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तिब्बत को लेकर CDS बिपिन रावत ने दिया बड़ा बयान, सरदार पटेल की दिलाई याद

बिपिन रावत के मुताबिक सरदार पटेल तिब्बत को हमेशा एक स्वतंत्र देश की तरह देखते थे. वो इसे बफर देश बनाना चाहते थे जिससे चीन-भारत के सीमा संघर्ष को रोका जा सके.

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CDS बिपिन रावत का चीन पर बड़ा बयान (ANI) CDS बिपिन रावत का चीन पर बड़ा बयान (ANI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • CDS बिपिन रावत का चीन पर बड़ा बयान
  • तिब्बत को बताया स्वतंत्र, सरदार को दूरदर्शी

CDS बिपिन रावत ने रविवार को भारतीय सेना को लेकर बड़ा संदेश दिया. उन्होंने जोर देकर कहा कि सेना को विवादित सीमाओं पर पूरे साल तैनात रहने की जरूरत है. वहीं अपने संबोधन में रावत ने चीन पर भी जमकर निशाना साधा. उन्होंने सरदार पटेल का जिक्र करते हुए चीन को आईना दिखाने का काम किया.

बिपिन रावत के मुताबिक, सरदार पटेल तिब्बत को हमेशा एक स्वतंत्र देश की तरह देखते थे. वो इसे बफर देश बनाना चाहते थे जिससे चीन-भारत के सीमा संघर्ष को रोका जा सके. रावत ने दावा किया कि सरदार द्वारा पंडित नेहरू को लिखी गई चिट्ठी में इस बात का जिक्र है.

सरदार पटेल एक दूरदर्शी थे, उन्होंने हमेशा एक स्वतंत्र तिब्बत का सपना देखा था. वो तिब्बत को एक बफर देश बनाना चाहते थे. सरदार पटेल और जवाहर लाल नेहरू के बीच जो पत्र लिखे गए थे, उसमें भी इस बात का जिक्र आता है.

 

बिपिन रावत, CDS

अब यहां पर दो बातें जानना जरूरी हो जाता है. पहला तो ये भी बफर देश एक ऐसा देश होता है जो उन दो देशों के बीच स्थित रहता है जहां पर लंबे समय से संघर्ष चल रहा हो. ऐसे में बफर देश के जरिए दूसरे देशों के बीच तनाव को कम करने का प्रयास रहता है.

वहीं, दूसरा पहलू ये है कि चीन ने हमेशा से तिब्बत को अपना हिस्सा बताया है, ऐसे में जब बिपिन रावत सरदार पटेल के बयान के जरिए तिब्बत को स्वतंत्र बताते हैं, तो चीन का इस पर बौखलाना लाजिमी रहेगा.

वैसे अपने संबोधन के दौरान बिपिन रावत ने इतिहास के कई पुराने पन्नों को खोला. उसके जरिए उन्होंने वर्तमान भारत-चीन की स्थिति पर भी अपने विचार रखे. रावत ने कहा कि जब-जब कोई देश अपनी सेना को ही नजरअंदाज कर देता है, तब बाहरी ताकतें उस स्थिति का फायदा उठाने का प्रयास करती हैं.

1950 में भारत ने अपने सुरक्षा तंत्र को डगमगाने दिया था, इसका परिणाम 1962 में चीन संग जंग के दौरान चुकाना पड़ा.

अब सीडीएस मानते हैं कि 1962 के बाद भी कई बार चीन संग भारत की झड़पें हुई थीं. फिर चाहे वो 1967 में सिक्किम के नाथू ला में, 1986 में वांगडुंग में, 2017 में डोकलाम में हो. रावत के मुताबिक अब भारतीय सेना सीमाओं पर मुस्तैद रहती है. ये तमाम झड़पें भी इसी ओर इशारा करती हैं कि अब देश की सेना हर खतरे से निपटने के लिए तैयार रहती है.

 

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