षण बढ़ाने का फैसला किया था. हालांकि अब इस पर भी कोर्ट ने रोक लगा दी है.

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कर्नाटक हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर लगाई रोक (प्रतिकात्मक तस्वीर)
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर लगाई रोक (प्रतिकात्मक तस्वीर)

कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा पिछड़े वर्ग को दिए गए आरक्षण पर स्टे लगा दिया है. कोर्ट में दायर एक पुरानी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बीजेपी सरकार से पिछड़ा वर्ग के आरक्षण पर यथास्थिति बनाए रखने को कहा है. जिसके बाद सरकार के पंचमसाली लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय के आरक्षण बढ़ाने के फैसले पर भी रोक लग गई है. अब इस मामले में हाईकोर्ट 30 अक्टूबर को सुनवाई करेगी.

बता दें कि राज्य में इसी साल अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने हैं. पंचमसाली लिंगायत समुदाय लंबे समय से आरक्षण में बढ़ोतरी की मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहा था. उनकी मांग है कि समुदाय को OBC आरक्षण मैट्रिक्स की श्रेणी 3B (5 प्रतिशत) से 2A (15 प्रतिशत) में शामिल किया जाए. इस पर सरकार की सहमति भी बन गई थी. लेकिन अब कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी है.

गौरतलब है कि 2ए श्रेणी के तहत पहले से ही 15 प्रतिशत आरक्षण साझा करने वाली 102 व्यावसायिक उप-जातियां शामिल हैं. कर्नाटक में अनुसूचित जातियों के लिए 15 फीसदी, एसटी के लिए 3 फीसदी और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए 32 फीसदी आरक्षण प्रदान किया जाता है, जो कुल मिलाकर 50 फीसदी होता है. राज्य में पंचमसाली लिंगायत समुदाय के अलावा लंबे समय से कुरूबा और वाल्मिकी समुदाय अलग-अलग श्रेणी में आरक्षण की मांग करते आए हैं. वाल्मीकि समुदाय की भी मांग थी कि अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण को तीन से बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत किया जाए.

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