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Jammu-Kashmir Delimitation: सीटें बढ़ीं, इलाके बदले, घाटी-जम्मू का समीकरण बदला, कश्मीरी पंडितों को आरक्षण, 10 बड़े बदलाव

Jammu-Kashmir Delimitation: परिसीमन आयोग ने जम्मू-कश्मीर की कुल 90 विधानसभा सीटों में से 43 जम्मू और 47 कश्मीर में रखने का प्रस्ताव दिया है. अब तक जम्मू में 37 और कश्मीर में 46 विधानसभा सीटें हुआ करती थीं.

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तस्वीर श्रीनगर के लाल चौक की है. परिसीमन आयोग की रिपोर्ट के बाद जम्मू-कश्मीर में चुनाव का रास्ता साफ हो गया है. (फाइल फोटो-PTI) तस्वीर श्रीनगर के लाल चौक की है. परिसीमन आयोग की रिपोर्ट के बाद जम्मू-कश्मीर में चुनाव का रास्ता साफ हो गया है. (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जम्मू के 6, कश्मीर के 1 जिले में सीटें बढ़ाने की सिफारिश
  • अनंतनाग लोकसभा में जम्मू के भी कुछ इलाके भी शामिल
  • इस साल अक्टूबर के बाद विधानसभा चुनाव हो सकते हैं

Jammu-Kashmir Delimitation: भौगोलिक नक्शे के बाद अब जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक नक्शे को बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठा लिया गया है. जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. इस पर आखिरी फैसला सरकार को लेना है. परिसीमन आयोग ने जम्मू-कश्मीर में 7 विधानसभा सीटें बढ़ाने का सुझाव दिया है. इसके बाद जम्मू-कश्मीर में कुल 90 विधानसभा सीटें हो जाएंगी. परिसीमन आयोग की सिफारिशें लागू होते ही जम्मू-कश्मीर का राजनीतिक नक्शा किस तरह बदल जाएगा, जानते हैं.

1. जम्मू-कश्मीर में बदलाव क्यों?

- जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार 1995 में परिसीमन हुआ था. तब विधानसभा सीटों की संख्या को 76 से बढ़ाकर 87 किया गया था. 

- इस बार परिसीमन इसलिए किया गया है क्योंकि 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर को खास दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटा दिया गया था. साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था.

- चूंकि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा भी है, इसलिए यहां चुनाव के लिए सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में परिसीमन आयोग का गठन किया गया था. 

- ये परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर हुआ है. 2011 की जनगणना के मुताबिक, जम्मू की आबादी 53.72 लाख और कश्मीर की आबादी 68.83 लाख है. 

2. जम्मू में क्या बदलेगा?

- जम्मू-कश्मीर में अब तक 111 विधानसभा सीटें होती थीं. इनमें से 24 सीटें पीओके यानी पाक अधिकृत कश्मीर में हैं. वहां चुनाव नहीं कराए जा सकते. इस तरह कुल 87 सीटें होती थीं, लेकिन लद्दाख के अलग होने के बाद कुल 83 सीटें ही बची थीं.

- इन 83 सीटों में से जम्मू के हिस्से में 37 सीटें थीं. परिसीमन आयोग ने जम्मू रीजन में 6 विधानसभा सीटें बढ़ाने की सिफारिश की है. अगर सिफारिश लागू होती है तो जम्मू में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर 43 हो जाएंगी. 

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3. कश्मीर में क्या बदलेगा?

- कश्मीर में अब तक 46 सीटें हुआ करती थीं. अब यहां एक विधानसभा सीट बढ़ाने की सिफारिश की गई है. इसके बाद कश्मीर रीजन में 47 विधानसभा सीटें हो जाएंगी. 

4. कहां कितनी सीटें बढ़ीं?

- परिसीमन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू रीजन में सांबा, कठुआ, राजौरी, किश्तवाड़, डोडा और उधमपुर में एक-एक सीट बढ़ाई गई है. वहीं, कश्मीर रीजन में कुपवाड़ा जिले में एक सीट बढ़ाई गई है.

- जम्मू के सांबा में रामगढ़, कठुआ में जसरोता, राजौरी में थन्नामंडी, किश्तवाड़ में पड्डेर-नागसेनी, डोडा में डोडा पश्चिम और उधमपुर में रामनगर सीट नई जोड़ी गईं हैं.

वहीं, कश्मीर रीजन में कुपवाड़ा जिले में ही एक सीट बढ़ाई गई है. कुपवाड़ा में त्रेहगाम नई सीट होगी. अब कुपवाड़ा में 5 की बजाय 6 सीटें होंगी.

5. एससी-एसटी के लिए क्या?

- परिसीमन आयोग ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए 16 सीटें रिजर्व की हैं. इनमें से एससी के लिए 7 और एसटी के लिए 9 सीटें रखी गईं हैं.

- एससी के लिए रामनगर, कठुआ, रामगढ़, बिशनाह, सुचेतगढ़, मढ़ और अखनूर सीट रखी गई हैं. वहीं, एसटी के लिए गुरेज, कंगन, कोकरनाग, गुलाबगढ़, राजौरी, बुढ़ल, थन्नामंडी, सुरानकोट और मेंढर सीट है.

6. कश्मीरी पंडितों के लिए क्या?

- परिसीमन आयोग की रिपोर्ट में 2 सीटें कश्मीरी प्रवासियों के लिए रिजर्व रखी गईं हैं. रिपोर्ट में इसके लिए 'कश्मीरी प्रवासियों' शब्द का इस्तेमाल किया गया है. माना जा रहा है कि ये कश्मीरी पंडितों के लिए सीट होगी. 

- कश्मीरी पंडितों ने परिसीमन आयोग से उनके लिए सीटें रिजर्व रखने की मांग की थी. बताया जा रहा है कि जो दो सीटें रिजर्व हैं, उस पर केंद्र सरकार सदस्यों को मनोनित करेगी. ऐसा फॉर्मूला पुडुचेरी में है. वहां 30 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से 3 सदस्यों को केंद्र सरकार मनोनित करती है.

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7. लोकसभा सीटों का क्या?

- जम्मू-कश्मीर में कुल 5 लोकसभा सीटें हैं. अब तक 2 सीटें जम्मू और 3 सीटें कश्मीर में थीं. अब भी 5 ही सीटें रहेंगी, लेकिन एक सीट में जम्मू और कश्मीर दोनों के इलाके शामिल करने की सिफारिश की गई है.

- जम्मू में जम्मू और उधमपुर जबकि कश्मीर में बारामूला और श्रीनगर लोकसभा सीट होगी. एक अनंतनाग-राजौरी सीट भी होगी, जिसमें जम्मू और कश्मीर दोनों रीजन के इलाकों को शामिल किया गया है.

8. सियासी गणित कैसे बदलेगा?

- विधानसभा मेंः जम्मू में 6 और कश्मीर में एक सीट बढ़ाई गई है. जम्मू हिंदू बहुल तो कश्मीर मुस्लिम बहुल इलाका है. जम्मू में 6 सीटें बढ़ने से बीजेपी को फायदा मिलने की उम्मीद है. 2014 के चुनाव में बीजेपी ने यहां 25 सीटें (37 में से) जीती थीं. इसके अलावा, अब तक के चुनावों में देखा गया है कि कश्मीर घाटी में बेहतर प्रदर्शन करके भी सरकार बन जाती थी, लेकिन अब जम्मू में भी ज्यादा सीटें जीतना जरूरी हो गया है. 

- लोकसभा मेंः अनंतनाग-राजौरी में जम्मू और कश्मीर के जिलों को शामिल करने से गुजर-बक्करवाल वोटों का गणित है. पुंछ और राजौरी पीर पंजाल के दक्षिण में पड़ते हैं जो जम्मू का हिस्सा है. यहां गुजर-बक्करवाल की आबादी ज्यादा है. इन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया गया है. पुंछ और राजौरी की अनुमानित 11.19 लाख आबादी में 5 लाख गुजर-बक्करवाल हैं. इनके आने से मुस्लिम बहुल अनंतनाग सीट में करीब 20 फीसदी आबादी गुजर और बक्करवाल की हो जाएगी.

9. पीओके के लिए क्या?

- 1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्तानी घुसपैठियों ने कश्मीर के एक बहुत बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया था. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पाकिस्तान ने भारत के 78 हजार वर्ग किमी इलाके पर कब्जा कर रखा है.

- पीओके में भारत ने 24 विधानसभा सीटें रखीं हैं. वहां चुनाव नहीं होते. वहां पाकिस्तान चुनाव करवाता है. हालांकि, पीओके का अपना प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति होता है. 

10. अब आगे क्या होगा?

- परिसीमन आयोग की रिपोर्ट पर सरकार की मुहर लगते ही जम्मू-कश्मीर का राजनीतिक नक्शा बदल जाएगा. इसके बाद यहां विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे. 

- जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 6 से 8 महीनों में विधानसभा चुनाव होने की बात कही जा रही है. माना जा रहा है कि अक्टूबर के बाद यहां चुनाव हो सकते हैं.

- जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार 2014 में विधानसभा चुनाव हुए थे. तब पीडीपी (28) और बीजेपी (25) ने मिलकर सरकार बनाई थी. हालांकि, ये गठबंधन ज्यादा नहीं चला और जून 2018 में बीजेपी ने अपना समर्थन वापस ले लिया. 

- बीजेपी के समर्थन वापस लेते ही सरकार गिर गई और बाद में विधानसभा को भंग कर राज्यपाल शासन लागू कर दिया गया. अगस्त 2019 में इसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया, जिसके बाद से यहां उपराज्यपाल शासन चला रहे हैं.

 

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