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राहुल गांधी बोले- छठ का पर्व उगते और डूबते सूरज का दर्शाता है महत्व

चार दिनों तक चलने वाले छठ महापर्व का आज तीसरा दिन है. आज शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. इसे संध्या अर्घ्य भी कहते हैं.

छठ पूजा का तीसरा दिन आज (फाइल फोटो) छठ पूजा का तीसरा दिन आज (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चार दिनों तक चलने वाले छठ महापर्व का तीसरा दिन आज
  • राष्ट्रपति कोविंद, राहुल समेत कई नेताओं ने दी शुभकामनाएं

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने छठ पूजा के मौके पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं. इसके साथ ही उन्होंने लोगों को छठ पूजा के विशेष महत्व को भी समझाया है. शुक्रवार को एक ट्वीट करते हुए राहुल गांधी ने लिखा कि एक ऐसा व्रत-पूजन जो उगते और डूबते सूरज दोनों का ही महत्व दर्शाता है. छठ पर्व की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं. 

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी लोगों को छठ पूजा की शुभकामनाएं दी हैं. उन्होंने लिखा है कि छठी मैया सभी नागरिकों को बढ़िया स्वास्थ्य और समृद्धि दें. इस मौके पर सभी देशवासियों को प्रकृति और पर्यावरण को बचाए रखने का संकल्प लेना चाहिए. राष्ट्रपति ने लोगों से छठ त्योहार के दौरान लोगों से कोरोना महामारी को ध्यान में रखकर त्योहार मनाने की अपील की है. 

उन्होंने लिखा, 'आस्था के पावन महापर्व, छठ पूजा पर देशवासियों को शुभकामनाएं। मेरी कामना है कि इस वर्ष छठ मैया सभी देशवासियों को आरोग्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करे. आइए, छठ पूजा के शुभ अवसर पर प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का संकल्प लें तथा कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए पर्व मनाएं.'

वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी लोगों को छठ पूजा की शुभकामनाएं दी हैं. उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा है, 'भगवान सूर्य की उपासना और लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं. छठी मईया आप सबकी सभी मनोकामनाएं पूरी करें, आप स्वस्थ रहें, समृद्ध रहें.

सोनिया गांधी का छठ पर्व का संदेश

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा के अवसर पर समस्त देशवासियों, विशेष कर बिहार व देश के हर कोने में बिहारवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं. सोनिया गांधी ने कोरोना काल में हो रही छठपूजा के सभी व्रतियों तथा उनके परिजनों से सावधानी बरतने की अपील करते हुए उन्हें बधाई और ढेर सारी शुभकामनाएं दी हैं.

उन्होंने कहा कि सूर्य की पूजा और उपासना दुनिया की अनेक प्राचीन संस्कृतियों में भिन्न भिन्न रूपों में रही है और भारत में सूर्यदेव की पूजा की परंपरा आदि काल से चली आ रही है. बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा झारखंड सहित देश के अनेक स्थानों पर छठ पूजा का आयोजन बड़े पैमाने पर होने से हमें जीवन में स्वच्छता, भाईचारे तथा मर्यादा का पालन करने का संदेश भी देता है.

डूबते सूर्य की पूजा के पश्चात उदीयमान सूर्य की पूजा हमारी सर्वोच्च आस्था तथा गौरवशाली परंपरा की एक ऐसी मिसाल है जो भारत के अद्भुत संस्कृति को प्रकट करता है. 

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आज डूबते सूर्य को दिया जाएगा अर्घ्य

चार दिनों तक चलने वाले छठ महापर्व का आज तीसरा दिन है. आज शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. इसे संध्या अर्घ्य भी कहते हैं. उगते सूर्य को अर्घ्य देने की रीति तो कई व्रतों और त्योहारों में है लेकिन डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा केवल छठ में ही है.

क्‍यों दिया जाता है डूबते सूर्य को अर्घ्‍य?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सायंकाल में सूर्य अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं. इसलिए छठ पूजा में शाम के समय सूर्य की अंतिम किरण प्रत्यूषा को अर्घ्य देकर उनकी उपासना की जाती है. कहा जाता है कि इससे व्रत रखने वाली महिलाओं को दोहरा लाभ मिलता है. जो लोग डूबते सूर्य की उपासना करते हैं, उन्हें उगते सूर्य की भी उपासना जरूर करनी चाहिए.

ज्योतिषियों का कहना है कि ढलते सूर्य को अर्घ्य देकर कई मुसीबतों से छुटकारा पाया जा सकता है. इसके अलावा इससे सेहत से जुड़ी भी कई समस्याएं दूर होती हैं. वैज्ञानिक दृष्टिकोण के मुताबिक ढलते सूर्य को अर्घ्य देने से आंखों की रोशनी बढ़ती है.

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