स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दूसरे चरण में नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के ड्राफ्ट मतदाता सूची से लगभग 6.5 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं. बताया जा रहा है कि एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने से पहले इन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाताओं की कुल संख्या 50.90 करोड़ थी जो अब घटकर 44.40 करोड़ हो गई है.
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, मसौदा सूची से जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें 'ASD' यानी अनुपस्थित, शिफ्टेड और मृत/डुप्लिकेट (Absent, Shifted, Dead/Duplicate) कैटेगरी में रखा गया है.
अधिकारियों ने पहले बताया था कि SIR अभियान में शहरी क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में एनुमरेशन फॉर्म की संग्रहण दर काफी कम रही है.
एसआईआर अभ्यास के बाद मंगलवार को प्रकाशित उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची के मसौदे में 2.89 करोड़ मतदाताओं को बाहर कर दिया गया और 12.55 करोड़ मतदाताओं को बरकरार रखा गया.
UP में काटे गए 2.89 नाम
वहीं, आयोग ने बताया कि मंगलवार को जारी की गई यूपी की ड्राफ्ट मतदाता सूची में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम काट दिए है. इसके बाद अब यूपी में 12.55 करोड़ मतदाता हैं.
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ये 2.89 करोड़ (18.70 प्रतिशत) नाम मृत्यु, स्थायी स्थानांतरण या डुप्लिकेट पंजीकरण के कारण सूची से बाहर किए गए. इनमें मृत मतदाताओं की संख्या 46.23 लाख, स्थानांतरित 2.17 करोड़ और डुप्लिकेट 25.46 लाख है.
9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में प्रक्रिया जारी
आपको बता दें कि SIR का दूसरा फेज 4 नवंबर से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में शुरू हुआ था. जबकि असम में अलग से स्पेशल रिवीजन चल रहा है.
राज्यों में जारी अंतिम मतदाता सूची विज्ञप्ति (एसआईआर) को कट-ऑफ तिथि के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, ठीक उसी तरह जैसे चुनाव आयोग ने गहन संशोधन के लिए बिहार की 2003 की मतदाता सूची का इस्तेमाल किया था. अधिकांश राज्यों में मतदाता सूची का अंतिम एसआईआर 2002 और 2004 के बीच था.
आयोग का कहना है कि एसआईआर का प्राथमिक उद्देश्य जन्मस्थान की जांच करके विदेशी अवैध प्रवासियों को बाहर निकालना है. बांग्लादेश और म्यांमार सहित विभिन्न राज्यों में अवैध प्रवासियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई के मद्देनजर ये कदम महत्वपूर्ण हो जाता है.