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बॉर्डर संघर्ष: मिजोरम से सटे 3 जिलों में असम तैनात करेगा कमांडो बटालियन, शहीदों के परिवार को 50 लाख की मदद

असम-मिजोरम खूनी संघर्ष में जान गंवाने वाले 5 पुलिसकर्मियों के लिए सीएम हेमंत बिस्वा शर्मा ने मुआवजे का ऐलान किया है. इसमें शहीद हुए पांच पुलिसकर्मियों के परिवारों को 50-50 लाख की आर्थिक मदद मिलेगी.

असम सीएम हेमंत बिस्वा शर्मा असम सीएम हेमंत बिस्वा शर्मा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • असम मिजोरम से सटे 3 जिलों में कमांडो तैनात करेगा
  • शहीद पुलिसकर्मियों के परिवार को आर्थिक मदद दी जाएगी

असम-मिजोरम के बीच बॉर्डर विवाद (assam mizoram border dispute) में जो खूनी संघर्ष हुआ, उसके बाद असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा ने बड़ा फैसला किया है. इसमें मिजोरम से सटे तीन जिलों में कमांडो बटालियन की तैनाती का ऐलान किया गया है. सीएम हेमंत बिस्वा शर्मा ने बताया कि कछार, करीमगंज, हैलाकांडी में तीन कमांडो बटालियन की तैनाती होगी.

इस बीच ताजा जानकारी यह है कि गृह सचिव ने विवाद पर चर्चा के लिए असम और मिजोरम के मुख्य सचिवों के साथ मीटिंग बुलाई है. यह मीटिंग कल सुबह 10.30 के करीब हो सकती है. वहीं असम सीएम ने यह भी कहा है कि वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे और गुजारिश करेंगे कि जंगल की जमीन पर कब्जा ना होने दिया जाए.

असम से जुड़ा एक और अपडेट आया है. हिंसा में घायल कछार पुलिस अधीक्षक को अब इलाज के लिए मुंबई एयरलिफ्ट किया गया है. यहां कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल या चिकित्सा अनुसंधान संस्थान में उनका इलाज होगा. बता दें कि असम और मिजोरम के बीच सीमा विवाद बरसों से चला आ रहा है. मिजोरम के साथ राज्य की 'संवैधानिक सीमा' की रक्षा करते हुए सोमवार को असम पुलिस के पांच कर्मी शहीद हो गए और 60 से अधिक लोग घायल हो गए.

असम सीएम ने किया आर्थिक मदद का ऐलान

असम-मिजोरम खूनी संघर्ष में जान गंवाने वाले 5 पुलिसकर्मियों के लिए सीएम हेमंत बिस्वा शर्मा ने मुआवजे का ऐलान किया है. इसमें शहीद हुए पांच पुलिसकर्मियों के परिवारों को 50-50 लाख की आर्थिक मदद मिलेगी. इसके साथ उनके परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी मिलेगी. इसके साथ-साथ सभी घायलों कों 1-1 लाख की मदद मिलेगी.

कुछ अन्य ऐलान भी किए गए हैं. इसमें कहा गया है कि मिजोरम सीमा पर तैनात असम पुलिसकर्मियों को एक महीने की अधिक सैलरी दी जाएगी.

असम और मिजोरम के झगड़े की असली वजह?

देश के आजाद होने के बाद अगर पूर्वोत्तर के नक्शे पर नजर डालें तो असम सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था. और तब असम के भीतर ही मिजोरम, एज़वाल जिले के रूप में स्थापित था. एक लंबी लड़ाई के बाद मिजोरम को पहले केंद्र शासित प्रदेश और फिर अलग राज्य का दर्जा दिया गया था. लेकिन इसके बाद असम और मिजोरम में सीमा का जो बंटवारा हुआ, उसको लेकर दोनों राज्यों के बीच विवाद गहराता रहा है. 

इसकी असली वजह ये है कि सीमाओं पर पूरी तरह से जंगली इलाका है, ऐसे में भले ही नक्शे पर दो राज्य आसानी से बंटते दिखते हो लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है. असम के कछार और हाइलाकांडी ज़िलों से मिजोरम की सीमा लगती है. असम के कछार, हैलाकांडी और करीमगंज जिले की सीमा मिजोरम के कोलासिब, आईजॉल और मामित से लगती हुई निकलती है.

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