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एक साल में ही Pollution से 3 लाख लोगों की मौतें हुईं, यूरोप ने दिए आंकड़े

दिल्ली-एनसीआर (Delhi NCR) में वायु प्रदूषण (Air Pollution) खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है. वायु प्रदूषण इतना ज्यादा हो गया है कि राजधानी दिल्ली गैस चैम्बर में तब्दील होती नजर आ रही है.

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सांकेतिक फोटो (रॉयटर्स) सांकेतिक फोटो (रॉयटर्स)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • वायु प्रदूषण से दुनिया को खतरा
  • लाखों लोगों की ले रहा है जान
  • दिल्ली में भी हालात खराब

भारत समेत दुनिया के कई देश वायु प्रदूषण (Air Pollution) से निपटने की जद्दोजहद में लगे हैं. इस बीच यूरोपीय पर्यावरण एजेंसी (European Environment Agency) ने कहा है कि सूक्ष्म कण वायु प्रदूषण के कारण समय से पहले होने वाली मौतों में पूरे यूरोप में सालाना 10 प्रतिशत की गिरावट आई है. लेकिन वायु प्रदूषण अभी भी तीन लाख सात हजार समय से पहले होने वाली मौतों के लिए जिम्मेदार है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, वायु प्रदूषण दुनिया भर में सालाना 70 लाख अकाल मृत्यु का कारण बनता है. 

यूरोपीय पर्यावरण एजेंसी (EEA) की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नवीनतम वायु गुणवत्ता दिशानिर्देशों का यूरोपीय संघ के सदस्यों द्वारा पालन किया जाता है, तो 2019 में दर्ज की गई मौतों की नवीनतम संख्या आधी हो सकती है. 

हालात सुधर रहे, लेकिन स्थिति अभी भी गंभीर

रिपोर्ट में बताया गया कि 1990 के दशक की शुरुआत में, हवा में व्याप्त सूक्ष्म कण, जो फेफड़ों में गहराई से प्रवेश करते हैं, 27 यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में लगभग एक लाख अकाल मृत्यु का कारण बने. 2005 तक यह आंकड़ा आधा होकर 450,000 हो गया था. 

2019 में, फाइन पार्टिकुलेट मैटर (Fine Particulate) या हवा में घुले सूक्ष्म कणों के कारण जर्मनी में 53800, इटली में 49900, फ्रांस में 29800 और स्पेन में 23300 लोगों की अकाल मृत्यु हुई. जबकि पोलैंड में 39300 लोगों की मौत हुई, जो प्रति व्यक्ति जनसंख्या का उच्चतम आंकड़ा है. 

रिपोर्ट के मुताबिक, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड से होने वाली मौतें- मुख्य रूप से कारों, ट्रकों और थर्मल पावर स्टेशनों से 2018 और 2019 के बीच एक चौथाई से 40,000 तक गिर गईं. 2019 में ओजोन से जुड़े घातक परिणाम भी 13 प्रतिशत गिर गए. एजेंसी ने कहा कि वायु प्रदूषण यूरोप में मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा पर्यावरणीय खतरा बना हुआ है. 

वायु प्रदूषण से मौतों का आंकड़ा बढ़ा

बताया गया कि हृदय रोग और स्ट्रोक से सबसे अधिक समय से पहले होने वाली मौतों का कारण वायु प्रदूषण है, इसके बाद कैंसर सहित फेफड़ों की बीमारियां हैं. बच्चों में, वायुमंडलीय प्रदूषण फेफड़ों के विकास को नुकसान पहुंचा सकता है, श्वसन संक्रमण का कारण बन सकता है और अस्थमा को बढ़ा सकता है. 

हालांकि, स्थिति में सुधार हो रहा है लेकिन हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं. यूरोपीय संघ अच्छे वायु प्रदूषण के कारण समय से पहले होने वाली मौतों को 2005 की तुलना में 2030 में कम से कम 55 प्रतिशत कम करना चाहता है. अगर मौजूदा दर से वायु प्रदूषण में गिरावट जारी रही तो एजेंसी का अनुमान है कि 2032 तक लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा. 

दिल्ली में हालात खराब!

दिल्ली-एनसीआर (Delhi NCR) में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है. देश के कई और शहर भी वायु प्रदूषण (Air Pollution Crisis) मार झेल रहे हैं. दिल्ली में वायु प्रदूषण इतना ज्यादा हो गया है कि राजधानी गैस चैम्बर में तब्दील होती नजर आ रही है. वायु प्रदूषण का मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक पहुंच गया है. लॉकडाउन जैसे उपायों पर भी विचार किया जा रहा है. 

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