इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के नेतृत्व में शुक्रवार को डॉक्टरों ने पूरे देश में हड़ताल किया था. यह कदम सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (CCIM) के उस नोटिफिकेशन के बाद उठाया गया, जिसमें आयुर्वेद के डॉक्टर्स को भी सामान्य सर्जरी की इजाजत दी गई है.
आईएमए ने कहा कि देश के सभी जिलों में मॉडर्न मेडिसिन के डॉक्टर्स ने मिक्सोपैथी के खिलाफ प्रदर्शन किया है. मॉडर्न मेडिसिन के डॉक्टर्स ने हंगर स्ट्राइक और राज भवन की तरफ मार्च करके अपना विरोध प्रदर्शित किया. आईएमए ने दावा करते हुए कहा है कि देश में सभी गैर जरूरी सेवाओं के साथ ओपीडी बंद रही. कई जगहों पर सरकारी डॉक्टर्स ने भी मॉडर्न मेडिसिन के लिए अपनी एक जुटता दिखाई है.
रिम्स में OPD सेवा के लिए आने वाले मरीजों की बढ़ी परेशानी
देश सहित झारखंड राज्य के लगभग सभी निजी अस्पताल और जिला सदर अस्पताल के चिकित्सकों ने ओपीडी सेवा का बहिष्कार किया. इसका असर राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों पर भी दिखा. रिम्स के जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने भी IMA का समर्थन करते हुए ओपीडी सेवा का बहिष्कार किया.
रिम्स प्रबंधन ने सभी सीनियर डॉक्टरों को ओपीडी सेवा जारी रखने का निर्देश दिया था, लेकिन सुबह करीब 10:00 बजे रिम्स के जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के सदस्य और आईएमए के सदस्यों ने रिम्स पहुंचकर रिम्स के ओपीडी में मरीजों को सेवा दे रहे सीनियर डॉक्टर से भी ओपीडी का बहिष्कार करने का आग्रह किया. जिसके बाद रिम्स के कई ओपीडी विभाग को बंद कर दिया गया.
देखें: आजतक LIVE TV
झारखंड स्टेट हेल्थ एसोसिएशन ने भी बंद का किया समर्थन
राज्य के सबसे बड़े चिकित्सकों के संगठन झारखंड राज स्वास्थ्य सेवा संघ से जुड़े चिकित्सकों ने भी मिक्सोपैथी का विरोध करते हुए आईएमए का समर्थन किया है. प्रदेश सरकार के तहत आने वाले सभी चिकित्सक, सदर अस्पताल के मुख्यालय पर प्रदर्शन करते नजर आए. सभी चिकित्सकों ने सदर अस्पताल की ओपीडी सेवा को बाधित रखा. चिकित्सकों का कहना है मिक्सोपैथी के कारण मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ेगा.
क्या है मिक्सोपैथी?
केंद्र सरकार द्वारा मरीजों को ज्यादा से ज्यादा चिकित्सक मुहैया कराने के उद्देश्य से होम्योपैथ,आयुर्वेद,नेचुरोपैथी के डॉक्टरों को प्रशिक्षित कर उनके द्वारा सामान्य सर्जरी कराई जाएगी. एलोपैथ के डॉक्टर इसी का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि कठिन और लंबे समय की पढ़ाई के बाद किसी भी चिकित्सक को एमएस की डिग्री मिलती है, उसके बाद ही वह सर्जरी कर पाता है. साथ ही हर अलग-अलग विभाग के सर्जन होते हैं, वैसे सर्जन अपने क्षेत्र में दक्ष होते हैं और इसका फायदा मरीजों को मिल पाता है.