वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और हैदराबाद के लक्षाई लाइफ साइंसेज प्रा. लिमिटेड को DCGI की ओर से कोविड रोगियों के उपचार के दौरान क्लिनिकल परिणामों में सुधार के लिए कोल्सीसिन (Colchicine) दवा की सुरक्षा और प्रभावकारिता का आकलन करने को लेकर फेस-2 क्लिनिकल ट्रायल की विनियामक अनुमति दे दी गई है.
इस महत्वपूर्ण क्लिनिकल ट्रायल में भागीदार सीएसआईआर इंस्टीट्यूट्स में से सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (आईआईसीटी), हैदराबाद और सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटेग्रेटिव मेडिसिन (आईआईआईएम), जम्मू शामिल हैं.
सीएसआईआर के महानिदेशक डॉक्टर शेखर सी मांडे ने कहा कि कोल्सीसिन दवा कार्डिएक को-मोर्बिडीटीज वाले कोविड मरीजों और प्रोइन्फ्लेमेटरी साइटोकिन्स को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण चिकित्सीय हस्तक्षेप होगा, जिससे तेजी से रिकवरी होगी.
कई वैश्विक अध्ययनों ने पुष्टि की है कि कोरोना संक्रमण और पोस्ट-कोविड सिंड्रोम के दौरान हृदय संबंधी जटिलताओं से कई लोगों की जान चली गई है, और नई या पुनर्निर्मित दवाओं की तलाश करना जरुरी हो गया है.
इसे भी क्लिक करें --- कोरोना: देश में 70 दिन बाद सबसे कम मामले, 24 घंटे में 84,332 नए केस, मौतें 4 हजार पार
सीएसआईआर के दो सहयोगी संस्थानों ने कहा कि वे कोल्सीसिन पर इस दूसरे चरण के क्लिनिकल प्रभावकारिता ट्रायल के परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिससे अस्पताल में भर्ती मरीजों की जान बचाई जा सकती है.
भारत इस प्रमुख दवा के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है और अगर यह सफल रहा तो इसे मरीजों को सस्ती कीमत पर उपलब्ध कराया जाएगा.
लक्षाई लाइफ साइंसेज प्रा. लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी डॉक्टर राम उपाध्याय ने कहा कि पूरे भारत में कई साइटों पर मरीजों का नामांकन पहले ही शुरू हो चुका है और ट्रायल के अगले 8 से 10 हफ्ते में पूरा होने की संभावना है. इस ट्रायल के परिणामों और नियामकीय मंजूरी के आधार पर भारत की बड़ी आबादी को दवा उपलब्ध कराई जा सकती है.