scorecardresearch
 

कोरोना को देखते हुए क्या CBSE टालेगी परीक्षा? पसोपेश में 10वीं-12वीं के छात्र

अब तक सीबीएसई इस बारे में कोई फैसला नहीं कर पाया है. सोमवार को मंत्रालय के साथ बैठक की लेकिन नतीजा नहीं निकला. परीक्षा रद्द करने का दबाव भी पड़ रहा है. केंद्र ने भी कहा है कि तारीखों पर फिर से विचार हो. अब दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने भी कहा है कि सीबीएसई को ताजा हालात में परीक्षा रद्द करनी चाहिए.

सीबीएसई की परीक्षा रद्द करने की मांग सीबीएसई की परीक्षा रद्द करने की मांग
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं चार मई से आरंभ होंगी
  • केंद्र से सीबीएसई परीक्षाएं रद्द करने की अपील
  • पूरे देश में 30 लाख बच्चे परीक्षा में होंगे शामिल

लाखों बच्चे अगले कुछ दिनों के बाद परीक्षा देने की तैयारी कर रहे हैं. लेकिन लोग कर रहे हैं कि कोरोना की भयावहता को देखते हुए ये बच्चों की जान से खिलवाड़ है. मंगलवार को दिल्ली के सीएम ने भी मांग की कि परीक्षाएं रद्द होनी चाहिए. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बहुत जरूरी हो, तभी घर से बाहर निकलें. हर नियम का पालन करते हुए ही घर से बाहर निकलें. मौजूदा हालात को देखते हुए तुरंत CBSE के पेपर्स रद्द किए जाने चाहिए. केजरीवाल ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए यही बेहतर फैसला है.

जाहिर है कोरोना ने देश में हाहाकार मचा रखा है. हर रोज बढ़ते आंकड़े हालात भयावह होने की तरफ इशारा कर रहे हैं और इस जानलेवा खतरे के बीच लाखों बच्चों की जान अटकी है, एक अदद परीक्षा को लेकर. बच्चे मेहनत से तैयारी कर रहे हैं लेकिन कोरोना जैसी महामारी के बीच सवाल ये है कि आखिर परीक्षा होगी तो कैसे? क्या ये बच्चों की सेहत से खिलवाड़ नहीं. तादाद भी छोटी मोटी नहीं है. इस बार 18 लाख बच्चे सीबीएसई की 10वीं की परीक्षा देंगे, जबकि 12 लाख बच्चे 12वीं की पीरक्षा देंगे. ऐसे में सीबीएसई को अब बड़ा फैसला करना है.

अब तक सीबीएसई इस बारे में कोई फैसला नहीं कर पाया है. सोमवार को मंत्रालय के साथ बैठक की लेकिन नतीजा नहीं निकला. परीक्षा रद्द करने का दबाव भी पड़ रहा है. केंद्र ने भी कहा है कि तारीखों पर फिर से विचार हो. अब दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने भी कहा है कि सीबीएसई को ताजा हालात में परीक्षा रद्द करनी चाहिए.

अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'दिल्ली में छह लाख बच्चे सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) की परीक्षा देंगे. करीब एक लाख अध्यापक इसमें (इन परीक्षाओं के आयोजन में) शामिल होंगे. इनमें (परीक्षा केंद्रों में) संक्रमण के मामले बड़ी संख्या में सामने आ सकते हैं, जिसके कारण व्यापक स्तर पर संक्रमण फैल सकता है. बच्चों का जीवन और स्वास्थ्य हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है. मैं केंद्र से सीबीएसई परीक्षाएं रद्द करने की अपील करता हूं.'

उन्होंने कहा कि सीबीएसई ऑनलाइन परीक्षाओं और आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर छात्रों को अगली कक्षाओं में भेजने जैसे तरीकों को खोज सकता है.

केजरीवाल ने कहा, 'कई देशों ने ऐसा किया है, भारत में भी कुछ राज्य ऐसा कर रहे हैं. कुछ वैकल्पिक तरीकों पर विचार किया जा सकता है. बच्चों को ऑनलाइन परीक्षा या आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर अगली कक्षा में भेजा जा सकता है, लेकिन परीक्षाएं रद्द होनी चाहिए.'

सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं चार मई से आरंभ होंगी. कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के मद्देनजर इस परीक्षाओं को रद्द या स्थगित करने की मांग तेजी से बढ़ रही है. सीबीएसई भले ही परीक्षा को लेकर फैसला करने में दिक्कत महसूस कर रहा हो लेकिन कुछ राज्यों ने अपने स्टेट बोर्ड की परीक्षा रद्द की है या टाल दी है. इनमें महाराष्ट्र, पंजाब, छत्तीसगढ़, यूपी और दिल्ली शामिल हैं.

सीबीएसई को अभी फैसला करना है. लेकिन उधर परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों बच्चों से लेकर उनके पेरेंट्स बुरी तरह परेशान हैं. कोई उनकी नहीं सुन रहा, जो परीक्षा से पहले अजीब तरह की परीक्षा से जूझ रहे हैं. ये लाखों बच्चें के भविष्य से पहले जान का सवाल है. 

मेडिकल एक्सपर्ट रवि मलिक कहते हैं कि केसेस बढ़ते जा रहे हैं. पिछले एक महीने में 10 गुना बढ़ गए हैं. इस समय केस का आंकड़ा ऑल टाइम हाई है. कोरोना केस के मामले में फिलहाल विश्व में सबसे अधिक मामले भारत में आ रहे हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 18 साल से छोटे बच्चों के लिए वैक्सीन हमारे देश में अभी मौजूद नहीं है. जबकि 41 प्रतिशत आबादी इनकी है. परीक्षा सेंटर पर छात्र आएंगे, अभिभावक आएंगे, टीचर आएंगे और अन्य स्टाफ भी आएंगे. ऐसे में यहां से कोरोना फैलने की संभावना बहुत ज्यादा है.

10वीं और 12वीं क्लास की स्ट्रेटजी अलग होनी चाहिए. क्योंकि 10वीं के बच्चे को सेम स्कूल में रहना है जबकि 12वीं पास बच्चे दूसरे देश भी पढ़ाई के लिए जा सकते हैं. एक मेडिकल एक्सपर्ट के तौर पर मैं कह सकता हूं कि हालात ठीक नहीं है. बच्चों के लिए वैक्सीन नहीं हैं. ये सुपर स्प्रेडर बन सकते हैं. सरकार मजबूत और अनुभवी पैनल के साथ फैसला ले. 

एक छात्र आदित्य शंकर ने आजतक का धन्यवाद देते हुए कहा कि मेरा सवाल सरकार से है कि एक तरफ नाइट कर्फ्यू और लॉकडाउन लगाती है और दूसरी तरफ एग्जाम लेती है. अगर हम कोरोना पीड़ित होते हैं तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

कैरियर एक्सपर्ट जुबिन मल्होत्रा कहते हैं कि दसवीं की परीक्षाएं टाली जा सकती हैं लेकिन 12वीं की परीक्षाएं नहीं टाली जा सकती. क्योंकि इसी के आधार पर उनका भविष्य टिका होता है कि वो कौन सा प्रोफेशन चुनेंगे. 

ब्यूरो रिपोर्ट आजतक
 

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें