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Coal Crisis: 18 पावर प्लांट में कोयला खत्म, 15 के पास ही 7 दिन से ज्यादा का स्टॉक, जानें मौजूदा स्थिति

देश में कोयले की कमी का संकट जारी है. सरकार के आंकड़े बताते हैं कि 18 प्लांट में कोयला खत्म हो चुका है.

पावर प्लांट में कोयले की कमी होती जा रही है. (फाइल फोटो-PTI) पावर प्लांट में कोयले की कमी होती जा रही है. (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • देश में कोयले का संकट जारी
  • 18 प्लांट में खत्म हुआ कोयला

Coal Stock in Power Plants: देश में कोयले की कमी का संकट जारी है. रिकॉर्ड तोड़ प्रोडक्शन के बाद भी ऐसे हालात बन गए हैं. देश में 135 पावर प्लांट ऐसे हैं, जहां कोयले से बिजली बनाई जाती है और सरकार के ही आंकड़े बताते हैं कि इनमें से 18 प्लांट में कोयला पूरा खत्म हो चुका है, यानी यहां कोयले का स्टॉक है ही नहीं. सिर्फ 20 प्लांट ऐसे हैं जहां 7 दिन या उससे ज्यादा का स्टॉक बचा है. 

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने बीते रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोयले का संकट होने की बात खारिज कर दी थी. हालांकि, उन्होंने ये बात जरूर मानी थी कि पहले जहां प्लांट में 17-17 दिन का स्टॉक हुआ करता था, वहां अब 4-5 दिन का ही स्टॉक है. उन्होंने कहा था कि जल्द ही इस संकट को दूर कर लिया जाएगा.

वहीं, बिजली मंत्रालय की आंकड़ों की मानें तो 12 अक्टूबर तक देश में 18 प्लांट ऐसे थे जहां एक भी दिन का स्टॉक नहीं था. वहीं, 26 प्लांट में एक दिन का ही स्टॉक बचा था. जबकि, 5 प्लांट में 7 और 15 में ही 7 दिन से ज्यादा का स्टॉक था.

रांची पहुंचे कोयला मंत्री 

देश में जारी कोयला संकट के बीच केंद्रीय कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी झारखंड की राजधानी रांची पहुंचे. उन्होंने यहां सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के पिपरवार प्लांट का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया. उनके साथ कोल इंडिया के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल और सीसीएल के सीएमडी थे. केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने सबसे पहले अशोका माइंस का जायजा लिया. उन्होंने कहा कि घबराने वाली कोई बात नहीं है. इम्पोर्ट में कमी और बारिश में पानी भर जाने की वजह से ऐसी स्थिति बन गई थी, लेकिन इसे दूर कर लिया जाएगा.

रिकॉर्ड उत्पादन के बीच हो रहा संकट

ये स्थिति तब हो रही है जब इस साल कोल इंडिया लिमिटेड ने कोयले का रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन किया है. जानकारी के मुताबिक, इस साल अगस्त से सितंबर तक कोल इंडिया ने 249.8 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया है, जो पिछली साल की समान अवधि में हुए उत्पादन से 13.8 मिलियन टन ज्यादा है.

लेकिन फिर भी ये संकट क्यों? तो इस बारे में सरकार का कहना है कि कोविड की दूसरी लहर के बाद अर्थव्यवस्था में सुधार आया है जिससे बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है. साथ ही विदेशों से आने वाले कोयले की कीमत बढ़ गई, जिससे आयात प्रभावित हुआ है.

इसके अलावा कोयला खदानों के आसपास बारिश होने से उत्पादन प्रभावित हुआ है. हालांकि, इस बीच एक बात ये भी निकल कर आ रही है कि इसी साल मार्च में पावर प्लांट्स को कोयले का स्टॉक रखने की सलाह दी थी, लेकिन इस सलाह को नजरअंदाज कर दिया गया.

(इनपुटः संजय ओझा और आकाश कुमार)

 

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