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LAC पर कामयाब नहीं हो पाएगी चीन की कोई चाल! इस प्रोजेक्ट से लगेगा 'ड्रैगन' को तगड़ा झटका

चीन की विस्तारवादी नीति की वजह से पिछले डेढ़ साल में भारत और पड़ोसी देश के बीच रिश्ते बेहतर नहीं रहे हैं. पूर्वी लद्दाख की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर दोनों देशों के बीच कई बार आमना-सामना हो चुका है.

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पूर्वी लद्दाख में बॉर्डर के पास बेहतर हो रही मोबाइल कनेक्टिविटी (फाइल फोटो) पूर्वी लद्दाख में बॉर्डर के पास बेहतर हो रही मोबाइल कनेक्टिविटी (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पूर्वी लद्दाख में बॉर्डर के पास बेहतर हो रही मोबाइल कनेक्टिविटी
  • टीम ने समीक्षा करने के लिए डेमचोक क्षेत्र का दौरा किया

चीन की विस्तारवादी नीति की वजह से पिछले डेढ़ साल में भारत और पड़ोसी देश के बीच रिश्ते बेहतर नहीं रहे हैं. पूर्वी लद्दाख की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर दोनों देशों के बीच कई बार आमना-सामना हो चुका है. इन सबके बीच भारत सरकार भी बॉर्डर के आसपास तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए दिन-रात काम कर रही है. पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में भारत मोबाइल फोन और इंटरनेट कनेक्टिविटी के निर्माण और विस्तार के लिए तेजी से काम कर रहा है. रिपोर्ट्स की मानें तो रिलायंस जियो से अक्टूबर के अंत तक पूर्वी लद्दाख के डेमचोक में एलएसी और चुशूल गांव के पास 4जी नेटवर्क कवरेज की उम्मीद जताई जा रही है. इस पूरे मामले से अवगत लोगों ने आजतक/इंडिया टुडे को जानकारी दी है. बॉर्डर के पास कनेक्टिविटी बेहतर होने से ड्रैगन को तगड़ा झटका लगने की उम्मीद है.

विवाद के बीच कनेक्टिविटी का प्रोजेक्ट काफी अहम

चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच एलएसी के डेमचोक और चुशूल क्षेत्र के पास नेटवर्क कनेक्टिविटी का प्रोजेक्ट काफी महत्वपूर्ण है. एक अन्य सूत्र ने यह भी पुष्टि की है कि अधिकारियों की एक टीम ने इस साल सितंबर के मध्य में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास बनाए जा रहे नेटवर्क टॉवर की स्थिति की समीक्षा करने के लिए डेमचोक क्षेत्र का दौरा किया है. इसके अलावा, दूर-दराज के क्षेत्रों में फाइबर ऑप्टिकल केबल बिछाने का काम भी जारी है. इंडिया टुडे नेटवर्क के सूत्र ने कहा, "डेमचोक में चुनौतियां 19,300 फीट उमलिंगला दर्रा के माध्यम से दुनिया की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़क के माध्यम से जनशक्ति और सामग्री के रसद से साफ हैं."

लद्दाख में 54 मोबाइल टावर बनाने का काम जारी

दूर-दराज की जगहों में सैनिकों को मोबाइल कनेक्टिविटी देने के लिए विशेष रूप से बड़ी संख्या में साइटों को तैनात किया गया है, जहां पहले सैटेलाइट फोन कनेक्ट करने का एकमात्र विकल्प था. लद्दाख में 54 मोबाइल टावर बनाने का काम जारी है. पिछले दो वर्षों में यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (यूएसओएफ) के तहत करीब 70 टावरों को मंजूरी दी गई है, ताकि न केवल सशस्त्र बलों को बल्कि क्षेत्र के स्थानीय लोगों को भी मामूली दरों पर नेटवर्क कनेक्टिविटी दी जा सके.

दूर-दराज गांवों को भी नेटवर्क से किया गया कनेक्ट

जांस्कर, संकू, तैफसुरु, शार्गोल, न्योमा, नुब्रा, खालसी, खारू, द्रास, पैनामिक जैसे ब्लॉक के विभिन्न दूर-दराज के गांवों को भी जियो नेटवर्क द्वारा कवर किया गया है. लद्दाख में, जियो नेटवर्क 3 फाइबर मार्गों लेह - श्रीनगर, लेह - मनाली (हिमाचल) और लेह - गुरेज के जरिए से जुड़ा हुआ है. सूत्रों ने बताया है कि लेह-गुरेज नेटवर्क अक्टूबर के अंत तक चालू हो जाएगा.

महीनों से खराब हैं भारत-चीन के रिश्ते

गौरतलब है कि पिछले साल अप्रैल महीने में पूर्वी लद्दाख की एलएसी पर भारत-चीन के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी. उस वक्त चीन की सेना पीएलए के सैनिकों से गलवान घाटी में भी हिंसक झड़प हुई थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में खटास आ गई थी. हालांकि, बाद में पूर्वी लद्दाख के कई प्वाइंट्स से दोनों देशों के बीच डिस-एंगेजमेंट हुआ, जिसके बाद सेनाएं पीछे चली गईं. लेकिन इसके बावजूद भी अब भी कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच टकराव चल रहा है.

 

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