मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े संघर्ष के बीच वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के मद्देनजर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने बड़ा कदम उठाया है. एजेंसी के सभी 32 सदस्य देशों ने मिलकर आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में जारी करने पर सहमति जताई है.
आईईए ने अपने बयान में कहा कि रणनीतिक तेल भंडार की यह रिलीज हर सदस्य देश की राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार तय समयावधि में की जाएगी. इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति बढ़ाना और संभावित सप्लाई संकट के दौरान कीमतों में अस्थिरता को कम करना है.
IEA के 32 सदस्य देशों ने आपात भंडार से तेल जारी करने पर जताई सहमति
यह कदम एजेंसी की अब तक की सबसे बड़ी सामूहिक कार्रवाई मानी जा रही है. इससे पहले साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद आईईए सदस्य देशों ने बाजार में 182 मिलियन बैरल तेल जारी किया था. वर्तमान निर्णय उससे भी दोगुने से अधिक है.
आईईए के कार्यकारी निदेशक फेथ बिरोल ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियां अभूतपूर्व हैं और वैश्विक तेल बाजार गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है. उन्होंने कहा कि सदस्य देशों द्वारा आपातकालीन भंडार से इतनी बड़ी मात्रा में तेल जारी करने का फैसला वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरती है दुनिया की करीब 20% तेल आपूर्ति
मिडिल ईस्ट क्षेत्र विश्व के कुल कच्चे तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा उपलब्ध कराता है. ऐसे में क्षेत्र में बढ़ते तनाव से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है. खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं, क्योंकि दुनिया की करीब 20 प्रतिशत पेट्रोलियम आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है. यदि इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो वैश्विक तेल कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
आईईए का मुख्यालय पेरिस में है और यह वैश्विक आपूर्ति संकट के दौरान सदस्य देशों के बीच समन्वय स्थापित कर रणनीतिक तेल भंडार जारी करने का काम करता है. सदस्य देशों के लिए यह अनिवार्य है कि वो कम से कम 90 दिनों के शुद्ध तेल आयात के बराबर आपातकालीन भंडार बनाए रखें.
इतिहास में आईईए ने कई बार वैश्विक संकट के दौरान इस तरह के कदम उठाए हैं. साल 2011 में लीबिया के गृहयुद्ध के दौरान करीब 60 मिलियन बैरल तेल जारी किया गया था, जबकि 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद 240 मिलियन बैरल तेल बाजार में उतारा गया था.