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Corona virus: फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण अधिक मृत्यु दर के कारण, डायबिटीज के रोगी रहें सावधान

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने ब्लैक फंगस पर कहा कि यह चेहरे, मस्तिष्क, आंख और नाक को प्रभावित करता है. मधुमेह (Diabetics) रोगी को इससे सधिक खतरा है.

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अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीज (फ़ोटो- रॉयटर्स) अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीज (फ़ोटो- रॉयटर्स)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • देश में कोरोना के नए मामलों में आई कमी
  • तमिलनाडु में हो रही सक्रिय मामलों में बढ़ोतरी
  • ब्लैक फंगस के खतरे से रहें सावधान

कोरोना महामारी के बीच AIIMS डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि जैसे-जैसे कोविड के मामले बढ़ रहे हैं, यह जरूरी हो गया है कि हम अस्पतालों में भी संक्रमण प्रोटोकॉल का पालन करें. उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में यह देखा गया है कि फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण अधिक मृत्यु दर का कारण बन रहे हैं. वहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि देश में कोरोना के नए केस में कमी आ रही है.

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने ब्लैक फंगस पर कहा कि यह चेहरे, मस्तिष्क, आंख, नाक को प्रभावित करता है. मधुमेह (Diabetics) रोगी को इससे सधिक खतरा है. इसलिए मधुमेह को नियंत्रित करें क्योंकि इससे मृत्यु दर का जोखिम बढ़ जाता है. यह तब अधिक होता है जब कोविड मरीजों को स्टेरॉयड दिए जा रहे हों. स्टेरॉयड को जिम्मेदारी से दिया जाना चाहिए.

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात जहां कोविड मामले काफी ज्यादा है, यहां पिछले 1 सप्ताह में सक्रिय मामलों में कमी आई है. हालांकि, तमिलनाडु में पिछले 1 सप्ताह में सक्रिय मामलों में बढ़ोतरी हुई है.

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संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि देश में सक्रिय मामलों में कमी देखी जा रही है. 3 मई को रिकवरी रेट 81.3% थी, जिसके बाद रिकवरी में सुधार हुआ है. अब रिकवरी रेट 83.83% है. उन्होंने बताया कि 75% मामले 10 राज्यों से आ रहे हैं और कुल सक्रिय मामलों का 80% सिर्फ 12 राज्यों में है.

11 राज्यों में 1 लाख से ज्यादा एक्टिव केस

उन्होंने बताया कि देश में 11 राज्य ऐसे हैं जहां 1 लाख से भी ज्यादा सक्रिय मामले हैं. 8 राज्यों में 50,000 से 1 लाख के बीच सक्रिय मामलों की संख्या बनी हुई है. वहीं 17 राज्य ऐसे हैं जहां 50,000 से भी कम सक्रिय मामलों की संख्या बनी हुई है. देश में 24 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं जहां 15% से ज्यादा पॉजिटिविटी रेट है.

उधर, डॉ. वीके पॉल ने आगे कहा कि देशभर में औसत पहली डोज़ 82% फ्रंटलाइन वर्कर्स को दी गई है. गुजरात में 93%, राजस्थान में 91% और मध्य प्रदेश में 90% फ्रंटलाइन वर्कर्स को पहली डोज दी गई है. दिल्ली में यह 80% है.

उन्होंने कहा कि देशभर में औसत 89% स्वास्थ्यकर्मियों को वैक्सीन की पहली डोज दी गई है. राजस्थान में 95%, मध्य प्रदेश में 96% और छत्तीसगढ़ में 99% स्वास्थ्यकर्मियों को वैक्सीन दी गई है. दिल्ली में यह 78% है. 

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