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Budget 2026: इस बार कांजीवरम साड़ी... 8 साल में निर्मला सीतारमण ने साड़ी से कब क्या दिए सियासी संदेश?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बजट के दिन पहनी हुई साड़ी फैशन से कहीं ज़्यादा है. यह कल्चर का एक प्रतीक है. कांजीवरम साड़ी सदियों पुरानी भारतीय बुनाई की हेरिटेज है.

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निर्मला सीतारमण की बजट से जुड़ी साड़ी का इतिहास दिलचस्प है. (Photo: PTI)
निर्मला सीतारमण की बजट से जुड़ी साड़ी का इतिहास दिलचस्प है. (Photo: PTI)

भारत में यूनियन बजट का दिन हमेशा एक हाई-प्रोफाइल इवेंट होता है, जिसे नागरिक, बिज़नेस और ग्लोबल इन्वेस्टर सभी देखते हैं. टैक्स से जुड़े ऐलानों, सरकारी खर्च और आर्थिक नीति पर सबकी नजर होती है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस दिन के फैशन में एक और एलिमेंट जोड़ा है, जो कल्चर और हेरिटेज को दिखाता है.

1 फरवरी, 2026 को अपने लगातार नौवें बजट प्रेजेंटेशन के लिए, सीतारमण ने हाथ से बुनी हुई शानदार कांजीवरम साड़ी पहनी थी, सिल्क की है. यह साड़ी अपने चमकीले रंगों, रिच टेक्सचर और सोने की ज़री के बॉर्डर के लिए मशहूर है.

पिछले कुछ सालों में साड़ी का सेलेक्शन सोच-समझकर किया गया है, जो भारत की क्षेत्रीय कपड़ा परंपराओं और स्थानीय बुनकरों की कला को लाइम-लाइट में लाती है.

कांचीवरम साड़ी: विरासत का प्रतीक

तमिलनाडु से संबंधित कांजीवरम साड़ी का इतिहास सदियों पुराना है. बजट के दिन इसे पहनकर, निर्मला सीतारमण न सिर्फ भारत की सांस्कृतिक विरासत को अपनाती हैं, बल्कि आधुनिक आर्थिक युग में पारंपरिक कारीगरी की अहमियत को भी बारीकी से उजागर करती हैं.

कांचीवरम साड़ियों को भारत की सबसे प्रतिष्ठित हाथ से बुनी सिल्क साड़ियों में गिना जाता है. अपने चमकीले रंगों, मोटी बॉर्डर और सोने की ज़री के काम के लिए जानी जाने वाली ये साड़ियां सुंदरता और टिकाऊपन की पहचान हैं.

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अपने नौवें बजट के लिए कांचीवरम साड़ी चुनकर, निर्मला सीतारमण ने भारत की समृद्ध बुनाई परंपराओं को अहमियत दी है. इसके साथ ही, अपने प्रजेंटेशन में गरिमा और अधिकार का भाव भी जोड़ा है.

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साल-दर-साल वित्त मंत्री की स्पेशल साड़ी...

वित्त मंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान, निर्मला सीतारमण स्पेशल साड़ियां चुनने के लिए पहचानी जाती हैं.

  • 2025: बिहार की मधुबनी की साड़ी, जिसमें मछली के मोटिफ थे. इसके जरिए क्षेत्रीय फोकस को उजागर किया गया.
  • 2024: आंध्र प्रदेश और बंगाल की मंगलगीरी कॉटन और टसर सिल्क ने क्षेत्रीय विकास का संकेत दिया.
  • 2023: कसूती कढ़ाई वाली लाल इल्कल साड़ी, जो ताकत और निरंतरता का प्रतीक है.
  • 2022: ओडिशा की बोमकाई साड़ी, जिसने ग्रामीण सशक्तिकरण को उजागर किया.
  • 2021: तेलंगाना की पोचमपल्ली इकत ने महामारी के बाद लचीलेपन को दर्शाया.
  • 2020: चमकीली पीली-सुनहरी सिल्क साड़ी.
  • 2019: सुनहरे बॉर्डर वाली गुलाबी मंगलगीरी साड़ी. 

निर्मला सीतारमण की हर साड़ी एक कहानी कहती है और 2026 के लिए कांजीवरम साड़ी मकसद के साथ फैशन की इस परंपरा को जारी रखती है.

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