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राजनाथ सिंह ने बताया LAC पर क्या हुआ, भारतीय सैनिकों की कैसी है तैयारी? जानें बड़ी बातें

राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा कि सीमावर्ती इलाकों में विवादों का हल शांतिपूर्ण ढंग से करने के लिए भारत प्रतिबद्ध है. मैंने 4 तारीख को चीन के रक्षा मंत्री के सामने स्थिति को रखा. मैंने यह भी कहा कि हम इस मुद्दे को शांति से हल करना चाहते हैं. हमने यह भी कहा कि हम भारत की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं.

भारत की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध (फाइल फोटो-PTI) भारत की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भारत-चीन तनाव पर रक्षा मंत्री ने दिया बयान
  • 'भारत की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा को प्रतिबद्ध'
  • देश के जवानों ने सीमा पर अपना शौर्य दिखाया- राजनाथ

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को भारत-चीन के बीच लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल लाइन (एलएसी) पर जारी तनाव को लेकर लोकसभा में बयान दिया. चीन से तनाव के मुद्दे पर विपक्ष लगातार सरकार से बयान की मांग करता रहा है. आइए जानें रक्षा मंत्री के बयान की बड़ी बातें.

- लोकसभा में राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख गए और सैन्य जवानों से मुलाकात की. उन्होंने यह संदेश भी दिया था कि वह बहादुर जवानों के साथ खड़े हैं. मैंने भी लद्दाख जाकर जवानों के साथ समय बिताया. मैं यह बताना चाहता हूं कि उनके साहस शौर्य और पराक्रम को महसूस भी किया था. आप जानते हैं कर्नल संतोष ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था.

- चीन से समझौते पर राजनाथ सिंह ने कहा कि इसमें कहा गया है कि जब तक सीमा का पूर्ण समाधान नहीं होता लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल लाइन का उल्लंघन नहीं किया जाएगा. 1990 से 2003 तक दोनों देशों में मिली-जुली सहमति बनाने की कोशिश की गई, मगर इसके बाद चीन इस दिशा में आगे नहीं बढ़ा. अप्रैल में लद्दाख की सीमा पर चीन के सैनिकों और हथियारों में बढ़ोतरी देखी गई. चीन की सेना ने हमारी गश्ती में बाधा डाली जिसकी वजह से यह स्थित बनी है. रक्षा मंत्री ने कहा कि बहादुर जवानों ने चीनी सेना को भारी क्षति पहुंचाई है और सीमा की भी सुरक्षा की. जवानों ने जहां शौर्य की जरूरत थी शौर्य दिखाया और जहां शांति की जरूरत थी शांति रखी.

- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में अपने बयान के दौरान कहा कि चीन मानता है कि पारंपरिक रेखा के बारे में दोनों देशों की अलग-अलग अपनी-अपनी व्याख्या है. दोनों देश 1950-60 के दशक में इस पर बात कर रहे थे, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया. चीन ने लद्दाख में बहुत पहले कुछ भूमि पर कब्जा किया था, इसके अलावा पाकिस्तान ने चीन को पीओके की भी कुछ भूमि चीन को सौंप दी. यह एक बड़ा मुद्दा है और इसका हल शांतिपूर्ण और बातचीत से निकाला जाना चाहिए. सीमा पर शांति बनाए रखना जरूरी है. 

- राजनाथ सिंह ने कहा कि 1988 के बाद से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में विकास हुआ. भारत का मानना है कि द्विपक्षीय संबंध भी विकसित हो सकते हैं और सीमा का भी निपटारा किया जा सकता है. हालांकि इसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ भी सकता है.

- राजनाथ सिंह ने भारत और चीन के बीच शांति व्यवस्था पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि दोनों को पुरानी स्थिति को बनाए रखना चाहिए. शांति और सद्भाव सुनिश्चित करना चाहिए. चीन भी यही कहता है लेकिन तभी 29-30 अगस्त की रात में फिर से चीन ने पैंगोंग में घुसपैठ का प्रयास किया, लेकिन हमारे सैनिक जवानों ने इस प्रयास विफल कर दिए.

- रक्षा मंत्री ने लोकसभा में कहा कि सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि सीमाएं सुरक्षित हैं और हमारे जवान मातृभूमि की रक्षा में मुस्तैदी से डटे हुए हैं. सशस्त्र सेना और आईटीबीपी की त्वरित तैनाती की गई है. पिछले कई दशकों में चीन ने बड़े पैमाने पर ढांचा विकसित करने की गतिविधियां शुरू की हैं. इसके जवाब में सरकार ने भी बॉर्डर एरिया डिवेलपमेंट का अपना बजट बढ़ा दिया है.

- राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में विवादों का हल शांतिपूर्ण ढंग से करने के लिए भारत प्रतिबद्ध है. मैंने 4 तारीख को चीन के रक्षा मंत्री के सामने स्थिति को रखा. मैंने यह भी कहा कि हम इस मुद्दे को शांति से हल करना चाहते हैं. हमने यह भी कहा कि हम भारत की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं. 

 

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