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GAVI बोर्ड के सदस्य चुने गए केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन, टीकाकरण अभियान में है अहम रोल

गावी जिंदगियां बचाने, गरीबी घटाने और दुनिया को महामारी के खतरे से बचाने के अपने मिशन के रूप में काम करते हुए 822 मिलियन बच्चों के टीकाकरण में मदद कर चुका है.

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन (फोटो- पीटीआई)
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन (फोटो- पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 820 मिलियन बच्चों का टीकाकरण करवा चुकी है संस्था
  • गरीब देशों में वैक्सीन कार्यक्रम में है अहम रोल

भारत के स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन को ग्लोबल अलायंस फॉर वैक्सीन्स एंड इम्युनाइजेशन (GAVI) के बोर्ड के सदस्य के रूप में नामित किया गया है. GAVI एक अतंरराष्ट्रीय संस्था है. इसका गठन साल 2000 में किया गया था. इस संस्था का उद्देश्य दुनिया के गरीब देशों में रहने वाले बच्चों को वैसी बीमारियों का टीका मुहैया कराना है, जिन्हें वैक्सीन के जरिए रोका जा सकता है. 

कोरोना वैक्सीन के इंतजार के बीच ये भारत के लिए एक गौरवान्वित करने वाली खबर है. स्वास्थ्य मंत्रालय से जारी एक बयान में कहा गया कि ग्लोबल अलायंस फॉर वैक्सीन्स एंड इम्युनाइजेशन ने इस संस्था के बोर्ड पर डॉ हर्षवर्धन की नियुक्ति की है. 

डॉ हर्षवर्धन इस बोर्ड में दो साल के लिए रहेंगे. यहां उनका कार्यकाल 1 जनवरी 2021 से लेकर 31 दिसंबर 2023 तक होगा. डॉ हर्षवर्धन गावी बोर्ड में दक्षिण पूर्वी क्षेत्र के क्षेत्रीय कार्यालय (सीरो) पश्चिमी प्रशांत क्षेत्रीय कार्यालय (डब्ल्यूपीआरओ) का प्रतिनिधित्व करेंगे. वर्तमान में इस पद की जिम्मेदारी म्यामांर के मींत हत्वे के पास है. 

इस संगठन में सरकारी निकायों के अलावा निजी संस्थाओं से जुड़े विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाता है. इसका नतीजा ये होता है कि संस्था अनुभवों की विस्तृत श्रृंखला मिलती है. 

बता दें कि गावी बोर्ड की मीटिंग साल में दो बार होती है. बोर्ड के सदस्य एक बार जून में तो दूसरी बार नवंबर या दिसंबर में बैठते हैं. गावी बोर्ड के प्रमुख दायित्वों की चर्चा करें तो बोर्ड वैक्सीन एलायंस को रणनीतिक दिशानिर्देश देता है और उसके कार्यान्वयन की निगरानी करता है. 

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गावी जिंदगियां बचाने, गरीबी घटाने और दुनिया को महामारी के खतरे से बचाने के अपने मिशन के रूप में काम करते हुए 822 मिलियन बच्चों के टीकाकरण में मदद कर चुका है. ये बच्चे दुनिया के निर्धन देशों के थे. इस टीकाकरण अभियान की वजह से 1 करोड़ 40 लाख संभावित मौतों पर रोक लगी है.  

 

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