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डिटेंशन सेंटर को लेकर गृह मंत्रालय ने दिया जवाब, कहा- ये काम राज्य का, केंद्र के पास नहीं होती डिटेल

गृह मंत्रालय ने लोकसभा में कहा कि अवैध रूप से आए ऐसे अप्रवासी लोग जिनकी नागरिकता की पुष्टि की जानी है, उनके मूवमेंट को रोकने के लिए राज्य सरकारों की ओर से स्थानीय जरूरतों के मुताबिक डिटेंशन सेंटर्स बनाए जाते हैं.

डिटेंशन सेंटर को लेकर गृह मंत्रालय ने लोकसभा में दिया जवाब (पीटीआई) डिटेंशन सेंटर को लेकर गृह मंत्रालय ने लोकसभा में दिया जवाब (पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • डिटेंशन सेंटर को लेकर गृह मंत्रालय ने दिया जवाब
  • 'राज्य सरकार स्थानीय जरूरत के हिसाब से बनाती है सेंटर्स'
  • 'केंद्र डिटेंशन सेंटर की जानकारी अपने पास नहीं रखता'

कोरोना संकट के बीच संसदीय कार्यवाही जारी है और मंगलवार को दूसरे दिन लोकसभा में गृह मंत्रालय ने बताया कि अवैध रूप से आए अप्रवासियों के मूवमेंट पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकारों की ओर से डिटेंशन सेंटर्स या कैंप बनाए जाते हैं. और इस संबंध में लोगों की जानकारी केंद्र के पास नहीं होती है.

एक सवाल के जवाब में गृह मंत्रालय ने लोकसभा में कहा कि अवैध रूप से आए ऐसे अप्रवासी लोग जिनकी नागरिकता की पुष्टि की जानी है, उनके मूवमेंट को रोकने के लिए राज्य सरकारों की ओर से स्थानीय जरुरतों के मुताबिक डिटेंशन सेंटर्स बनाए जाते हैं. इस संबंध में केंद्र की ओर से किसी भी सेंटर या किसी व्यक्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं रखी जाती है.

वेतन कटौती का बिल पास  

इस बीच लोकसभा ने आज मंगलवार को एक विधेयक पारित किया, जिसमें 2 साल के लिए सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास (एमपीलैड) निधियों को निलंबित करने का प्रावधान है. यही नहीं सांसदों के वेतन में एक साल के लिए 30 फीसदी कटौती करने को भी लोकसभा की मंजूरी मिल गई है.

इस धनराशि का उपयोग कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न स्थिति से मुकाबले के लिए किया जाएगा. संसद सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन (संशोधन) विधेयक, 2020 मॉनसून सत्र के दूसरे दिन पारित किया गया.

इससे पहले अप्रैल में केंद्रीय मंत्रिपरिषद की ओर से वर्ष 2020-21 और 2021-22 में संसद के सभी सदस्यों के वेतन में 30 फीसदी कटौती और एमपीलैड के निलंबन को मंजूरी दी गई थी.


 

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