21 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्यप्रदेश के ग्वालियर में एक कार्यक्रम में भाषण दे रहे थे. भाषण शुरू किया तो मंच पर मौजूद थे केन्द्रीय मंत्री और भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया. प्रधानमंत्री ने उन्हें कहा ये हमारे गुजरात के दामाद हैं. हालांकि कुछ साल पहले भी वो गुजरात के दामाद ही थे लेकिन तब कांग्रेस में थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन पर हमला कर रहे थे. सिंधिया जब अपने समर्थक 25 विधायकों के साथ आए थे तो चर्चा यही थी कि भाजपा शिवराज और महाराज कहे जाने वाले सिंधिया में सामंजस्य कैसे बिठाएगी. लेकिन एमपी विधानसभा चुनावों के लगभग एक महीने पहले अब लग रहा है कि भाजपा ये बैलेंस बना चुकी है. सिंधिया खुद तो केन्द्रीय मंत्री हैं लेकिन अपने समर्थक विधायकों में से 18 का टिकट सुनिश्चित करा चुके हैं. तो क्या अब सामंजस्य का सवाल ग़ायब हो चुका है और सिंधिया समर्थक ग्राउंड पर संतुष्ट हैं बीजेपी में अपने हिस्से को लेकर और भाजपा ने तो इनाम दे ही दिया है लेकिन सिंधिया रिटर्न गिफ्ट दे पाएंगे? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.
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ओडिशा में मुख्यमंत्री हैं नवीन पटनायक. उनकी पार्टी है बीजू जनता दल. इन दिनों अपने निजी सचिव और 2000 बैच के आईएएस अधिकारी वी.के.पांडियन के इस्तीफे की वजह से चर्चा में हैं. क्योंकि बात केवल इतनी नहीं है. क्योंकि वीके पांडियन के इस्तीफा देते ही पटनायक ने उन्हें अपना सलाहकार बनाकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया. अब चर्चा ये हो रही है कि क्या नवीन पटनायक उनको अपना उत्तराधिकारी बनाने वाले हैं. वीके पांडियन के कार्यप्रणाली की बतौर ओडिशा की जनता उनसे वाकिफ तो है लेकिन अब उनकी नई जिम्मेदारी ने बीजेडी में असंतोष जरूर बढ़ा दिया है. ये भी कहा जा रहा है कि पांडियन के बढ़ते कद से बीजेडी के कई नेताओं में नाराजगी भी है. सवाल है कि ऐसा क्यों लग रहा है कि उत्तराधिकारी के तौर पर पांडियन ही आगे आने वाले हैं और पटनायक और पांडियन के अब तक के संबंध किस तरह से रहे हैं जिसकी वजह से ऐसी संभावना प्रबल लग रही है और तमिलनाडु से आने वाले पांडियन उड़ीसा की जनता के लिए फिट हो सकेंगे? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.
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एक तरफ तो राजधानी दिल्ली में सरकारें प्रदूषण से लड़ने के तमाम तरीके का दावा कर रही हैं. लेकिन दूसरी तरफ प्रदूषण से लड़ाई के लिए जो पहले से जतन किये गए हैं उन्हीं का हाल खस्ता हैं. इसी साल दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने आईआईटी-कानपुर, आईआईटी-दिल्ली और टीईआरआई के सहयोग से रियल टाइम सोर्स अपॉर्शनमेंट सेंटर बनाया गया था लेकिन उद्घाटन के कुछ महीने बाद ही ये बंद हो गया. इसका उद्देश्य था कि शहर में प्रदूषण हैं के कारणों का पता लगाना लेकिन देश का एक मात्र इस तरह का सेंटर एक साल भी नहीं चल सका. क्यों जरूरी था इसका चलते रहना प्रदूषण के लिहाज से जो हो ना सका? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.
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