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बदल जाएगी कोलकाता मेट्रो की तस्वीर! हाइटेक रेक बनाने के लिए रेलवे देगी 6000 करोड़ रुपये

कोलकाता मेट्रो के भविष्य के रेक डिजाइनिंग पर काम कर रही है,. इन नए एसी रेक का उत्पादन इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई में किया जाएगा. इन एसी रेक में बंगाल की झलक दिखाई देगी. यहां के ब्राइडल और टेराकोटा कलाकृति से प्रेरणा लेते हुए ये रेक नोज केन में डिजाइन होंगी.

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Kolkata metro
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40 साल से कोलकाता की लाइफलाइन बनी मेट्रो में हाल के कुछ सालों में कई बदलाव दिखाई दिए. इसी कड़ी में जल्द ही कोलकाता और हावड़ा को जोड़ने के लिए हुगली नदी के नीचे मेट्रो चलने जा रही है. हाई क्लास फैसलिटीज के लिए मेट्रो प्रशासन की तरफ से कई सारे प्रयोग भी किए जा रहे हैं. इन्हीं प्रयोगों के तहत कोलकाता मेट्रो के भविष्य के रेक डिजाइनिंग पर काम कर रही है,. इन नए एसी रेक का उत्पादन इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई में किया जाएगा.

इन रेक में दिखेगी बंगाल की झलक

इन एसी रेक में बंगाल की झलक दिखाई देगी. यहां के ब्राइडल और टेराकोटा कलाकृति से प्रेरणा लेते हुए ये रेक नोज केन में डिजाइन होंगी. इन नए रेक के प्रत्येक कोच में बंगाल का स्थानीय कला और शिल्प भी नजर आएगा. प्रत्येक कोच के दो किनारों पर यूएसबी चार्जिंग पोर्ट प्रदान किए जाएंगे. इन रेक के कोने वाली सीमित जगहों पर खड़े होने के लिए भी सीटें दी जाएंगी. इन सीटों के नीचे यात्री अपना सामान भी रख सकते हैं. यात्रियों की सुरक्षा के लिए बेहतर ग्रैब हैंडल और हैंडल लूप के साथ-साथ एंटी-स्किड फर्श और अग्निशामक यंत्र दिए किए जाएंगे. आपातकालीन स्थिति में यात्री टॉक टू ड्राइवर यूनिट के माध्यम से मोटरमैन के साथ बातचीत कर सकेंगे. प्रत्येक कोच की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे.

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प्रत्येक कोच में होगी हाई क्लास सुविधाएं

पीक आवर्स के दौरान भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए, यात्रियों को वेस्टिब्यूल पर खड़े न होने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए बेहतर रूफ ग्रैब हैंडल प्रदान किए जाएंगे. इन्फोटेनमेंट के लिए रेक के अंदर विशेष डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड भी लगाए जाएंगे. कोचों के विशेष कोव लाइटिंग की भी व्यवस्था की जाएगी. यात्रियों की सुविधा के लिए रेक के अंदर दरवाजे के प्रवेश द्वारों और बैठने की बेंचों के ऊपर मजबूत रेलिंग और ग्रैब पोल उपलब्ध कराए जाएंगे. 

2026 तक कोलकाता रेलवे के बेड़े में शामिल हो जाएंगे ये रेक

भविष्य के ये रेक साल 2026 के आसपास मेट्रो के बेड़े में शामिल किए जा सकते हैं. चरणों में 85 नए रेक को मेट्रो ने अपने बेड़े में शामिल करने की योजना बनाई है. यात्रियों की डिमांड को देते हुए 46 रेक (32 ब्रॉड गेज और 14 मानक गेज) के वर्तमान बेड़े को 131 रेक (114 ब्रॉड गेज और 17 मानक गेज) तक बढ़ाया जाएगा. इन रेक की खरीद के लिए 6000 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी.कोलकाता मेट्रो रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कौशिक मित्रा ने इंडिया टुडे को बताया कि ये ड्रीम रेक 2026 तक मेट्रो के बेड़े में शामिल हो जाएंगे.

 

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