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'पहाड़ी हूं, इतनी जल्दी नहीं मरने वाला', पहले हेलिकॉप्टर हादसे में बचने के बाद बोले थे बिपिन रावत

8 दिसंबर को हुई हेलिकॉप्टर दुर्घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रखा दिया है. इस हादसे में सेना के कुल 11 अधिकारियों के अलावा सीडीएस बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत का निधन हो गया. ये भारतीय सेना के लिए बहुत बड़ी क्षति है. लेकिन क्या आपको पता है कि सीडीएस रावत एक बार पहले भी हेलिकॉप्टर दुर्घटना का सामना कर चुके हैं.

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BIPIN RAWAT
BIPIN RAWAT
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पहले भी गिरा था CDS रावत का हेलिकॉप्टर
  • पहाड़ी हूं... इतनी जल्दी नहीं मरने वाला

8 दिसंबर को हुई हेलिकॉप्टर दुर्घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रखा दिया है. इस हादसे में सेना के कुल 11 अधिकारियों के अलावा सीडीएस बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत का निधन हो गया. ये भारतीय सेना के लिए बहुत बड़ी क्षति है. लेकिन क्या आपको पता है कि सीडीएस रावत एक बार पहले भी हेलिकॉप्टर दुर्घटना का सामना कर चुके थे. इस दुर्घटना के बारे में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एमजी दातार ने विस्तार से बताया.

'पहाड़ों का रहने वाला हूं, ऐसे नहीं होगी मेरी मौत'

दातार ने बताया कि- आज से करीब 6 साल पहले 2015 में भी जनरल बिपिन रावत को लेकर उड़ान भर रहा एक हेलिकॉप्टर क्रैश कर गया था लेकिन उस समय वो बाल-बाल बच गए थे. उस वक्त वे लेफ्टिनेंट जनरल (एलजी) के रूप में सेना में कार्यरत थे. साल 2015 में 3 फरवरी को जनरल रावत सेना के तीन जवानों के साथ एक चीता हेलिकॉप्टर में सवार थे. नगालैंड में दीमापुर जिले के रबगापहाड़ हेलीपैड से उड़ान भरने के कुछ सेकंड बाद ही हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. हेलिकॉप्टर ने उड़ान भरी ही थी कि इंजन जमीन से करीब 20 फुट की ऊंचाई पर बंद हो गया था, जिस वजह से हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हालांकि इस घटना में उस चीता हेलिकॉप्टर पर सवार लोगों को मामूली चोट ही आई थी. तब बिपिन रावत ने रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एमजी दातार से कहा था- मैं पहाड़ों का रहने वाला हूं, इतनी जल्दी नहीं मरने वाला.  मेरी मौत ऐसे नहीं होगी.

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रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एमजी दातार
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एमजी दातार

3 ही शवों की हो सकी पहचान
 
बता दें कि दुघर्टनाग्रस्त हुए भारतीय वायुसेना के MI-17V5 हेलिकॉप्टर में कुल 14 लोग सवार थे. इसमें सिर्फ ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह की ही जान बची है लेकिन उनकी भी हालत गंभीर बनी हुई है. लगभग 45% जल चुके कैप्टन वरुण अस्पताल में मौत से जंग लड़ रहे हैं. यहां जान गंवा चुके सभी 13 लोगों में केवल 3 के ही शव की पहचान हो सकी है. इसमें सीडीएस रावत, उनकी पत्नी मधुलिका और ब्रिगेडियर एलएस लिड्डर के नाम शामिल है जबकि अन्य अधिकारियों की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट प्रक्रिया में है. इन लोगों के शव को आज पालम एयरबेस लाया गया. जहां पीएम नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें श्रद्धांजलि दी.

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