चीन और भारत के बीच में रिश्ते पहले की तुलना में कुछ बेहतर जरूर हुए हैं, सीमा पर तनाव भी कुछ कम हुआ है, लेकिन भारत अभी भी पूरी तरह मुस्तैद है. एलएसी पर चीन की हर साजिश को फेल करने के लिए तैयर खड़ा है. इसी कड़ी में चीन को सबक सिखाने के लिए भारत न्योमा में एक नई एयरफील्ड तैयार करने जा रहा है. ये एयरफील्ड चीनी बॉर्डर से सिर्फ 50 किलोमीटर दूर है.
चीन की कैसे होगी घेराबंदी?
बताया जा रहा है कि जब ये एयरफील्ड अपग्रेड कर दी जाएगी, तो भारतीय वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी. किसी भी संकट से निपटने के लिए उसका रिस्पॉन्स टाइम काफी कम हो जाएगा. ऐसे में समय रहते दुश्मन को सबक सिखाया जा सकेगा. जानकारी के लिए बता दें कि बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन ही इस एयरफील्ड का निर्माण करने वाला है. यहां ये समझना जरूरी हो जाता है कि Nyoma Advanced Landing Ground (ALG) हमेशा से ही भारत के लिए रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण रहा है. ये एयरफील्ड क्योंकि एलएसी के सबसे ज्यादा करीब है, ऐसे में इसका सक्रिय रहना और ज्यादा जरूरी हो जाता है.
एयरफील्ड से कैसे मिलेगी मदद?
जब इस एयरफील्ड को अपग्रेड कर दिया जाएगा, सेना के जवानों से लेकर हथियारों की आवाजाही में एक अलग ही तेजी देखने को मिल जाएगी. वायुसेना के अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट भी लगातार गश्त लगाते दिख जाएंगे. ऐसे में चीन पर एक पैनी नजर बनाए रखना आसान रहेगा और उसकी हर साजिश का समय से पहले पता चल जाएगा. वैसे भी अभी पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों की सेना पीछे जरूर हटी हैं, लेकिन खबर है कि चीन कुछ इलाकों में अभी भी निर्माण कार्य कर रहा है. ऐसे में उन गतिविधियों के बीच ये एयरफील्ड भारत की स्थिति को जमीन पर मजबूत करने का काम करेगी. वहीं इस एक एयरफील्ड की वजह से लेह एयर स्पेस और एलएसी के बीच का अंतर भी कम हो जाएगा.
LAC से 100 किलोमीटर दूर मिलिट्री ड्रिल
वैसे एक तरफ एयरफील्ड निर्माण पर जोर है तो वहीं दूसरी तरफ भारत और अमेरिका की उत्तराखंड के औली में एक बड़ी मिलिट्री ड्रिल होने वाली है. ये ड्रिल एलएसी से सिर्फ 100 किलोमीटर दूर है, ऐसे में इसके जरिए चीन को भी बड़ा संदेश दिया जाएगा. इसके अलावा भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र (इंडो-पैसिफिक) में QUAD देशों के साथ मालाबार नेवल एक्सरसाइज में भी शामिल होने वाला है. ये एक्सरसाइज जापान के योकुसाका में होने वाली है.