भारतीय नौसेना के एक पूर्व बड़े अधिकारी कानूनी मुश्किल में फंस गए हैं. केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने रिटायर्ड नेवी कैप्टन रामिंदर सिंह वाधवा के खिलाफ एक बड़ा एक्शन लिया है. CBI ने उनके खिलाफ अपनी कानूनी और जायज कमाई से बहुत ज्यादा संपत्ति इकट्ठा करने के आरोप में केस दर्ज किया है. एजेंसी का आरोप है कि नौकरी के दौरान उन्होंने अपनी ज्ञात आय से ज्यादा संपत्ति जुटाई.
यह पूरा मामला साल 2010 से लेकर 2020 के बीच का है, जिसकी जांच अब शुरू हुई है. कैप्टन रामिंदर सिंह वाधवा अपनी सर्विस के दौरान नौसेना के बेहद खास विभाग डायरेक्टरेट ऑफ नेवल डिजाइन (Directorate of Naval Design) में तैनात थे. यह विभाग नौसेना के युद्धपोतों और पनडुब्बियों के डिजाइन से जुड़ा अहम तकनीकी विंग है, उन्हें डिजाइन करने का मुख्य जिम्मा इसी विंग के पास होता है.
सीबीआई की FIR के मुताबिक, इस अहम पद पर रहने के दौरान कैप्टन वाधवा ने अपनी तय सैलरी और जायज आमदनी से बहुत ज्यादा चल और अचल संपत्ति खड़ी कर ली. अब CBI उनके और उनके परिवार के नाम पर मौजूद बैंक खातों, प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज और अलग-अलग जगहों पर किए गए निवेश के सारे रिकॉर्ड खंगालने में जुटी है. जांच टीम यह पता लगा रही है कि आखिर इस 10 साल के दौरान उनके पास इतना पैसा कहां से आया.
भ्रष्टाचार कानून के तहत केस दर्ज, जांच में जुटी CBI की टीम
CBI ने यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सरकारी कर्मचारी द्वारा किए गए आपराधिक कदाचार की धाराओं में दर्ज किया है. एजेंसी अभी इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि कैप्टन वाधवा के पास कुल कितनी अवैध संपत्ति है. अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर इस मामले में आगे तलाशी या छापेमारी भी की जा सकती है.
इस मामले में अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है, क्योंकि CBI की यह जांच अभी बिल्कुल शुरुआती स्टेज पर है. लेकिन इस केस के सामने आने के बाद रक्षा गलियारों में खलबली मच गई है. दरअसल, जिस नेवल डिजाइन विभाग में कैप्टन वाधवा तैनात थे, वह नौसेना की बेहद संवेदनशील तकनीकी विंग है. वहां काम करने वाले अधिकारियों के पास देश के बेहद गोपनीय जहाज निर्माण और रक्षा खरीद से जुड़े संवेदनशील कार्यक्रमों की जानकारी होती है. यही वजह है कि CBI इस पूरे मामले को बहुत गंभीरता से देख रही है.