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IPS ईशा सिंह का तबादला, करूर हादसे के बाद रैली में TVK नेता को याद दिलाए थे नियम

आईपीएस अधिकारी ईशा सिंह का तबादला दिल्ली कर दिया गया है. वह उस वक्त देशभर में चर्चा में आई थीं, जब उन्होंने कड़ी सुरक्षा के बीच आयोजित तमिलगा वेत्री कझगम की रैली में तय सीमा से ज्यादा लोगों को अंदर बुलाने से एक पार्टी नेता को सरेआम रोक दिया था. यह रैली करूर भगदड़ में 41 लोगों की मौत के बाद पार्टी प्रमुख विजय की पहली सार्वजनिक सभा थी.

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आईपीएस अधिकारी ईशा सिंह का दिल्ली में तबादला कर दिया गया है. (Photo: Isha Singh/Instagram)
आईपीएस अधिकारी ईशा सिंह का दिल्ली में तबादला कर दिया गया है. (Photo: Isha Singh/Instagram)

कड़े सुरक्षा नियमों के बीच आयोजित एक रैली में तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के एक नेता को ज्यादा लोगों को अंदर बुलाने से रोकने के बाद चर्चा में आईं आईपीएस अधिकारी ईशा सिंह का तबादला दिल्ली कर दिया गया है. करूर भगदड़ में 41 लोगों की मौत के बाद टीवीके प्रमुख विजय की यह पहली सार्वजनिक रैली थी, जिससे ईशा सिंह पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई थीं. 

पुडुचेरी के उप्पलम एक्सपो ग्राउंड में आयोजित यह कार्यक्रम कड़ी पुलिस निगरानी में हुआ था. प्रशासन ने रैली में लोगों की संख्या तय कर दी थी और किसी भी रोड शो की इजाजत नहीं दी गई थी. इसी दौरान टीवीके के जनरल सेक्रेटरी बुस्सी आनंद मंच पर पहुंचे और यह कहने लगे कि आयोजन स्थल के अंदर अभी जगह है. और ज्यादा लोगों को अंदर आने दिया जाए. तभी आईपीएस ईशा सिंह ने तुरंत दखल दिया और बीच भाषण में ही उन्हें रोक दिया.

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था ईशा सिंह का वीडियो

ईशा सिंह ने आयोजकों को सख्त लहजे में याद दिलाया कि हाल ही में 40 से ज्यादा लोगों की जान गई है. उन्होंने कहा, 'इतने लोगों का खून बह चुका है. 40 लोग मारे गए हैं. आप क्या कर रहे हैं?' और साफ कर दिया कि तय सीमा से ज्यादा किसी को भी अंदर आने की इजाजत नहीं दी जाएगी.

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उनकी यह टिप्पणी 28 सितंबर को हुई करूर भगदड़ की याद दिलाने वाली थी, जिसमें टीवीके की एक बड़ी रैली के दौरान 41 लोगों की मौत हो गई थी. वायरल हुए वीडियो में ईशा सिंह को मंच पर जाकर बुस्सी आनंद से माइक लेते हुए भी देखा गया. यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और कई लोगों ने राजनीतिक दबाव के आगे न झुकते हुए नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए ईशा सिंह की तारीफ की.

कौन हैं आईपीएस ईशा सिंह?

ईशा सिंह का जन्म 1998 में मुंबई में हुआ. वह ऐसे परिवार से आती हैं, जहां सार्वजनिक सेवा और सामाजिक सक्रियता की मजबूत परंपरा रही है. उनके पिता योगेश प्रताप सिंह 1985 बैच के आईपीएस अधिकारी थे, जिन्होंने भ्रष्टाचार उजागर करने के बाद बार-बार सजा वाले तबादले मिलने पर नौकरी छोड़ दी थी. उनकी मां आभा सिंह ने भारतीय डाक सेवा छोड़कर वकालत शुरू की और सलमान खान हिट एंड रन जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों में जनहित याचिकाएं लड़ीं.

पुलिस सेवा में आने से पहले ईशा सिंह ने कानून की पढ़ाई की. उन्होंने नेशनल लॉ स्कूल, बेंगलुरु से पढ़ाई की और कॉर्पोरेट करियर छोड़कर मानवाधिकार और जनहित से जुड़े मामलों पर काम किया. साल 2021 में उन्होंने मुंबई में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान मारे गए तीन सफाईकर्मियों की विधवाओं को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिलाया था. इसके अलावा, उन्होंने सिस्टम की वजह से गलत तरीके से फंसाई गई एक महिला को जमानत भी दिलाई थी.

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