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6 महीने में 30 बड़े बदलाव, जानिए चुनाव आयोग ने क्या-क्या कदम उठाए?

चुनाव आयोग ने पोस्टल बैलेट और EVM के वोटों की गिनती के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब से दूसरे और अंतिम दौर की वोटों की गिनती भी तब शुरू की जाएगी जब पहले पोस्टल बैलेट की काउंटिंग पूरी हो जाएगी.

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बीते छह महीने में चुनाव आयोग के 30 बड़े बदलाव (Photo: PTI)
बीते छह महीने में चुनाव आयोग के 30 बड़े बदलाव (Photo: PTI)

चुनाव आयोग ने बीते छह महीनों में 30 ऐसे बदलाव किए हैं, जिनसे आयोग ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, सरलता और सटीकता बढ़ाने की पहल की है. 

आयोग का पहला बदलाव मतदाताओं की सुविधा के लिए आयोग ने मतदान के दिन सुविधा के लिए मतदान केंद्रों पर मतदाताओं के लिए मोबाइल जमा कराने की सुविधा शुरू करना है. आयोग का एक बदलाव मतदान केंद्रों पर भीड़ को नियंत्रित करने से जुड़ा है. भीड़ को कम करने के लिए प्रति मतदान केंद्र पर अधिकतम डेढ़ हजार की बजाय 1200 से अधिक मतदाता ना होने का बेंचमार्क बनाया.

आयोग ने मतदाता सूचना पर्ची (VIS) का डिजाइन बदलते हुए इसमें मतदाता संख्या और भाग संख्या भी अधिक प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है. साथ ही मतदाता सुविधा के लिए उम्मीदवार बूथों से 100 मीटर की दूरी पर टेबल लगाने की सुविधा दी गई है.

चुनाव आयोग ने बेहतर दृश्यता के लिए ईवीएम में उम्मीदवारों की रंगीन तस्वीरें और मोटे अक्षरों में नाम लिखे होने की शुरुआत की. यानी आयोग ने चुनाव प्रणालियों को मजबूत करने और साफ-सफाई करने पर जोर रखा है. 

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एक फैसला चरणबद्ध ढंग से 808 पंजीकृत किन्तु गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) को सूची से हटाना है. अभी भी कई दल पाइपलाइन में हैं, जिनकी जांच और तहकीकात जारी है. ये दल पंजीकरण की आवश्यक शर्तों को पूरा करने में विफल रहे हैं. साथ ही संविधान, आरपीए के अनुरूप आयोग के 28 हितधारकों की भूमिकाओं की पहचान और मानचित्रण भी है. इन बदलावों को 1950,1951 निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960, चुनाव संचालन नियम 1961 के मुताबिक किया गया है. 

आयोग हरेक बीएलओ को मानक फोटो पहचान पत्र जारी करेगा. तकनीकी और प्रशासनिक एसओपी के तहत चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद ईवीएम की मेमोरी चिप और माइक्रो कंट्रोलर की जांच और सत्यापन के लिए प्रक्रिया में बदलाव किया गया. ईसीआई के कानूनी को मजबूत और फिर से उन्मुख करने के लिए कानूनी सलाहकारों और सीईओ के साथ राष्ट्रीय सम्मेलनकी रूपरेखा बनाकर उस पर अमल शुरू किया है.

भारत की साझेदारी को मजबूत करने के लिए दुनिया भर के चुनाव प्रबंधन निकायों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं. राजनीतिक दलों के साथ सक्रिय जुड़ाव के लिए देश भर में ईआरओ, डीईओ और सीईओ स्तरों पर 12.4,719 सर्वदलीय बैठकें आयोजित की गईं. 25 मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय/राज्य राजनीतिक दलों के साथ निर्वाचन आयोग की बैठकें आयोजित की गईं. प्रौद्योगिकी का बढ़ता उपयोग.

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ईसीआईनेट का शुभारंभ किया गया, जो मतदाताओं के लिए 40+ ऐप/वेबसाइटों को समाहित करने वाला वन स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म है और इसके अन्य हितधारक हैं. मतदान प्रक्रिया की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए सभी मतदान केंद्रों पर 15 मतदान और मतगणना की 100 प्रतिशत वेब कास्टिंग.पीठासीन अधिकारी (पीआरओ) हर दो घंटे में नए ईसीआईएनईटी ऐप पर सीधे मतदाता मतदान के आंकड़े दर्ज करेंगे. इससे मतदान के दिन समय अंतराल को कम करने में सीधी और सटीक मदद मिलेगी.

निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर चुनाव संबंधी डेटा तेजी से साझा करने के लिए सुव्यवस्थित सूचकांक कार्ड और सांख्यिकीय रिपोर्ट तैयार की गई है. फॉर्म 17सी और ईवीएम के बीच बेमेल होने के प्रत्येक मामले में वीवीपैट की गिनती सुनिश्चित की जाएगी.इससे मतदाता सूची और मतगणना में ज्यादा सटीकता आएगी.

बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए और अगर छूट गया तो उसका ब्योरा क्या है? लगभग 2 राज्यों में पहली बार 4 राज्यों में उपचुनावों से पहले विशेष सारांश पुनरीक्षण सुनिश्चित किया गया है. ईआरओ को पंजीकरण के बारे में समय पर जानकारी प्राप्त करने के लिए मृत्यु पंजीकरण डेटा को स्थानीय निकायों के साथ जोड़ा गया है.

अलग-अलग व्यक्तियों के लिए एक ही ईपीआईसी नंबर समाप्त कर दिया गया.एसएमएस के साथ मतदाता सूची में अपडेट होने के 15 दिनों के भीतर ईपीआईसी वितरण सुनिश्चित करने के लिए नई एसओपी. डिलीवरी के प्रत्येक चरण में अधिसूचना सुनिश्चित की गई है. इसके लिए पहली बार बीएलओ स्तर पर क्षमता निर्माण किया गया. 7,000 से अधिक बीएलओ और बीएलओ पर्यवेक्षकों को आईआईआईडीईएम, नई दिल्ली में प्रशिक्षित किया गया है.

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बिहार के सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) के लिए प्रशिक्षण. तमिलनाडु और पुडुचेरी में पहली बार आईआईआईडीईएम, नई दिल्ली में आयोजित किया गया. 36 राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के सीईओ के कार्यालयों के मीडिया और संचार अधिकारियों का प्रशिक्षण कराया गया. बिहार में चुनाव की तैयारियों के लिए पुलिस अधिकारियों का प्रशिक्षण शुरू किया.

ईसीआई में अनुशासन लागू करने और सभी हेडक्वार्टर में वर्कफ़्लो का डिजिटलीकरण और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की सुनिश्चितता की गई है. बीएलओ पर्यवेक्षकों और मतदान/मतगणना कर्मचारियों के लिए पारिश्रमिक दोगुना किया गया. इसके लिए सीएपीएफ, निगरानी दल और माइक्रो-ऑब्जर्वर तैनात किए गए. ताजा बदलाव मतगणना को लेकर है. यानी डाक मतपत्रों की गिनती ईवीएम के साथ समानांतर तो चलेगी लेकिन फाइनल यानी अंतिम दौर के नतीजे तभी घोषित किए जाएंगे, जब डाक मतपत्रों की गिनती पूरी ना हो जाए.

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