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सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ा सकती है सरकार, दो-दो साल बढ़ सकता है कार्यकाल

सरकार संसद के शीतकालीन सत्र से पहले जजों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने पर फैसला ले सकती है. इस संबंध में बार काउंसिल भी सरकार को पत्र लिख चुका है. हाई कोर्ट के जज 62 और सुप्रीम कोर्ट के जज 65 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होते हैं. सरकार के फैसले के बाद जजों की सेवानिवृत्ति उम्र में दो-दो साल का विस्तार होगा.

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सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट

देश के उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में जजों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने को लेकर किसी भी प्रस्ताव पर विचार से इनकार कर रही केंद्र सरकार का मन शायद अब बदल रहा है. सूत्रों के मुताबिक देशभर में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने को लेकर सरकार गंभीर है. सरकार संसद के शीतकालीन सत्र से पहले ही जजों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने पर कोई फैसला ले सकती है. अभी हाई कोर्ट के जज 62 साल और सुप्रीम कोर्ट के जज 65 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होते हैं. 

सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस मामले में अध्यादेश लेकर आ सकती है. यहां ध्यान देने वाली बात है कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा चीफ जस्टिस यू यू ललित का मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यकाल आठ नवंबर तक है. अगर यह फैसला उनके सेवानिवृत्ति से पहले आ जाता है तो इससे सबसे पहले जस्टिस ललित ही लाभान्वित होंगे. इसके बाद उनका कार्यकाल 8 नवंबर 2024 तक बढ़ सकता है.

सूत्रों की मानें तो उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की रिटायरमेंट आयु बढ़ाने पर ऐसी कोई कानूनी अड़चन नहीं आएगी. हालांकि इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 124 (2) और 217 (1) में संशोधन करना पड़ेगा.  इन अनुच्छेदों में न्यायाधीशों की रिटायरमेंट उम्र का प्रावधान और नियम का विस्तृत उल्लेख है. सरकार इसके लिए अध्यादेश लाने पर भी विचार कर रही है, जिसे बाद में संसद के शीतकालीन सत्र में पेश कर पारित किया जा सके.

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बता दें कि संविधान का अनुच्छेद 124 (2)  सुप्रीम कोर्ट और 217(1) हाई कोर्ट के जजों की सेवानिवृत्ति की उम्र का निर्धारण करते हैं. 

पूर्व चीफ जस्टिस रमना भी उठा चुके हैं आवाज

बीते महीने रिटायर हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमना ने भी कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के जज 65 वर्ष की आयु तक स्वस्थ और फिट रहते हैं. रिटायरमेंट के मौजूदा नियमों के तहत इतने अनुभव के बावजूद उनके रिटायर होने से उनके अथाह अनुभव का लाभ देश की न्यायपालिका को नहीं मिल पाता.

हाल ही में अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने भी जजों की रिटायरमेंट आयु बढ़ाने की हिमायत की थी. उन्होंने कहा था कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ानी चाहिए. 

बार काउंसिल ने भी सरकार को पत्र लिखा था

इस बीच बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी सरकार और मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कहा था कि देश के सभी बार काउंसिल से विचार विमर्श करने के बाद उन्होंने सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें सरकार से आग्रह किया गया है उच्च न्यायपालिका में जजों की सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने पर तत्काल फैसले का समय आ गया है. 

बार काउंसिल ने अपने पत्र में न्यायाधीशों की रिटायरमेंट उम्र दो वर्ष और बढ़ाने का आग्रह किया गया. इस प्रस्ताव पर अमल होता है तो हाई कोर्ट के जजों की सेवानिवृत्ति की आयु 64 साल और सुप्रीम कोर्ट के जजों की आयु 67 साल हो जाएगी. इसका फायदा सभी जजों को भी मिलेगा इसलिए किसी भी जज की वरिष्ठता को लेकर भी कोई दिक्कत नहीं आएगी.

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जजों की रिटायरमेंट उम्र को लेकर एक बार हुआ संशोधन

देश में जजों के रिटायरमेंट की आयुसीमा को लेकर अब तक एक बार ही संशोधन हुआ है. 1963 में अनुच्छेद 217 (1) में 114वां संविधान संशोधन किया गया था, जिसमें हाई कोर्ट के जजों की सेवानिवृत्ति की आयुसीमा 60 से बढ़ाकर 62 की गई थी. इसके बाद 2010 में हाई कोर्ट जजों की रिटायरमेंट की उम्र सीमा 65 वर्ष करने के लिए फिर अनुच्छेद 267 (1) में संशोधन बिल लाया गया था लेकिन लोकसभा का सत्र खत्म होने की वजह से वह रद्द हो गया था. 

इसके बाद 2002 में संविधान समीक्षा के लिए बने जस्टिस आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट उम्र में तीन साल की बढ़ोतरी करने की सिफारिश की थी.

साल 1974 में भी राष्ट्रीय विधि आयोग ने हाई कोर्ट के जजों की आयु में तीन साल का इजाफा कर इसे 65 और सुप्रीम कोर्ट के जजों की सेवानिवृत्ति की उम्र 68 साल करने की सिफारिश की थी. लेकिन 48 साल तक विधि आयोग की सिफारिशें यूं ही पड़ी रहीं.

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