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Exclusive: लद्दाख में भारतीय सेना की परमानेंट तैयारी, 17 हजार फीट की ऊंचाई पर पानी की तलाश

तनावपूर्ण हालात के बीच भारतीय सेना पूर्वी लद्दाख में 17,000 फीट की ऊंचाई पर दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) में ऊंचाई वाले पहाड़ी रेगिस्तान में पानी के लिए खोज और ड्रिलिंग के अभियान में जुटी है.

पूर्वी लद्दाख में 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है दौलत बेग ओल्डी (फाइल-पीटीआई) पूर्वी लद्दाख में 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है दौलत बेग ओल्डी (फाइल-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच तैयारी में जुटी सेना
  • पूर्वी लद्दाख में 17,000 फीट की ऊंचाई पर है दौलत बेग ओल्डी
  • पानी का इंतजाम करने में जुटी है भारतीय सेना

चीन के साथ बने तनावपूर्ण हालात के बीच भारत अपनी तैयारी को वर्तमान दौर के लिए तो कर ही रहा है, साथ ही उसकी कोशिश भविष्य के लिए स्थिति मजबूत करने की है. आने वाले समय को देखते हुए, भारतीय सेना पूर्वी लद्दाख में 17,000 फीट की ऊंचाई पर दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) में ऊंचाई वाले पहाड़ी रेगिस्तान में पानी के लिए खोज और ड्रिलिंग के अभियान में जुटी है.

दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) भारत और चीन के साथ सबसे रणनीतिक और शायद सबसे महत्वपूर्ण चौकी है, जो भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच अप्रैल के अंत और मई की शुरुआत में तनाव के बाद से बंद है.

प्रसिद्ध भूविज्ञानी और डॉक्टर रितेश आर्य जो पूर्व में सियाचिन ग्लेशियर और बटालिक हाइट्स पर भारतीय सेना के साथ काम कर चुके हैं, ने इंडिया टुडे को बताया, 'मैंने अभी डीबीओ का दौरा किया है. हमने कारू से तांगल तक लगभग 28 दिन गुजारे और टिकाऊ भूजल संसाधन विकास के अन्वेषण के हिस्से के रूप में डीबीओ की यात्रा की.'

पानी हासिल करने की उम्मीद

पूर्व में डॉक्टर रितेश आर्य ने पूर्वी लद्दाख के ऊंचाई वाले ठंडे पहाड़ी रेगिस्तान में तैनात सेना के लिए भूजल संसाधनों की सफलतापूर्वक खोज की और उसे विकसित किया. उन्होंने कहा, 'हम गलवान घाटी के अलावा पैंगोंग त्सो, लुकुंग, थाकुंग, चुशुल, रेजांग ला और तांग्से में सफल रहे हैं.'

भूविज्ञानी आर्य और भारतीय सेना को उम्मीद है कि वे डीबीओ में भी पानी हासिल कर सकेंगे. उन्होंने कहा, 'डीबीओ में भूजल संसाधनों की खोज को लेकर पेलियो चैनल के विकास के लिए हाइड्रो-जियोलॉजिकल स्थितियां अनुकूल होती हैं. हमें गहरी ड्रिल करनी होगी, लेकिन हम अपने सैनिकों के लिए पानी खोजने को लेकर आश्वस्त हैं.'

भूविज्ञानी करीब 10,000 साल पहले अस्तित्व में आए डीबीओ में मौजूद पेलियो झील के पुनर्निर्माण को लेकर आशान्वित हैं. उन्होंने कहा, 'एक पेलियो झील के पुनर्निर्माण से एक ओर सैनिकों का मनोबल बढ़ेगा और आने वाले समय में पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है.'

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