आजतक रेडियो' के मॉर्निंग न्यूज़ पॉडकास्ट 'आज का दिन' में आज हम चर्चा करेंगे मोदी सरकार की नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलान पर. जानेंगे कि मोदी सरकार की NMP मनमोहन सरकार की RFP से कितनी अलग है? चर्चा भारत में बढ़ रहे क्रिप्टोकरेंसी के क्रेज पर भी होगी. इसके साथ ही इस बात पर भी चर्चा होगी कि लीड्स में भारतीय गेंदबाजों को किस तैयारी से उतरना होगा? इसके अलावा पैरालंपिक खेलों को लेकर भी चर्चा करेंगे.
आजतक रेडियो पर हम रोज़ लाते हैं देश का पहला मॉर्निंग न्यूज़ पॉडकास्ट ‘आज का दिन’, जहां आप हर सुबह अपने काम की शुरुआत करते हुए सुन सकते हैं आपके काम की ख़बरें और उन पर क्विक एनालिसिस. साथ ही, सुबह के अख़बारों की सुर्ख़ियां और आज की तारीख में जो घटा, उसका हिसाब किताब. आगे लिंक भी देंगे लेकिन पहले जान लीजिए कि आज के एपिसोड में हमारे पॉडकास्टर अमन गुप्ता किन ख़बरों पर बात कर रहे हैं.
1. RFP से कितनी अलग है NMP?
प्राईवेटाइजेशन को एक तबका सरकारी सम्पतियों को बेचने से जोड़ कर देखता है तो दूसरे का कहना है कि सरकार के पास पैसे जुटाने के लिए ये बहुत ज़रूरी है. ऐसा ही कुछ विवाद केंद्र और विपक्ष के बीच सरकार की नई नेशनल मॉनिटाइजेशन पाइपलाइन को लेकर भी जारी है. राहुल गांधी ने इसको लेकर बीजेपी पर आरोप लगाया था कि वे सरकारी संपत्ति बेच रहे है, तो कल इसका जवाब देने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आयीं.
उन्होंने इस योजना की आलोचना के लिए राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब मनमोहन सिंह की सरकार ने 2008 में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के लिए RFP (Request for Proposal) नाम से मोनेटाइजेशन इंट्रोड्यूस किया था तब यही कांग्रेस नेता चुप थे। उन्होंने आगे कहा कि मैं राहुल गांधी से पूछना चाहूंगी कि अगर मोनेटाइजेशन का यही मतलब है, जैसा वे बता रहे हैं तो अब नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का मालिक कौन है? क्या जीजाजी अब उसके मालिक हैं?
बहरहाल, मोनेटाइजेशन को लेकर ये जो आरोप-प्रत्यारोप है, कांग्रेस और सरकार के बीच और सरकार का ये कहना कि मोनेटाइजेशन का मतलब बेचना नहीं बल्कि लीज़ पर देना है, क्या वाक़ई सरकार सही है, क्या सच में लोग मोनेटाइजेशन का सही मायने नहीं समझ पा रहे और 2008 में, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के लिए लाए गए RFP का स्वरूप इससे कुछ अलग था या ये बस राजनीतिक छींटाकशी है?
2. नेवल एक्सरसाइज का मतलब क्या है?
क्वाड भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान, इन चार देशों का एक समूह है, जिसका फॉर्मेशन इंडो पैसिफिक रीजन में लोकतांत्रिक देशों के हितों की रक्षा करने के लिहाज़ से किया गया था. इसी क़्वाड के देश नौसेना फिलिपींस ओसियन में होने वाले ज्वाइंट ड्रिल मालाबार एक्सरसाइज का हिस्सा बन रहे हैं. मालाबार नेवल एक्सरसाइज़ की शुरुआत भारत और अमेरिका के बीच 1992 में एक बाईलेट्रल नेवल एक्सरसाइज़ के रूप में हुई थी. बाद में इसमें जापान और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हो गए.
अब यह ज्वाइंट ड्रिल 26 अगस्त यानी आज से शुरू हो रही है जो 29 अगस्त तक चलने वाली है। इस दौरान तमाम उन्नत हथियारों का प्रयोग किया जाएगा. इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य इन देशों की सेनाओं के बीच आपसी समझ और टीम स्पिरिट को बढ़ावा देना है. ऐसे में, इस बार के मालाबार नेवल एक्सरसाइज का मतलब क्या है और इस बार क्या कुछ नया होगा? कहीं इस चक्कर में रूस से संबंध खट्टे न हो जाएं क्योंकि वो क्वाड में भारत की भागीदारी से बहुत खुश नहीं है और आज कल चीन के करीब भी है?
3. भारत में क्यों बढ़ रहे क्रिप्टोकरेंसी को चाहने वाले?
अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है अपने जान माल की सुरक्षा. तालिबानी टॉर्चर से अपनी जान बचाने के साथ लोगों को अपनी कमाई, अपनी जायदाद और निवेश को बचाने की भी बड़ी चिंता है. बैंकिंग सेवाएं बंद या फिर ठप होने की वजह से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इस हालात से निपटने के लिए अफगानी लोगों ने नया तरीका इजाद किया है.
आर्थिक संकट के डर से लोगों ने क्रिप्टोकरेंसी में ज्यादा से ज्यादा निवेश करना शुरु कर दिया है. वैसे तो अफगानिस्तान जैसे देश में क्रिप्टोकरेंसी बहुत ही नया कांसेप्ट है, लेकिन तालिबान के बढ़ते खतरे के बाद लोगों ने इसे बहुत तेजी से अपनाया है. अगर हम ग्लोबल क्रिप्टो एडॉप्शन इंडेक्स में देखें तो अफगानिस्तान 154 देशों की लिस्ट में 20 वें स्थान पर पहुंच गया है. ये दिलचस्प है.
अफगानिस्तान में तो क्रिप्टोकरेंसी की बढ़ती लोकप्रियता की वजह अफगानियों का डर है, लेकिन भारत में भी क्रिप्टोकरेंसी को लेकर लोगों के रुझान में बड़ा उछाल आया है. भारत में अचानक क्रिप्टोकरेंसी की चर्चा बढ़ गई है. एक अनुमान के मुताबिक़ क़रीब डेढ़ करोड़ भारतीयों क्रिप्टोकरेंसी के रूप में अरबों रु. का निवेश कर रखा है. ये तब है जब क्रिप्टोकरेंसी जैसे डिजिटल एसेट को लेकर तमाम अनिश्चितताएं है, फिर भी लोगों में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने की ये होड़ क्यों है?
4. लीड्स में किस तैयारी से उतरना होगा भारतीय गेंदबाजों को?
भारत और इंग्लैंड के बीच तीसरे टेस्ट मैच खेला जा रहा है लीड्स में कल से. बुधवार को पहले दिन, टॉस जीतने के बावजूद भी भारतीय टीम इंग्लैंड के गेंदबाजों के सामने मजबूर दिखाई दी. पहली पारी में भारतीय टीम ने महज 78 रन बनाने में लुढ़क गयी.
वहीं जवाबी बल्लेबाजी को उतरे इंग्लैंड ने बिना विकेट गवाए 120 रन बनाकर भारत पर 42 रन की लीड ले ली है, तीसरे टेस्ट मैच की पहली पारी में भारत की ओर से अंजिक्य राहणे ने सबसे ज्यादा 18 रन बनाए तो वहीं इंग्लैंड की ओर से जैम्स एंडरसन ने 6 रन देकर 3 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए जिसमें भारतीय कप्तान विराट कोहली का भी विकेट शामिल है.
तो क्या कैप्टन कोहली एंड कंपनी से लीड्स की पिच समझने में कोई चूक हो गई या दूसरी मुश्किलें थी? अब गुरुवार यानि आज इंग्लैंड के ख़िलाफ़ भारतीय गेंदबाज़ों को किस तैयारी के साथ उतरना होगा?
और पैरालंपिक में टेबिल टेनिस की भारतीय खिलाड़ी सोनल पटेल और भवीना पटेल दोनों ही अपना पहला-पहला ग्रुप मुकाबला अपनी चाइनीज विरोधियों से हार चुकी हैं. ऐसे में, आज इनके जीतने की उम्मीद कितनी है?