अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भारत में अपने कामकाज पर रोक लगा दी है. एमनेस्टी इंटरनेशनल के इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रवक्ता राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि विदेश से अगर धन लेना है तो भारत के कानून को मानना होगा. एमनेस्टी इंटरनेशनल पर निशाना साधते हुए बीजेपी सांसद ने कहा कि ये भारत के बारे में बोलती है, लेकिन पाकिस्तान के अल्पसंख्यक के बारे में कुछ नहीं बोलती.
राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि साल 2000 में FCRA के तहत एमनेस्टी इंटरनेशनल को छूट मिली थी, लेकिन उसके बाद कभी छूट नहीं मिली. बीजेपी सांसद ने कहा कि जांच से बचने के लिए उसने 4 संस्थान बनाए. 10 करोड़ रुपये आए, जिसे FDI बताया गया. लेकिन सरकार की जांच में पाया गया कि एमनेस्टी पैसे का रंग बदल रही है. ये संस्था कहती है कि वो मानवाधिकार को लेकर काम करती है.
राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि एमनेस्टी इंटरनेशनल को कई देशों में रोक दिया गया है. 2009 में भी उनका लाइसेंस निलंबित किया गया था. बीजेपी सांसद ने कहा कि भारत में जो भी काम करेगा उसे यहां का कानून मनना ही होगा. कई गैर कानूनी काम एमनेस्टी इंटरनेशनल ने किए हैं.
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के अधिकारी ने क्या कहा
एमनेस्टी का आरोप है कि 10 सितंबर 2020 को भारत सरकार ने संस्था के सभी अकाउंट को फ्रीज कर दिया. इसके बाद उसे अपने अधिकतर स्टाफ को निकालना पड़ा. संस्था ने भारत सरकार पर निराधार और प्रेरित कार्रवाई करने का आरोप लगाया है.
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के कार्यकारी निदेशक अविनाश कुमार ने कहा कि पिछले दो सालों से संस्था के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और बैंक खातों को फ्रीज करना आकस्मिक नहीं है. प्रवर्तन निदेशालय सहित सरकारी एजेंसियों द्वारा निरंतर उत्पीड़न किया जा रहा है. हाल में हमने दिल्ली हिंसा और जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर अपनी आवाज उठाई, जिसके बाद सरकार ने कार्रवाई की.