दिल्ली दंगों की साजिश मामले में आरोपी शरजील इमाम के चाचा ने सुप्रीम कोर्ट के जमानत देने से इनकार करने के फैसले पर हैरानी जताई है. हालांकि, उन्होंने कहा कि वह कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस मामले में अपना फैसला सुनाया. अदालत ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं, जबकि पांच अन्य आरोपियों को जमानत दे दी. कोर्ट ने कहा कि मामले में सभी आरोपी एक समान नहीं हैं और भागीदारी की पदानुक्रम (hierarchy of participation) के आधार पर फैसला लिया गया है. अदालत के अनुसार, शरजील इमाम और उमर खालिद अन्य आरोपियों की तुलना में अलग स्थिति में हैं.
'मैं फैसले से सदमे में हूं...'
जहानाबाद में पत्रकारों से बात करते हुए शरजील इमाम के चाचा अरशद इमाम ने कहा, 'मैं फैसले के बारे में जानकर बहुत सदमे में हूं. मुझे बहुत उम्मीद थी कि इस बार अदालत जमानत दे देगी, क्योंकि बहस के दौरान हर बिंदु से लग रहा था कि शरजील निर्दोष है. फिर भी, एक भारतीय नागरिक के रूप में मैं अदालत के फैसले का सम्मान करता हूं.'
'मेरा भतीजा निर्दोष है'
हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि शरजील को अंततः जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि मेरा भतीजा निर्दोष है और चाहे कितनी भी देरी हो, उसे जमानत जरूर मिलेगी. मैं अदालत का फैसला पढूंगा. इसके बाद अपने वकील से विस्तार से चर्चा करूंगा और फिर प्रक्रिया दोबारा शुरू करूंगा.'
कोर्ट के फैसले का सम्मान
जब उनसे पूछा गया कि इस मामले में अन्य आरोपियों को जमानत मिलने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'दो आरोपियों को जमानत क्यों नहीं मिली, ये केवल अदालत ही जानती है. हालांकि, हर भारतीय नागरिक का कर्तव्य है कि वह अदालत के फैसले का सम्मान करे, चाहे वह उसके पक्ष में हो या नहीं.'
इस मामले में सभी आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है. फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे.
बता दें कि शरजील इमाम को सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दिए गए भाषणों के लिए 28 जनवरी 2020 को गिरफ्तार किया गया था. बाद में अगस्त 2020 में उन्हें बड़े षड्यंत्र के मामले में गिरफ्तार किया गया. उमर खालिद को 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था.