पश्चिमी उत्तर प्रदेश का गुर्जर समुदाय. बीते करीब एक दशक से या यूं कहें कि मुजफ्फरनगर दंगों के बाद से बीजेपी का कोर वोट बैंक माना जाता है. कहा जाता है कि 2014 लोक सभा चुनाव से लेकर 2017 यूपी विधानसभा चुनाव तक बीजेपी की जीत में इस समुदाय की ख़ास भूमिका रही है. अब ऐसे में सभी दल इस कोशिश में हैं कि, गुर्जर समुदाय को अपनी तरफ खींचा जाए. सपा और रालोद के गठबंधन ने इसको लेकर जतन भी किए और कई गुर्जर नेताओं को अपने पाले में किया ताकि बीजेपी का वोट प्रतिशत काटा जा सके.
बहरहाल, एक बात और. पिछले साल सितंबर में, यूपी के गौतम बुद्ध नगर के दादरी में, सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के अनावरण हुआ. इस दौरान शिलापट्ट पर लिखे 'गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज' के गुर्जर शब्द पर किसी ने कालिख पोत दी. इसके बाद राजपूतों और गुर्जरों के बीच तनाव पैदा हो गया और इस घटना के लिए बीजेपी सरकार को कटघरे में खड़ा किया गया.
मोटा-मोटी ये समझ लीजिए कि सम्राट मिहिर भोज को राजपूत और गुर्जर दोनों अपना राजा मानते हैं, और इसको लेकर दोनों समुदाय कई दफा आमने सामने भी आ जाते हैं. खैर, इस घटना को अब चार महीने हो गए हैं, और क़रीब एक महीने में चुनाव हैं. तो अब यहां सवाल ये है कि कुछ ही दिन पहले हुई इस घटना का असर क्या वर्तमान चुनावी सीन पर देखने मिलेगा? वो कौन सी सीटें हैं जिन पर इस समुदाय का प्रभाव है और इन सीटों पर वोटिंग का पैटर्न कैसा रहता है?
पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान हुआ, पंजाब का लेकिन इलेक्शन डेट बदलना पड़ा. संत रविदास जयंती के कारण. दलित समुदाय में रविदास जयंती का एक विशेष महत्व है और पंजाब में दलितों की आबादी जो करीब एक तिहाई है उसमें एक ठीक ठाक स्टेक रविदासिया समुदाय का है जिससे मौजूदा चीफ मिनिस्टर चरनजीत सिंह चन्नी आते हैं. करीब बीस फ़ीसदी दलित इस सम्प्रदाय को मानते हैं. ऐसे में, इसकी प्रोबेबिलिटी बहुत अधिक है कि कांग्रेस चन्नी के ही नेतृत्व में चुनाव में जाए और जीतने के बाद भी उनको ही आगे करे. लेकिन सवाल ये उठता है कि बीस फीसदी दलित आबादी चुनाव को प्रभावित कर सकती है?
कुछ दिनों पहले जब ये बात की जा रही थी कि जनवरी के आखिरी में या फरवरी के शुरूआत में कोविड का पीक देखने को मिल सकता है तो उसी वक्त आइसीएमआर ने गाइडलाइन जारी कर के कहा था कि कोविड टेस्टिंग केवल उनका ही किया जाए जिनमे कोविड के लक्षण दिख रहे हैं.
अब इतना कहना था कि देश में इसको लेकर लोग दो राय में बट गए. एक धड़ा इसके समर्थन में था और दूसरा धड़ा कह रहा था कि अगर टेस्टिंग घटा दी जाएगी तो पीक का पता कैसे चलेगा? और हुआ भी बिल्कुल ऐसा ही, राज्यों ने टेस्टिंग घटाने शुरू कर दिए और दलील दी गई कि साहब हम तो आइसीएमआर के कहे अनुसार ही चल रहे हैं. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन का तो कहना था कि जितना आइसीएमआर ने टेस्ट करने को कहा है उससे दिल्ली सरकार फ़ाजिल ही टेस्ट कर रही हैं.
अब आइसीएमआर के इस गाइडलाइन को एक हफ्ता भी नहीं हुआ था कि कल स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक चिठ्ठी राज्यों और यूटी को भेजी, जिसमें घटते टेस्टिंग को लेकर कनसर्न जाहिर किया गया और टेस्टिंग बढ़ाने की बात की गई. वहीं इसके इतर कोरोना को लेकर जारी किए गए नए गाइडलाइन में उन लोगों को tuberculosis का टेस्ट कराने को कहा गया है जो कोविड पॉजीटिव हैं और उन्हें खांसी आ रही है. साथ ही लोगों को steroids न देने की बात भी स्वास्थ्य मंत्रालय ने दोहराई है. तो क्या कोरोना मरीज़ को TB हो सकती है? औ सरकार
भारत और साउथ अफ्रीका के बीच ओडीआई सीरीज़ शुरू हो रही है. पहला मैच आज पार्ल में खेला जाना है. टेस्ट सीरीज़ में दोनों टीमों के बीच ज़ोरदार मुक़ाबला देखने को मिला था. इसे गंवाने के बाद इंडिया के लिए ये वनडे सीरीज़ काफी अहम हो गई है. और इंडियन क्रिकेट में बहुत कुछ बदल भी गया है. विराट कोहली के नाम के आगे ब्रैकेट में C नहीं लिखा जाएगा, क्योंकि वो भूतपूर्व कप्तान हो गए हैं. लिमिटेड ओवर्स के रेगुलर कैप्टन बनाये गए रोहित शर्मा चोटिल हैं. उनकी गैरमौजूदगी में केएल राहुल कप्तानी का दायित्व संभालेंगे. सुनकर अजीब लग रहा है न? पर क्या करें, जो है सो है. तो पहले मैच में प्लेइंग इलेवन क्या रहने वाला है?, ओपनिंग में राहुल का साथ कौन देगा?, विराट कोहली का रोल क्या रहने वाला है, क्या वो अपने शतक का सूखा खत्म कर पाएंगे?
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