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जगदीप धनखड़ आज लेंगे उपराष्ट्रपति पद की शपथ, राष्ट्रपति भवन में होगा समारोह

जगदीप धनखड़ आज दोपहर 12.30 बजे उप राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे. उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ की शानदार जीत हुई थी. धनखड़ किसान परिवार से आते हैं. उनके पिता गोकुल चंद्र धनखड़ खेती करते थे. धनखड़ पेशे से वकील हैं. धनखड़ का राजनीतिक करियर करीब 30 वर्षों का है. साल 1989 में वह सक्रिय राजनीति में आए.

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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़

जगदीप धनखड़ आज दोपहर 12.30 बजे उप राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे. शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन राष्ट्रपति भवन में होगा. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति को पद की शपथ दिलाएंगी. हाल ही में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ की शानदार जीत हुई थी. उन्होंने 528 वोटों के साथ जीत हासिल की थी. जबकि विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को 182 वोट मिले. उपराष्ट्रपति चुनाव में कुल 725 वोट डाले गए थे. इनमें 710 वोट वैध पाए गए. जबकि 15 वोट इनवैलिड मिले. 

जगदीप धनखड़ देश के 14वें उपराष्ट्रपति होंगे. वह आज उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे. जगदीप धनखड़ राजस्थान के झुझुनूं जिले के रहने वाले हैं. वे उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे. बीजेपी के उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्होंने राज्यपाल के पद से इस्तीफा दिया था. धनखड़ किसान परिवार से आते हैं. उनके पिता गोकुल चंद्र धनखड़ खेती करते थे. धनखड़ पेशे से वकील हैं.

जगदीप धनखड़ ने कानून की डिग्री लेने के लेने बाद वकालत शुरू कर दी और साल 1990 में उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट में सीनियर एडवोकेट का ओहदा दिया गया. धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट से लेकर देश की कई हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस की है. साल 1988 तक वह देश के प्रतिष्ठित वकीलों में शुमार हो गए थे. 

30 साल का है राजनीतिक करियर

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धनखड़ का राजनीतिक करियर करीब 30 वर्षों का है. साल 1989 में वह सक्रिय राजनीति में आए और इसी वर्ष 9वीं लोकसभा के लिए झुनझुनू से जनता दल के टिकट पर चुनाव जीतकर पहली बार सांसद चुने गए. 1990 में वह चंद्रशेखर की सरकार में संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं. इसके बाद उन्होंने राजस्थान की राजनीति में भी हाथ आजमाए. 1993 से लेकर 1998 तक वह विधायक भी रहे. 

ममता बनर्जी से रहा 36 का आंकड़ा


केंद्र सरकार ने 20 जुलाई 2019 को धनखड़ को पश्चिम बंगाल का गवर्नर नियुक्त किया था. अपने बयानों और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ '36 के आंकड़ों' के लिए वह लगातार सुर्खियों में रहे हैं. उनके और ममता बनर्जी के बीच खुलकर मतभेद नजर आए थे. पश्चिम बंगाल सरकार बतौर राज्यपाल जगदीप धनखड़ को राज्य के निजी विश्वविद्यालयों में 'अतिथि' या 'विजिटर' के तौर पर हटाने के लिए कानून में संशोधन करने के बाद उन्हें उस पद से हटा दिया था.  

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