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Rapid Metro: दिल्ली-मेरठ रेपिड मेट्रो के काम को मिलेगी और तेज स्पीड, तीसरी सुदर्शन ने शुरू की टनलिंग

Rapid Metro Updates: दिल्ली की पहली रेपिड रेल का निर्माण कार्य जोरों पर है. आनंद विहार से लेकर साहिबाबाद की ओर तीसरी टनल बनने का काम भी शुरू हो चुका है, इसके साथ ही आनंद विहार से न्यू अशोक नगर की ओर 2 टनल बोरिंग मशीन का काम पहले से चालू है.

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Rapid Rail Construction Rapid Rail Construction
स्टोरी हाइलाइट्स
  • साहिबाबाद से दुहाई के बीच 17KM काम पूरा
  • रेपिड रेल के लिए टनल निर्माण में आई गति

Rapid Metro Latest Updates: भारत सरकार द्वारा दिल्ली में पहली रेपिड रेल के प्रस्ताव पर मंजूरी मिलने का बाद निमार्ण कार्य जोरो-शोरो पर है. दिल्ली में कई जगह रेपिड रेल को लेकर टनल बनवाई जा रही हैं. दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर पर आनंद विहार स्टेशन से साहिबाबाद की ओर टनल बोरिंग का काम शुरू कर दिया गया है. वहीं, आनंद विहार स्टेशन से न्यू अशोक नगर आरआरटीएस स्टेशन की ओर 2 सुर्दशन टनल बोरिंग मशीन (TBM) का काम पहले से चल रहा है. आनंद विहार से साहिबाबाद की ओर यह तीसरी सुदर्शन टीबीएम है.

दिल्ली से उत्तर प्रदेश तक कनेक्ट होगी रेपिड रेल

यह पूरा रूट 82 किलोमीटर का है, जिसमें से 14 किलोमीटिर का हिस्सा दिल्ली में आता है और बाकी का 69 किलोमीटर का हिस्सा उत्तर प्रदेश में आता है. दिल्ली के 14 किलोमीटर के हिस्से में जंगपुरा, सराय काले खां, न्यू अशोक नगर और आनंद विहार चार स्टेशन हैं. आनंद विहार स्टोशन से दिल्ली की ओर न्यू अशोक नगर और गाजियाबाद में ओर साहिबाबाद एलिवेटेड आरआरटीएस स्टेशन बनाए जा रहे हैं.  

2 टनल बनाने का काम जारी, तीसरे की शुरुआत

आनंद विहार स्टेशन और नयू अशोक नगर के बीच 3 किलोमीटर लंबी 2 टनल बनाने का कार्य चल रहा है. साथ ही आनंद विहार से साहिबाबाद की ओर करीब 2 किमी लंबी टनल बनाई जाएगी, जो वैशाली मेट्रो स्टेशन के सामने समाप्त होगी. तीसरी सुदर्शन (टीबीएम) के लिए आनंद विहार स्टेशन के नॉर्थ में लॉन्चिंग शाफ़्ट बनाई गई है, जहां से टनल बनाने की शुरुआत की गई है. वहीं, टनल के आखिरी छोर पर वैशाली मेट्रो स्टेशन के सामने रिट्रीविंग शाफ्ट बनाई जा रही है, जहां से सुदर्शन (टीबीएम) को टनल बनाने के बाद बाहर निकाला जाएगा. आनंद विहार से साहिबाबाद की ओर भी समानान्तर दो टनल बनेंगी जो ट्रेन के आने और जाने के लिए होंगी.

2023 तक शुरू होगा रेपिड रेल का ट्रायल

साहिबाबाद से दुहाई के बीच 17 किलोमीटर का रूट मार्च 2023 तक चालू हो जाएगा और इसका ट्रायल रन इसी साल शुरू होने की उम्मीद है. वर्तमान में प्राथमिकता खंड का सिविल निर्माण कार्य अपने आखिरी चरण में पहुंच चुका है.

Rapil Rail

पहली बार बनने जा रही है देश में इतनी बड़ी टनल

टीबीएम द्वारा टनल सैगमेंट्स की मदद से जमीन के अंदर टनल के रिंग बनाए जाते हैं. टनल रिंग बनाने के लिए आमतौर पर सात (7) टनल सेगमेंट्स का उपयोग किया जाता है. एनसीआरटीसी के कास्टिंग यार्ड में सुनिश्चित और गुणवत्ता नियंत्रण के साथ सुरंग सेगमेंट्स का निर्माण किया जा रहा है. बड़े रोलिंग स्टॉक और 180 किमी प्रति घंटे की उच्च डिजाइन गति के कारण आरआरटीएस की टनल को 6.5 मी. व्यास का बनाया जा रहा है. मेट्रो प्रणालियों की तुलना में देश में पहली बार इतने बड़े आकार की टनल का निर्माण किया जा रहा है.

टनल के अंदर आपातकालीन निकास की सुविधा

आरआरटीएस में जमीन के अंदर ट्रेनों के आने-जाने के लिए समानान्तर दो टनल बनाई जाएंगी. इसके साथ ही यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न सुरक्षा उपायों का भी प्रावधान है. किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा के लिए भूमिगत हिस्सों में आपातकालीन निकास (Emergency Exit) बनाए जाएंगे. इसमें लगभग हर 250 मीटर पर एक क्रॉस-पैसेज भी होगा. वेटिलेशन की सुविधा के साथ इसमें 60 सेमी-90 सेमी चौड़ा एक साइड वॉकवे भी होगा जो रख-रखाव गतिविधियों ( Maintenance) में सहायता प्रदान करेगा साथ ही एक (Emergency Exit) के काम भा आएगा.

रेपिड मेट्रो चलने से होंगे ये फायदे

जमीन के अंदर सुरंग बनाने के लिए लगभग 90 मीटर लंबी सुदर्शन (टीबीएम) का प्रयोग किया जा रहा है. इस टीबीएम में कटर हेड, फ्रंट शील्ड, मिडिल शील्ड, टेल शील्ड, इरेक्टर, स्क्रू कंवेयर और कई अन्य महत्वपूर्ण भाग शामिल हैं. इस परियोजना के पीछे का महत्वपूर्ण कारण राष्ट्रीय राजधानी की भीड़भाड़ को कम करना, वाहनों के यातायात और वायु प्रदूषण को कम करना और संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करना हैं.


 

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