बांग्लादेश के चटगांव शहर की एक स्पीड ट्रायल कोर्ट ने सोमवार को हिंदू संन्यासी और पूर्व ISCON लीडर चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी समेत 39 लोगों पर चार्ज फ्रेम कर दिए. ये केस नवंबर 2024 में सरकारी जूनियर प्रॉसीक्यूटर वकील सैफुल इस्लाम आलिफ की हत्या से जुड़ा है. कोर्ट ने चिन्मय पर पेनल कोड की धारा 302 (हत्या) और 109 (साजिश) लगाई है, जबकि बाकी 22 पर अलग-अलग धाराएं लगाई गईं.
कैसे शुरू हुआ विवाद
चिन्मय कृष्ण दास बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण ज्योति के प्रवक्ता हैं. नवंबर 2025 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद हिंदू समुदाय पर हमलों के खिलाफ उन्होंने कई रैलियां निकाली थीं. 25 नवंबर 2024 को ढाका एयरपोर्ट से उन्हें राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया. अगले दिन चटगांव कोर्ट में उनकी जमानत खारिज हुई तो उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया. ये प्रदर्शन हिंसक हो गया और उसी दौरान वकील सैफुल इस्लाम आलिफ की चाकू मारकर हत्या कर दी गई. हत्या कोर्ट परिसर के बाहर हुई.
कोर्ट में क्या हुआ
चटगांव डिविजनल स्पीड ट्रायल ट्रिब्यूनल के जज ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं. अभियोजन पक्ष ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और कुछ कबूलनामों से साफ है कि चिन्मय और उनके 38 फॉलोअर्स इसमें शामिल थे. बचाव पक्ष ने आरोपों का खंडन किया, लेकिन कोर्ट ने सभी 39 पर ट्रायल शुरू करने का फैसला सुनाया.
कुल 39 आरोपितों में से 23 (चिन्मय समेत) जेल में हैं और उन्हें कोर्ट में पेश किया गया. बाकी 16 फरार हैं. चिन्मय को SWAT टीम ने छाता लगाकर और भारी सुरक्षा में कोर्ट लाया. बाहर वकीलों का ग्रुप 'हत्या करने वाले' यानी हत्यारा कहकर नारे लगा रहा था.
फिर से हो सकती है धार्मिक हिंसा?
ये केस बांग्लादेश में हिंदू-मुस्लिम तनाव को फिर उजागर कर रहा है. हिंदू वहां की आबादी का करीब 8% हैं. चिन्मय की गिरफ्तारी से भारत-बांग्लादेश रिश्तों में भी खटास आई थी, भारत ने चिंता जताई थी. अभियोजन वकील रेहानुल वाजेद ने कहा कि ये संवेदनशील मामला है जो सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है.
कोर्ट ने गवाहों के बयान 2 फरवरी से शुरू करने का फैसला किया है. ट्रायल अब तेजी से चलेगा. चिन्मय ने कोर्ट में आरोपों से इनकार किया है और खुद को निर्दोष बताया है.