अमेरिका और ब्रिटेन के बीच डिएगो गार्सिया द्वीप को लेकर बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम के साथ नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक की. यह मुलाकात 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' के इतर हुई, जो दोनों देशों के बीच गहरे रणनीतिक संबंधों को दर्शाती है.
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के फैसले के बाद ब्रिटेन कानूनी रूप से चागोस द्वीप समूह (जिसमें डिएगो गार्सिया भी शामिल है) मॉरीशस को सौंपने के लिए बाध्य है. हालांकि, डिएगो गार्सिया पर स्थित रणनीतिक सैन्य अड्डे को लेकर अमेरिका और ब्रिटेन के बीच हालिया तनाव की खबरें आई हैं. भारत इस पूरे मामले में मॉरीशस के संप्रभुता के दावे का समर्थन करता रहा है.
विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, डॉ. रामगुलाम का अपने वर्तमान कार्यकाल में यह दूसरा भारत दौरा है. इससे पहले वे सितंबर 2025 में राजकीय यात्रा पर भारत आए थे. हाल ही में 9 फरवरी 2026 को दोनों नेताओं के बीच टेलीफोन पर भी बातचीत हुई थी.
बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-मॉरीशस एन्हांस्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की प्रगति की समीक्षा की.
इसके अलावा व्यापार और निवेश, समुद्री सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल सहयोग जैसे क्षेत्रों में चल रहे बहुआयामी सहयोग पर विस्तार से चर्चा हुई. उभरती प्रौद्योगिकियों के बढ़ते महत्व को देखते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और नवाचार आधारित क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श किया गया, ताकि समावेशी और सतत विकास को गति मिल सके.
प्रधानमंत्री मोदी ने मॉरीशस की विकास प्राथमिकताओं के समर्थन में भारत द्वारा दिए गए विशेष आर्थिक पैकेज के क्रियान्वयन की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि विकास साझेदारी के क्षेत्र में मॉरीशस भारत के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरा है, जो आपसी विश्वास और साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत की विजन महासागर और नेबरहुड फर्स्ट नीति के तहत भारत-मॉरीशस साझेदारी की निरंतर प्रासंगिकता को दोहराया. उन्होंने इस सहयोग को आपसी समृद्धि के साथ-साथ ग्लोबल साउथ की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण बताया. बैठक के अंत में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने तथा हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई.