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India Today Defence Summit: भारत डिफेंस टेक्नोलॉजी में आगे, अब लीडर बनने की जरूरत: DRDO चीफ 

इंडिया टुडे डिफेंस समिट में DRDO के चेयरमैन जी. सतीश रेड्डी ने कहा कि भारत टेक्नोलॉजी के लिहाज से काफी आगे रहा है. हमें ऐसी टेक्नोलॉजी की पहचान करने की जरूरत है जिनकी भविष्य में जरूरत हो और जिन पर हमें काम करना होगा. 

डिफेंस टेक्नोलॉजी के विकास में भारत आगे है (फाइल फोटो) डिफेंस टेक्नोलॉजी के विकास में भारत आगे है (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • इंडिया टुडे डिफेंस समिट में शामिल हुए कई एक्सपर्ट
  • डिफेंस में भविष्य की टेक्नोलॉजी को लेकर चर्चा
  • दुश्मनों से मुकाबले के लिए टेक्नोलॉजी पर जोर

तेजी से बदल रहे डिफेंस सेक्टर में भारत को किस तरह की आधुनिक टेक्नोलॉजी की जरूरत है ताकि भविष्य की जंगों के लिए तैयार हुआ जा सके? इंडिया टुडे डिफेंस समिट में इस सवाल पर डिफेंस क्षेत्र के कई एक्सपर्ट ने अपनी बात रखी. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के चेयरमैन जी सतीश रेड्डी ने कहा कि भारत डिफेंस टेक्लोनॉजी में आगे है, लेकिन अब इसे लीडर बनने की जरूरत है. 

'फ्यूचर रेडी: इन्वेस्टिंग इन फ्यूचर डिफेंस टेक्नोलॉजी' सत्र को संबोधित करते हुए DRDO के चेयरमैन जी. सतीश रेड्डी ने कहा, 'भारत टेक्नोलॉजी के लिहाज से काफी आगे रहा है. हमें ऐसी टेक्नोलॉजी की पहचान करने की जरूरत है जिनकी भविष्य में जरूरत हो और जिन पर हमें काम करना होगा. बहुत से इक्विपमेंट आ रहे हैं. अब इसमें हमें लीडर बनने की जरूरत है. बहुत से नए मिसाइल, रडार, तारपीडो, सोनार, अवाक्स, कम्युनिकेशंस सिस्टम का विकास हो रहा है ' 

स्वदेशी उत्पादन बढ़ाना होगा 

डॉ रेड्डी ने कहा कि अब हाइपर सोनिक मिसाइल, कई तरह के रडार फोटानिक्स रडार, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पावर, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एनर्जी, लेजर एनर्जी जैसे कई महत्वपूर्ण सेक्टर हैं जिनमें हमें काम करना है. लाइटवेट न्यू जनरेशन टैंक की बात हो रही है. भारत में निजी क्षेत्र के सहयोग से हल्के तोपों का निर्माण किया गया है. इसके साथ ही साइबर सिक्योरिटी में बहुत से युवा और स्टार्टअप काम कर रहे हैं. पहले हम इसमें डिफेंसिव थे, लेकिन अब एग्रेसिव भी हो रहे हैं. एकेडमिक क्षेत्र के साथ मिलकर रिसर्च वर्क किया जा रहा है. 

उन्होंने कहा, 'देश के रक्षा साजो-सामान में स्वदेशी निर्भरता को 80 से 90 फीसदी तक ले जाना होगा. इसलिए जिस टेक्नोलॉजी में हम पिछड़ रहे हैं उनका भी भारत में विकास करना होगा ताकि हम इनके आयात की जगह इनका निर्यात कर सकें.' 

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चीन से मुकाबला करना है तो सबको जुटना होगा 

इस समिट में निजी कंपनी भारत फोर्ज के CMD बाबा कल्याणी ने कहा, 'चीन 2027 तक अपनी सेना को पूरी तरह से मॉडर्न बना रहा है. भारत को यदि उभरती नई विश्व व्यवस्था में प्रासंगिक रहना है तो देश के हर नागरिक, संस्था को तैयार होकर ऐसी टेक्नोलॉजी के विकास में लगना होगा जिससे हमारे डिफेंस सेक्टर को मदद मिले.'

उन्होंने कहा, 'डीआरडीओ एडवांस टेक्नोलॉजी का विकास कर रहा है लेकिन इस टेक्नोलॉजी और रिसर्च को उत्पादन में बदलना हम निजी क्षेत्र के लोग कर सकते हैं. हमने 100 फीसदी स्वदेश तोप बनाई हैं. हमने इलेक्ट्रॉनिक्स में कई स्वदेशी उत्पादों का भी विकास किया है. डिफेंस और स्पेस सेक्टर में विकसित बहुत सी ऐसी टेक्नोलॉजी हैं जिनकी सिविल क्षेत्र में भी इस्तेमाल हो सकता है जैसे ऑटोमोटिव, इंडस्ट्रियल, मशीनरी टेक्नोलॉजी. 

भविष्य की टेक्नोलॉजी में महारत लेनी होगी 

उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी में भारत काफी कुछ करने वाला है और यह डिफेंस एवं स्पेस सेक्टर में होगा. भविष्य की बात करें तो जैसे जेड इंजन भविष्य के फाइटर एयरक्रॉफ्ट के लिए चाहिए, यह महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी है जिसमें भारत को महारत हासिल करनी होगी. अगले 5-7 साल में भारत की रक्षा टेक्नोलॉजी का 10 गुना तक विकास होगा.

आईआईटी चेन्नै में प्रोफेसर (एयरोस्पेस) लेफ्टिनेंट जनरल पी रविशंकर ने कहा, 'हम फ्यूचर रेडी नहीं हैं, लेकिन हम फ्यूचर डिफेंस टेक्नोलॉजी में निवेश कर रहे हैं. आज मल्टी डोमेन वारफेयर होते हैं. अब स्पेस, हेल्थ, एयर, लैंड, साइबरस्पेस, न्यूक्लियर जैस न जाने कितने क्षेत्रों में जंग होती है. बहुत सारी विनाशक टेक्नोलॉजी भी आ गयी है.' 

लद्दाख से क्या सबक मिले 

प्रोफेसर रविशंकर ने हाल में सीमा पर लद्दाख की घटना से हमें कई सबक मिले हैं. उन्होंने कहा, 'हमें बैटलफील्ड ट्रांसपैरेंसी की जरूरत थी. हमें प्रोपल्सन, नेविगेशन, सेंसर, प्रीसीजन, आईएसआर, साइबर जैसी कई तरह की नई टेक्नोलॉजी की जरूरत है. मैन या अनमैन्ड एरियल सिस्टम, इन विजन सेंसर, एआई की जरूरत है. हमें रीच बढ़ाने की जरूरत है, हमें प्रीसीजन और नेटवर्क, एनर्जी, मोबिलिटी और सर्वाइविबिलिटी के लिए टेक्नोलॉजी की जरूरत है.'   

 

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